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कौन बना है ढाल?

06/08/2019

कौन बना है ढाल?


क्यावित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी भ्रष्टाचारियों की ढाल बन गए है? मंत्रालय में यह चर्चा आम है। अगर भ्रष्ट अधिकारियों को वित्त मंत्रालय सेवामुक्त कर रहा हैं तो उसमें भेदभाव क्यों? कायदे से सारे भ्रष्ट अधिकारियों को निकाला जाना चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। मंत्रालय उन अधिकारियों पर हाथ नहीं रख रहा है जिनको शीर्ष अधिकारियों का संरक्षण हासिल है। सुमना सेन उनमें से एक हैं। इन पर भ्रष्टाचार का गंभीर है। उन पर आरोप एनडीटीवी को फायदा पहुंचाने का है। उसकी एवज में उन्होंने रिश्वत ली। आरोप है कि पांच करोड़ रु का उनका मकान एनडीटीवी से मिली रिश्वत का हिस्सा है। दिल्ली हाइकोर्ट ने भी माना है कि सुमना सेन रिश्वत ली है। उसने बाकायदा अपने आदेश में कहा कि वे अपने पति के साथ विदेश टहलने गई थीं। वह पैसा कहां से आया इसका कोई प्रमाण वे कोर्ट में पेश नहीं कर सकी हैं। कहने का मतलब साफ है उन्होंने एनडीटीवी को फायदा पहुंचाया। उसके बदले एनडीटीवी ने सुमना सेन को परिवार समेत सैर-सपाटे के लिए विदेश भेजा। इसे उन्होंने छुपाया। आयकर विभाग को सुमना सेन की हेराफेरी का पता चल गया।

सुमना सेन से जुड़ी भ्रष्टाचार की फाइल दबा रखी है। उसे जानबूझ कर बाहर नहीं निकाला। अगर वह बाहर निकलती तो सुमना सेन की छुट्टी हो जाती। कम से कम लुटियन गैंग को यह मंजूर नहीं था। वह इसलिए क्योंकि सुमना सेन के जाने का मतलब था, लुटियन के कई सफेदफोश का बेनकाब हो जाना। उसमें नौकरशाह से लेकर राजनेता तक शामिल थे।

वह जांच करने लगा। उसे रोकने के लिए सुमना सेन दिल्ली हाइकोर्ट पहुंच गई। कोर्ट ने दस्तावेज मांगे। सुमना सेन के पास वह था नहीं। कोर्ट समझ गया कि सुमना सेन मूर्ख बना रही है। लिहाजा उसने आयकर विभाग की जांच को सही ठहराया। इसका मतलब यह हुआ कि कोर्ट ने साफ तौर पर माना कि सुमना सेन ने रिश्वत ली है। सवाल यह है जो बात कोर्ट कह रहा है, वह वित्त मंत्रालय समझ में नहीं आ रहा है। जिस अधिकारी को कोर्ट भ्रष्ट मान रहा है, उसे मंत्रालय ईमानदारी का पुतला मानने पर तुला है। अगर ऐसा नहीं होता तो जैसे 26 भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन सेवामुक्त किया है, वैसे सुमना सेन को भी किया जाता। पर सुमना सेन को नहीं किया गया। वह भी तब जबकि मंत्रालय को पता है कि सुमना के ऊपर आरोप है। जांच पड़ताल में पाया गया कि उन्होंने झूठ बोला है। उनके पति कहते हैं कि वे निजी खर्चे पर विदेश गए थे, जबकि सुमना कहती हैं कि पति के सैलेरी पैकेज में विदेश टूर था। दोनों में से कोई एक ही बात सही हो सकती है। दोनों तो हो नहीं सकती। तो सवाल यह है कि उन्हें बचा कौन रहा है? सूत्रों की मानें तो सुमना सेन की ढाल शीर्ष अधिकारी बने हुए हैं। उन्होंने ही सुमना सेन से जुड़ी भ्रष्टाचार की फाइल दबा रखी है। उसे जानबूझ कर बाहर नहीं निकाला। अगर वह बाहर निकलती तो सुमना सेन की छुट्टी हो जाती।

कम से कम लुटियन गैंग को यह मंजूर नहीं था। वह इसलिए क्योंकि सुमना सेन के जाने का मतलब था, लुटियन के कई सफेदफोश का बेनकाब हो जाना। उसमें नौकरशाह से लेकर राजनेता तक शामिल थे। ऐसी स्थिति में सुमना को बचाना शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारी थी। लिहाजा उसके लिए हर तरह का हथकंडा अपना गया। जायज और नाजायज का कोई फर्क नहीं किया गया। जहां जरूरत पड़ी वहां पर सबूत गढ़े गए। ईमानदार अधिकारी पर भ्रष्टचार के आरोप लगाए गए। आरोपों को पुख्ता बनाया गया ताकि आलाकमान को जवाब देने में आसानी हो। कारण वहां इस बात की हलचल होने लगी थी कि सुमना सेन को बचाने के लिए ईमानदार अधिकारी को हटा दिया है। जाहिर है जब हलचल हुई तो सवाल पूछा जाता। इसलिए जवाब तैयार किया जाना लगा। उसी कड़ी में फर्जी दस्तावेज जुटाए गए और ईमानदार अधिकारी पर बेईमानी का आरोप मढ़ दिया गया और भ्रष्ट अधिकारी को बचा लिया गया।


 
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