युगवार्ता

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यहां कम नहीं हैं चुनौतियां

11/08/2019

यहां कम नहीं हैं चुनौतियां

गुंजन कुमार

हमारे काम को आसान करने के लिए होम सर्विस देने आने वाले युवक-युवतियां किस तरह विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हैं, यह यहां समझा जा सकता है।

जो मैटो होम सर्विस विवाद ने इस सप्ताह खूब सुर्खियां बटोरी, क्योंकि इसमें धर्म की चासनी थी। पर इससे इतर होम सर्विस देने वाले रोजाना कई समस्याओं से जूझते हैं। होम सर्विस देने वाली यदि लड़की है तो उसका शारीरिक शोषण तक होने की संभावना रहती है। सर्विसदाता यदि लड़का है तो कई बार उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यानी होम सर्विस देने वालों को हर दिन एक अनजान जंग लड़नी पड़ती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि होम सर्विस एप्स ने जिंदगियां बदली हैं। रोजमर्रा के कामों को आसान बनाया है। घर बैठकर आज कल हर प्रकार की सेवा ली जा सकती है। सेवा लेने वालों का जीवन आसान हुआ है पर इनमें काम करने वालों की चुनौतियां बहुत ज्यादा हैं। गौतमी कुमारी (बदला हुआ नाम) पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं।
भाई नहीं है, तो गौतमी ने सोचा मां-पापा को बेटा की कमी खलने नहीं देंगी। इसीलिए वह एक सपने के साथ दिल्ली पहुंची। यहां उन्होंने ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग ली। बाहरी दिल्ली के एक कॉलोनी में ब्यूटी पार्लर खोला। पर पार्लर ज्यादा नहीं चला। इसी दौरान वह होम सर्विस देने वाली दो-तीन फर्म के साथ जुड़ गर्इं। होम सर्विस फर्म के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा करते हुए गौतमी बताती हैं, कुछ दिनों पहले की बात है। मैं सैनिक फार्म हाउस में सर्विस देने गई। सर्विस का आॅडर बंगले के मालिक ने अपनी पत्नी के लिए दिया था। जब मैं वहां पहुंची तो बंगले में कोई महिला नहीं थी। मुझे बैठने के लिए बोला गया। कुछ समय बाद मुझे शंका हुई। मैं उठ ही रही थी कि अंदर से एक व्यक्ति निकला और मुझे अंदर आने को कहा। मगर मैं जल्दी से गेट से बाहर आ गई।

मुझे लगा कि यदि थोड़ा और देर करती तो मैं बर्बाद हो गई होती। हर दिन अपना काम शुरू करने से पहले ईश्वर से यही प्रार्थना करती हूं कि दिन सही से कट जाए। गौतमी जैसी लड़कियों का होम सर्विस के लिए काम करना बहुत बड़ी चुनौती है। हालांकि लड़कियों ने इस तरह की समस्याओं की शिकायत अपने फर्म से की। फर्म प्रबंधन ने इसका रास्ता निकाला। फर्म ने निर्देश दिया कि बुकिंग आने पर जब तक किसी लड़की (क्लाइंट) से बात नहीं होती तब तक सर्विस देने वहां नहीं जाना है। मगर यह भी काफी नहीं था। नोएडा में एक होम सर्विस का काम करने वाली अनुकृति (बदला हुआ नाम) ने फोन पर बताया, हमलोग इस निर्देश का पालन करने लगे।
मगर समस्या नए रूप में सामने आई। एक बार बुकिंग आने पर मैंने कन्फर्म करने के लिए फोन किया। फोन उठाने वाले ने कहा यह आॅडर मेरी पत्नी के लिए है। आप बुकिंग एड्रेस पर आ जाओ। वहां गई तो नजारा कुछ और ही था। चार-पांच लड़के उस लैट में थे। लड़कों को देखकर गेट पर से ही मैंने सर्विस देने से मना कर दिया। दरअसल, कई बार लोग अपनी पत्नी या बहन के नाम बताकर बुकिंग करते हैं। लेकिन हमें वहां भी बड़ी सावधानी के साथ जाना पड़ता है। दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा, पुणे, बेंग्लूरू, मुंबई, कोलकाता जैसे बड़े शहरों में ओला-ऊबर जैसे सर्विस एप्स के अलावा हेल्पगुरू, यस मैडम, अर्बन क्लैप, क्विकर ईजी, मिस्टर राइट, होम ईजी जैसी वेबसाइटें और एप्स हर तरह की सेवाएं घर पर ही मुहैया करवाती हैं। इन कंपनियों ने प्लंबरिंग, इलेक्ट्रीशियन, ड्राइवर, ब्यूटीशियन, मसाज आदि का काम करने वालों को अपने साथ जोड़ा है।
लोग भी इनसे रोजना काम मिलने का उम्मीद के साथ जुड़ना पसंद करते हैं। हालांकि इनके जरिए होने वाली कमाई का पंद्रह से पच्चीस फीसदी तक बतौर कमीशन सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां लेता हैं। इसके बावजूद सिर्फ रोजना काम मिलने की गांरटी के कारण ही प्रोफेसनल इससे जुड़े रहते हैं। लेकिन गौतमी और अनुकृति का अनुभव बताता है कि सबकुछ इतना आसान नहीं है। पुरुषों का अनुभव लड़कियों से कोई ज्यादा अलग नहीं है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ घरों में ही सर्विस देने का अनुभव खराब रहा है। घरों के अलावा कई बार बाहर भी इन लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कैब सर्विस में भी कई बार ड्राइवरों को इस तरह की समस्याएं आती हैं। कई बार ड्राइवर को कोई भी बहाना बनाकर उसे शिकायत करने का डर दिखाकर कम पैसे देने की शिकायत आती है। कई बार तो भुगतान भी नहीं करते हैं। एक कैब सर्विस में अपनी गाड़ी चलाने वाला रूस्तम बताता है कि एक बार उनकी कैब में एक कस्टमर ने उनसे दो हजार रुपये यह कहकर मांगे कि उसके पास कैश नहीं है।
उसने पैसे आॅनलाइन ट्रांसफर करने की बात कही। अच्छी सर्विस देने के लिए मैंने उसे तत्काल दो हजार रुपए दे दिए। उसने पैसे ट्रांसफर करने का मैसेज दिखाया। मगर असलियत में पैसे ट्रांसफर हुए ही नहीं थे। इस बारे में कंपनी को शिकायत की। कंपनी की ओर ये कहा गया कि यह उनकी गलती थी। इसलिए कंपनी इसमें कुछ नहीं कर सकती। रुस्तम जैसे कुछ और कैब ड्राइवर ने भी पैसे कम देने की शिकायत की। इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर का काम करने वाले अशोक से जब इस तरह के अनुभव के बारे में पूछा तो उन्होंने भी कहा कि इस तरह की घटना उसके साथ भी घटी है। लेकिन अब मैं जब तक हमारे बैंक का मैसेज नहीं आता तब तक मैं वर्क प्लेस से नहीं जाता। यह बात सही है कि लड़कियों की तुलना में पुरुषों का नुकसान कम होता है। लेकिन इस तरह सर्विस में काम करने वाली लड़कियों को रोज अपने अस्तित्व बचाने के लिए लड़ना पड़ता है। कुछ लड़कियों का कहना है कि कोठियों में हमें खतरा ज्यादा महसूस होता है। उसकी तुलना में सोसायटी के लैट हमें ज्यादा सुरक्षित लगता है।
मयूर विहार में रहने वाली नयनतारा बताती हैं, मैं बुकिंग एनसीआर इलाकों की लेती हूं। यहां कई तरह की दिक्कतें आती हैं। मसलन, वे बुकिंग तो एप से करते हैं। सर्विस के बाद कहते हैं, ‘डिस्काउंट करो।’ जो संभव नहीं होता है। डिस्काउंट करने से मना करने पर वे रेटिंग खराब कर देते हैं। ऐसे में फर्म से काम कम मिलता है। यह हमारे प्रोफेशन पर प्रतिकूल असर डालता है। कई बार रेटिंग खराब होने पर कंपनी छूट जाने का भी खतरा रहता है और क्लाइंट न मिलने का भी। ये होम सर्विस में काम करने वाली कुछ लड़कियों या पुरुष की समस्या है। इस छोटे से उदाहरण से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश भर में इस तरह की समस्याएं बड़े पैमाने पर है। जिसे कभी किसी मीडिया घराने ने तव्वजों नहीं दी।


 
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