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कपिल ने बंद की दुकान

30/07/2019

कपिल ने बंद की दुकान

 जितेन्द्र चतुर्वेदी

पीएम मोदी की खिलाफत करने के लिए शुरू हुआ तिरंगा टीवी आखिरकार बंद हो गया। इसी के साथ 200 पत्रकार सड़क पर आ गये हैं। लेकिन पत्रकारों के हिमायती बनने का दावा करने वाले राहुल गांधी आश्चर्यजनक रूप से चुप हैं।

 पिल सिब्बल का खबरिया चैनल बंद हो गया है। इस वजह से 200 पत्रकार सड़क पर आ गए हैं। लेकिन राहुल गांधी खामोश हैं। आम चुनाव के दौरान वे पत्रकारों के बड़े हिमायती बनकर उभरे थे। उस दौरान कई खबरें हुई थी। चैनलों ने लाइव दिखाया था कि वे पत्रकारों को लेकर कितने संवेदनशील हैं। मगर इस मसले पर वे कोई संवेदना नहीं जाहिर कर रहे हैं। उनकी पार्टी भी कुछ नहीं बोल रही है जबकि वह पत्रकारों के साथ खड़े रहने का दावा करती है। कायदे से उन्हें बोलना चाहिए क्योंकि यह चैनल कांग्रेसी एजेंडा चलाने के लिए ही खड़ा किया गया था। बरखा दत्त और करन थापर को इसी वजह से लाया गया था। दोनों ही चेहरे नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाने जाते हैं। यही उनकी पहचान है। इसी वजह से ईसाई मिशनरी के चैनल में इन्हें कमान सौंपी गई। कहा जाता है कि उनका एजेंडा तो ये लोग सालों से चला रहे हैं। कांग्रेसी भी यही कर रहे हैं, यह रहस्य खुल चुका है। कारण बना कपिल सिब्बल का चैनल। नाम उसका ‘तिरंगा टीवी’ है जो शुरू ‘हार्वेस्ट टीवी’ के नाम से हुआ था। ‘हार्वेस्ट टीवी’ ईसाई मिशनरी का चैनल है। यह बात जगजाहिर है।

इससे जुड़ी सारी जानकारी सार्वजनिक मंच पर मौजूद है। उस पर सहज ही जा कर देखा जा सकता है कि ‘हार्वेस्ट टीवी’ का मालिक कौन है। उस टीवी चैनल से एक समझौता हुआ। वह इसलिए हुआ था ताकि ‘हार्वेस्ट टीवी’ का उपयोग कांग्रेस अपने एजेंडे के लिए कर सके। वास्तव में इसकी जरूरत कपिल सिब्बल को थी नहीं। उनके पास पहले ही ‘एस 7 न्यूज’ था। यह सही है कि ‘एस 7 न्यूज’ बहुत चर्चित खबरिया चैनल नहीं था। मगर यह भी गलत नहीं है कि ‘हार्वेस्ट टीवी’ की भी कोई बहुत बड़ी पहचान नहीं थी। उसके बाद ‘हार्वेस्ट टीवी’ के नाम से कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने खबरिया चैनल शुरू किया। जहां तक बात फंडिंग की है तो उस पर पीगुरूज ने लंबी रिपोर्ट की है। उसकी माने तो इस चैनल की फंडिंग कपिल सिब्बल और पी. चिदंबरम कर रहे थे।
कहा जा रहा है कि बाद में उसमें जिंदल ग्रुप भी शामिल हो गया था। योजना यह थी कि चुनावों में कांग्रेस के लिए अभियान चलाया जाए और नरेन्द्र मोदी की पोल खोली जाए। उसके लिए 200 पत्रकारों की टीम बनी। 300 करोड़ रुपये का कोष चैनेल के लिए बना। तय हुआ कि दो साल तक चैनल का सारा खर्च इसी कोष से निकल जाएगा। इस वजह से वहां तैनात पत्रकार भी आश्वस्त थे। मीडिया में जहां दो दिन का ठिकाना नहीं है,वहां दो साल की गारंटी थी। फिर इस खेमें को भरोसा भी था कि भाजपा जा रही है। कांग्रेस सरकार बनाएगी ही। सरकार बनने के बाद चैनल बंद होगा नहीं। इसी विश्वास के साथ चैनल ने रμतार पकड़ी। कमान बरखा दत्त और करन थापर को सौंपी गई। उन लोगों ने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अभियान चलाना शुरू कर दिया। लेकिन एसी कमरे में बैठकर चुनाव परिणाम बताने वाले लुटियन पत्रकारों का अभियान विफल हो गया। जनता को नरेन्द्र मोदी में वह नहीं दिखा जो तिंरगा टीवी के जरिए कांग्रेस दिखाना चाहती थी। इसका एक मतलब यह भी हुआ कि मीडिया के जरिए किसी के पक्ष या विपक्ष में जनमत तैयार नहीं किया जा सकता।


जनता को नरेन्द्र मोदी में वह नहीं दिखा जो तिंरगा टीवी के जरिए कांग्रेस दिखाना चाहती थी। इसका एक मतलब यह भी हुआ कि मीडिया के जरिए किसी के पक्ष या विपक्ष में जनमत तैयार नहीं किया जा सकता। 

कपिल सिब्बल को यह बात खुद भी समझनी चाहिए और राहुल गांधी को भी समझानी चाहिए। कपिल सिब्बल तो कम से कम इस मामले में अनुभवी हो चुके हैं। उन्होंने चैनल नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अभियान चलाने के लिए शुरू किया था। तिरंगा ने चलाया भी। पर वह काम न आया। जनता तिरंगा या फिर किसी और चैनल को नहीं नरेन्द्र मोदी को सुन रही थी। इसलिए लुटियन पत्रकार और मीडिया का दिवाला निकल गया। ‘तिरंगा टीवी’ और उनके निवेशकों के साथ तो धोखा हो गया। सरकार बनी ही नहीं। तो चैनल चलाने का कोई मतलब नहीं था। कपिल सिब्बल समझ गए थे कि इसमें अब घाटे के सिवाय कुछ होने वाला नहीं है। दूसरा, जो अन्य निवेशक थे, उन्होंने भी हाथ खींच लिया। कांग्रेस सत्ता में आई नहीं। इसलिए पी.चिदंबरम हो या फिर कपिल सिब्बल, इन लोगों ने जमा पूंजी खर्च करना मुनासिब नहीं समझा। तो चैनल बंद होना था, सो हो गया। कर्मचारियों को एक महीने का वेतन देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसकी खबर ज्यादातर लोगों को नहीं थी। होती भी कैसे? गुनाह तो उन्ही लोगों ने किया था जो सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं।
चूंकि इस बार गलती उनसे हो गई थी, इसलिए उस पर पर्दा डालने में लगे थे। कोशिश यह की गई कि इसका दोष भी सरकार के सिर मढ़ दिया जाए। ऐसा हुआ भी। जब कर्मचारी धरना देने लगे तो सिब्बल दंपति ने कहा कि चैनल सरकार की वजह से बंद करना पड़ा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि चैनल के कामकाज में मोदी सरकार हस्तक्षेप कर रही है। इस वजह से चैनल चलाना मुश्किल हो गया। उनके दावे की पोल तब खुली जब बरखा दत्त बागी हो गर्इं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कपिल सिब्बल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दो टूक शब्दों में कहा सरकार का चैनल में कोई हस्तक्षेप नहीं था। मतलब सिब्बल दंपति झूठ बोल रहे थे। वे इतना कह कर नहीं रुकीं। बरखा कहती हैं कि सिब्बल ने पत्रकारों का पैसा मार लिया है। वे भूखे मर रहे हैं और सिब्बल लंदन में छुट्टी मना रहे हैं। उन्होंने कपिल सिब्बल को विजय माल्या तक की उपाधि दे दी। इससे कपिल सिब्बल की पत्नी भड़क गईं। उन्होंने बरखा को गाली दे दी। वे प्रोमिला के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग चली गई। उनकी खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। यह सब ट्विटर पर चलता रहा। खबर भी कई लोगों ने की। यह स्वभाविक भी है क्योंकि मामला सीधा बरखा ने उठाया और आरोप सीधे तौर पर कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी पर लगाया। उनका कहना है कि कपिल सिब्बल ने उनकी टीम के साथ धोखाधड़ी की है। उनका दावा है कि सौदा दो साल के लिए हुआ था। लेकिन कपिल तो बीच में ही भाग गए हैं। कहा जा रहा है कि बरखा दत्त नाराज भी इसीलिए हुई हैं और बार बार समझौते के उल्लंघन की बात कर रही हैं। समझौते में तय यह हुआ था कि अगर चैनल बीच में बंद होता है तो छह महीने का वेतन दिया जाएगा। लेकिन कपिल सिब्बल ने ऐसा किया नहीं है। उन्होंने तो एक महीने का ही वेतन दिया। कई वेबसाइट ने लिखा है कि संस्थान से जुड़े पत्रकार तो धरना कई दिनों से दे रहे थे। तब बरखा ने कुछ नहीं लिखा। वे चुपचाप तमाशा देखती रही हैं। लेकिन जब उनको भी महीने भर का ही वेतन दिया गया तो वे भड़क गई। खैर वजह चाहे जो रही हो, लेकिन इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि बरखा दत्त अपनी टीम के लिए लड़ रही हैं। उन्होंने लिखा भी है कि अगर टीम कानूनी लड़ाई लड़ती है तो उसकी मदद भी करूंगी। बरखा खुद भी कोर्ट जा रही हैं। उन्होंने कपिल सिब्बल से वहीं दो-दो हाथ करने का मन बनाया है।


 
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