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कोरोनाः शवों से न हो अमानवीय व्यवहार

17/03/2020

रमेश ठाकुर
क्या कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर जान गंवाने वालों को अंतिम संस्कार का हक नहीं? कोरोना से जान गंवाने वाली दिल्ली की बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार का जो हक छीना गया, दरअसल उसके गुनाहगार हम सब हैं। कोविड-19 के संक्रमण का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है। ऐसा हमारे-आपके साथ हो तो क्या हम बर्दाश्त कर पाएंगे? कोरोना के डर से समूची दुनिया इस समय सहम-सी गई है। वायरस का संक्रमण तेज हवा की तरह इंसानी शरीर में प्रवेश कर रहा है। देश-दुनिया में इसकी चपेट में लाखों लोग आ चुके हैं और हजारों मौतें हो चुकी हैं।
एकाध सप्ताह से कोरोना ने भारत में भी भूचाल मचाया हुआ है। कई राज्यों ने महामारी घोषित करने के अलावा स्कूल-काॅलेज, सिनेमाघर, माॅल्स, सार्वजनिक स्थानों पर बंदी के आदेश दिए हैं। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। कोरोना के केसों में लगातार वृद्धि होने के अलावा वायरस के कहर से हिंदुस्तान में दो जानें भी गईं हैं। पहली मौत तेलंगाना में तो दूसरी मौत पिछले सप्ताह दिल्ली में हुई। कोरोना का खौफ इस कदर हावी हो चुका है कि लोग अब मृतकों के शरीर से भी अमानवीय व्यवहार करने लगे हैं। दिल्ली में कोरोना संक्रमण से हुई एक बुजुर्ग महिला के शव के साथ बेहद बुरा सुलूक हुआ। मृतक के अंतिम संस्कार में काफी दिक्कतें आई। दिल्ली के निगम बोध घाट प्रशासन ने शव को अपने श्मशान घाट पर अंत्येष्टि करने से मना कर दिया। घाट प्रशासन को इस बात का डर था कहीं कारोना संक्रमण से हुई मौत की अंत्येष्टि से घाट के भीतर संक्रमण न फैल जाए। घाट के कर्मचारियों से काफी देर बहस भी होती रही लेकिन वह अंत्येष्टि को राजी नहीं हुए।
शव के साथ जीवित इंसानों ने अमानवीय व्यवहार की सारी हदें पार कर दीं। समय बीतता गया लेकिन फैसला नहीं हो पाया कि शव को अग्नि के हवाले किया जाए। इस कारण शव निगम बोध घाट पर कई घंटे अलग कोने में लावारिस की तरह रखा रहा। शमशान घाट पर शव को अस्पताल के कर्मचारी लेकर पहुंचे। शव के मीटरों दूर तक किसी को भी जाने की इजाजत नहीं दी गई। परिजनों के लिए भी पास जाने की पाबंदी थी। परिवार के तमाम लोग मौजूद थे, सभी मीटरों दूर खड़े होकर रो-बिलख रहे थे। किसी को शव को कंधा तक नहीं देने दिया गया। कोरोना से जान गंवाने वाली बुजुर्ग महिला की दो दिन पहले दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में मौत हो गई थी। शमशाम घाट के लोग कोरोना पीड़ित और मृतकों से संक्रमण फैलने के डर से केंद्र सरकार की गाइडलाइन का हवाला दे रहे थे। दरअसल, कोरोना की शुरुआत में केंद्र सरकार ने विज्ञापन के जरिए लोगों को पीड़ितों से एहतियात बरतने की सलाह दी थी। उसी वक्त से लोगों में डर फैला हुआ है।
गौरतलब है कि उसी सतर्कता को देखते हुए शमशान घाट भी एहतियात बरत रहा था। शव को अस्पताल के कर्मचारी ही निगम बोध घाट लेकर पहुंचे थे। उस वक्त परिजन साथ नहीं थे, उनको सीधे घाट पर ही पहुंचने का अस्पताल की ओर से निर्देश दिया गया था। शव जब निगम बोध घाट पहुंचा तो घाट वालों को पता चल गया कि मृतक कोरोना ग्रस्त था। इसके बाद घाट में हड़कंप मच गया। घाट पर रोजाना अनगिनत शवों की अंत्येष्टि होती है। घाट वालों को इस बात की आशंका थी कहीं इससे घाट में संक्रमण न फैल जाए, इसलिए उन्होंने दूसरे घाट पर ले जाने को कह दिया। परिजनों ने दूसरे घाट पर संपर्क किया तो उन्होंने भी मना कर दिया। परिजनों ने दिल्ली के कुछ अधिकारियों और नेताओं से बात की, किसी ने सहयोग नहीं किया। हारकर उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से संपर्क किया। उनके हस्तक्षेप के बाद ही घाट प्रशासन अंत्येष्टि के लिए राजी हुआ। लेकिन अंतिम संस्कार अग्नि से फिर भी नहीं किया, सीएनजी से हुआ। परिजनों को सीएनजी शवदाह गृह के बाहर रोका गया। पार्थिव शरीर ले जाने की इजाजत अस्पतालकर्मी को ही थी।
चीन के वुहान में कोरोना संक्रमित जितने लोगों की मौत हुई, उनके शवों को समुद्र के किनारे एकांत में दफनाया गया है। कमोबेश, डर वहां भी कुछ ऐसा ही है कि शवों से भी संक्रमण फैलता है। जबकि, चिकित्सकों ने इसे गलत बताया है कि शवों से संक्रमण फैलता है। खैर, दिल्ली में घटी अमानवीय घटना को देखते हुए सरकार ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। पूरे देश के शमशान घाटों को निर्देशित किया गया है कि कोरोनो से हुई मौतों की अंत्येष्टि के लिए किसी तरह का कोई भेदभाव न किया जाए। बताया गया है कि कोरोना से हुई मौतों की अंत्येष्टि से संक्रमण नहीं फैलता। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कोरोना वायरस यानी कोविड-19 अभीतक 123 देशों में अपने पैर पसार चुका है। मामले रूक नहीं रहे बल्कि रोज दुनिया भर में सैकड़ों नए मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित चीन, इटली, ईरान और कोरिया हैं।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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