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ऐप पर क्यों ऐतराज

24/05/2020

ऐप पर क्यों ऐतराज

दुनिया भर में कोरोना के कहर के बीच मोबाइल ऐप्लिकेशन आरोग्य सेतु की खासी चर्चा है। एक तरफ विश्व बैंक से लेकर माइक्रोसॉμट के संस्थापक बिल गेट्स तक इसकी तारीफ कर चुके हैं, तो वहीं अपने ही देश में विपक्ष को इस ऐप पर कड़ा ऐतराज है। सरकार साफ कर चुकी है कि इस ऐप से डाटा सुरक्षा और निजता को कोई खतरा नहीं है, पर कांग्रेस के नेता लगातार हमलावर हैं। केंद्र सरकार ने कोरोना के फैलाव को रोकने में तकनीकी मदद के लिए 2 अप्रैल को आरोग्य सेतु लॉन्च किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐप को कोरोना से लड़ाई में अहम बता चुके हैं। 14 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस ऐप को डाउनलोड करने की अपील की थी। इसी का परिणाम है कि 4 मई तक करीब 9 करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ता इसे डाउनलोड कर चुके हैं।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आरोग्य सेतु ऐप को लॉन्च करने में भारत दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनियों से आगे रहा। आरोग्य सेतु की शुरूआत के बाद गूगल और एप्पल ने यह ऐलान किया कि वे स्मार्टफोन के लिए इस तरह का सॉμटवेयर बना रहे हैं…

जल्दी ही यह आंकड़ा 10 करोड़ पहुंचने वाला है। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत का तो कहना है, ‘आरोग्य सेतु ऐप दुनिया में सबसे अधिक डाउनलोड होने वाली स्वास्थ्य सेवा बन चुकी है।’ बिल गेट्स ने 22 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखकर कोरोना से लड़ाई में सरकार के प्रयासों की तारीफ की थी। उन्होंने खास तौर पर आरोग्य सेतु का जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था, ‘मुझे खुशी है कि आपकी सरकार कोविड-19 से निपटने में असाधारण डिजिटल क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल कर रही है, आपकी सरकार ने कोरोना वायरस ट्रैकिंग, संपर्क ट्रेसिंग और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोडे के लिए आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च किया है। विश्व बैंक भी इस ऐप की तारीफ कर चुका है। विश्व बैंक की दक्षिण एशिया आर्थिक केंद्रित रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कोविड-19 के प्रसार की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस तरह की पहल, मुख्य रूप से स्वैच्छिक, पूर्वी एशिया में महामारी का सामना करने में मददगार रही है। भारत ने हाल में ऐप आरोग्य सेतु लॉन्च किया है, जो कि किसी शख्स के स्मार्टफोन के लोकेशन डेटा का इस्तेमाल कर यह बताता है कि क्या वह किसी ऐसे व्यक्ति के नजदीक है, जिसकी कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।’ खास बात यह भी रही कि इस ऐप को लॉन्च करने में भारत दुनिया की दिग्गज तकनीकी कंपनियों से आगे रहा। आरोग्य सेतु की शुरूआत के बाद गूगल और एप्पल ने यह ऐलान किया कि वे स्मार्टफोन के लिए इस तरह का सॉμटवेयर बना रहे हैं, जो कि संपर्क की ट्रेसिंग में मददगार होगा और उपयोगकर्ता को बताएगा कि वे कोरोना संक्रमित शख्स के संपर्क में आए हैं या नहीं। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचई और एप्पल के सीईओ टिम कुक को टैग करते हुए ट्वीट किया था, ‘यह देखकर खुशी हो रही है कि आरोग्य सेतु की तर्ज पर संपर्क ट्रेसिंग के लिए गूगल और एप्पल मिलकर ऐप विकसित कर रहे हैं।’ वैश्विक पटल पर आरोग्य सेतु की धूम के बीच भारत में विपक्ष ने इस पर सवाल खड़े किए हैं।

वैश्विक पटल पर आरोग्य सेतु की धूम के बीच भारत में विपक्ष ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2 मई को ट्वीट कर कहा, ‘आरोग्य सेतु गूढ़ निगरानी प्रणाली है, जो प्राइवेट आॅपरेटर के लिए आउटसोर्स है। इससे डाटा सुरक्षा और निजता की गंभीर चिंता खड़ी होती है।’उन्होंने यह भी कहा, ‘नागरिकों की सहमति के बिना उनको ट्रैक करने के लिए डर का फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए।’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2 मई को ट्वीट कर कहा, ‘आरोग्य सेतु गूढ़ निगरानी प्रणाली है, जो प्राइवेट आॅपरेटर के लिए आउटसोर्स है। इससे डाटा सुरक्षा और निजता की गंभीर चिंता खड़ी होती है।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘नागरिकों की सहमति के बिना उनको ट्रैक करने के लिए डर का फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए।’ उनके इस बयान के बाद फ्रांस के एथिकल हैकर इलियट एंडरसन (असली नाम रॉबर्ट बैपटिस्ट) ने 5 मई को आरोग्य सेतु ट्विटर हैंडल को टैग करते हुए ट्वीट किया, ‘आपके ऐप में सुरक्षा का मसला है और 9 करोड़ भारतीयों की निजता दांव पर है।’ इस ट्वीट में राहुल गांधी को भी टैग करते हुए लिखा गया है, ह्यराहुल गांधी इस ऐप के बारे में सही थे। यह वही इलियट एंडरसन है, जिसने इसके पहले आधार लीक का मामला उठाया था। बहरहाल, इलियट की ट्वीट के बाद आरोग्य सेतु डेवलपर्स टीम ने बयान जारी कर कहा, ‘किसी भी यूजर का डाटा खतरे में नहीं है।

सभी का डेटा सुरक्षित है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कहा, ‘आरोग्य सेतु ऐप से किसी तरह की निजता का उल्लंघन नहीं होता। आरोग्य सेतु को लेकर बहस प्रायोजित है। उन्होंने यह भी कहा, ‘राहुल गांधी की तकनीकी समझ पर भी चर्चा होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता की तरफ से अदालत में याचिका

आरोग्य सेतु ऐप से जुड़ा विवाद अदालत तक जा पहुंचा है। सरकारी हो या निजी क्षेत्र के कर्मचारी, सभी के लिए इस ऐप को अनिवार्य करने के केंद्र के दिशा-निर्देश के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय में याचिका दी गई है। उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच ने 8 मई को इस पर सुनवाई करते हुए केंद्र से 12 मई तक उसका पक्ष मांगा है। त्रिशूर जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव जॉन डैनियल ने अदालत में यह याचिका दी है। उनका कहना है कि आरोग्य सेतु ऐप व्यक्ति की सहमति के बगैर उसकी जानकारी एकत्र करता है। यह निजता और स्वायत्तता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

30 के लिए स्टोर होता है डाटा

आरोग्य सेतु के इस्तेमाल में निजता की चिंता पर केंद्र सरकार की तकनीक और डाटा प्रबंधन को देखने वाले एम्पावर्ड ग्रुप-9 के चेयरमैन अजय साहनी का कहना है कि यह ऐप यूजर के लोकेशन डाटा का इस्तेमाल कन्टेनमेंट एक्शन लेने और बाकी लोगों को संक्रमण से बचाने में करता है। यह डाटा ऐप पर केवल 30 दिनों के लिए स्टोर होता है। कोरोना मरीजों के ठीक होने के बाद उनका डाटा 60 दिनों में सर्वर से डिलीट हो जाता है। यह ऐप किसी भी यूजर की व्यक्तिगत पहचान का खुलासा कहीं नहीं किया जाता है।

1.4 लाख यूजर्स को किया सचेत

आरोग्य सेतु ऐप को लेकर विपक्ष भले ही हायतौबा मचा रहा हो, लेकिन सरकार का कहना है कि यह ऐप अब तक 1.4 लाख यूजर्स को ब्लूटूथ के जरिये अलर्ट भेजकर कोरोना रोगी के निकट होने की जानकारी दे चुका है और संक्रमण के खतरों से बचा चुका है। सरकार की तकनीक और डाटा प्रबंधन को देखने वाले एम्पावर्ड ग्रुप-9 के चेयरमैन अजय साहनी ने यह जानकारी दी। आरोग्य सेतु उपयोगकर्ता के निकट कोई भी कोरोना मरीज हो, तो यह उपयोगकर्ता को नोटिफिकेशन भेजकर उसे अलर्ट कर देता है। कोरोना हॉटस्पॉट या कन्टेनमेंट जोन के करीब जाने पर भी यह ऐप उपयोगकर्ता को अलर्ट करता है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का तो यह भी कहना है कि इस ऐप ने 650 से अधिक हॉटस्पॉट और 300 से ज्यादा उभरते हॉटस्पॉट के बारे में सचेत किया, जो इसके बिना छूट सकते थे। यह हॉटस्पॉट का सटीक पूवार्नुमान बताता है और नए हॉटस्पॉट को बनने से रोकने में मददगार है।


 
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