क्षेत्रीय

Blog single photo

विधानसभा की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से शोभन चटर्जी ने दिया इस्तीफा

13/08/2019

ओम प्रकाश
कोलकाता, 13 अगस्त (हि.स.)। कोलकाता के पूर्व मेयर और बेहला पूर्व से विधायक शोभन चटर्जी ने विधानसभा में मत्स्य और प्राणी संपद स्थाई समिति (स्टैंडिंग कमिटी) के चेयरमैन पद से मंगलवार को इस्तीफा दे दिया है। अपने एक करीबी व्यक्ति के जरिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी के पास इस्तीफा भेजा है। संक्षिप्त में उन्होंने अपना इस्तीफा लिखा है। इसमें शोभन ने लिखा है कि अनिवार्य कारणों से मैं मत्स्य और प्राणी संपद के स्थाई समिति अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं।

उल्लेखनीय है कि गत नवंबर महीने में राज्य के अग्निशमन मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से शोभन चटर्जी आज तक एक बार भी विधानसभा में नहीं गए हैं। इसके कारण स्टैंडिंग कमेटी की बैठक नहीं हो पा रही थी। विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के पास इससे संबंधित शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद गत शनिवार को विमान बनर्जी ने फोन कर शोभन चटर्जी से बात की थी। उन्होंने शोभन को विधानसभा में आने का आह्वान किया था और स्टैंडिंग कमिटी की बैठक बुलाने को भी कहा था। इसके जवाब में शोभन चटर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष से मिलने की बात कही थी लेकिन अब मिलना नहीं हो सका है और सीधे अपना इस्तीफा भेज दिया है। दरअसल, जब शनिवार को विमान बनर्जी ने शोभन चटर्जी को फोन किया था तब कई तरह की राजनीतिक चर्चा राज्य में शुरू हो गई थी। विशेषकर तृणमूल के अंदर ऐसी उम्मीद बनी थी कि संभवत विधानसभा अध्यक्ष की पहल के कारण शोभन चटर्जी वापस से पार्टी में सक्रिय हो जाएंगे। 

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से कर चुके हैं मुलाकात 
2018 के 20 नवंबर को उन्होंने राज्य के अग्निशमन मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें कोलकाता के मेयर पद भी छोड़ने को कह दिया था। तीन दिनों के बाद उन्होंने मेयर पद भी छोड़ दिया था। उसके बाद नौ महीने बीत चुके हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और वर्तमान मेयर फिरहाद हकीम तक बहुत कोशिश कर चुके हैं कि शोभन चटर्जी को मनाकर वापस पार्टी में सक्रिय किया जाए लेकिन शोभन अपने रुख से पीछे नहीं हटे। उन्होंने तृणमूल से पूरी तरह से दूरी बना ली। दूसरी ओर दिल्ली जाकर वह भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। ऐसे में कभी उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा होती है तो कभी एक बार फिर तृणमूल में लौटने को लेकर अटकलें लगाई जाती हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बेहला पूर्व से वह विधायक हैं वहां से भाजपा को काफी बढ़त मिली थी। अगर वह भाजपा में शामिल होते हैं तो बहुत हद तक संभव है कि यह विधानसभा सीट तृणमूल के हाथ से निकल भाजपा के पाले में चली जाए। तृणमूल की ओर से उनके मनाने का काम इसी डैमेज को कंट्रोल करने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन अब मंगलवार को जब उन्होंने विधानसभा की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन पद से खुद ही इस्तीफा दे दिया है तो यह और अधिक स्पष्ट हो गया है कि वह तृणमूल में सक्रिय होने को लेकर गंभीर नहीं हैं। इससे साफ हो गया है कि तृणमूल कांग्रेस की ओर से मैदान में उतरने की इच्छा भी शोभन चटर्जी की नहीं है। 

महिला मित्र बैसाखी के कारण रहते हैं सुर्खियों में 
कुछ दिनों पहले ही उन्होंने अपनी महिला मित्र बैसाखी बनर्जी के साथ बैठकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था जिसमें शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इशारे-इशारे में बैसाखी बनर्जी को परेशान करने का आरोप भी उन्होंने लगाया था। हालांकि बाद में पार्थ चटर्जी ने बैसाखी से बात कर मामले को संभाल लिया था। वह जब राज्य के मंत्री थे तभी बैसाखी बनर्जी से उनकी दोस्ती हुई थी। यह दोस्ती इतनी गहरी है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंत्रिमंडल की बैठक करती थीं तो शोभन चटर्जी बैसाखी को लेकर शॉपिंग करते नजर आते थे। जब मुख्यमंत्री ने इस बारे में पूछा था तब उन्होंने उन्हें भी दो टूक शब्दों में कह दिया था कि उनके व्यक्तिगत जीवन में कोई दखलंदाजी नहीं कर सकता। इसके बाद शोभन पर मंत्रालय के काम में लापरवाही के मामले भी सामने आने लगे थे। विधानसभा में अग्निशमन मंत्रालय से जुड़े सवाल का जवाब भी गलत आंकड़ों के साथ दिए थे जिसके बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देने को कहा था। इसके बाद से शोभन चटर्जी ने तृणमूल से लगातार दूरी बनाकर रखी है। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
Top