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भाजपा सांसदों का अभ्यास वर्ग

04/08/2019

सियाराम पांडेय 'शांत'
कार्यशाला सबकी होनी चाहिए। कार्यशाला से कार्य का स्तर सुधरता है। सही और गलत की समझ विकसित होती है। क्या करें, कैसे करें का बोध होता है। कार्यशाला से जो अनुभव मिलते हैं, वे पारदर्शी कार्य संस्कृति का विकास करते हैं। पिछले हफ्ते संसद के पुस्तकालय भवन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सांसदों के लिए दो दिवसीय सांसद कार्यशाला का आयोजन किया। इसे अभ्यास वर्ग का नाम दिया गया। इस कार्यक्रम में सांसदों खासकर नये सांसदों को भाजपा की विचारधारा से अवगत कराया गया। इससे पहले भी नरेंद्र मोदी नए सांसदों को संसद भवन में संबोधित कर चुके हैं। 
 कहना न होगा कि इस कार्यशाला में सांसदों को संगठन की मजबूती के टिप्स दिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित पार्टी सांसदों की मौजूदगी ने अभ्यास वर्ग को काफी संपन्न बनाया। अभ्यास वर्ग में बताया गया कि संसद के भीतर और बाहर सांसदों का आचरण कैसा होना चाहिए। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि वे जनता से कैसे संवाद स्थापित करें। उनके बीच रहकर जनहित के काम को अंजाम कैसे दें? जनता के बीच रहकर उनके काम को अंजाम देते हुए पार्टी की विचारधारा को कैसे आगे बढ़ाएं? अपने क्षेत्र की समस्याओं को संसद में कैसे रखना चाहिए। उसके लिए किस स्तर की तैयारी करें? कितनी तैयारी करें? सदन में शालीनता और विद्वतापूर्ण ढंग से अपना विषय कैसे रखें? विपक्ष के प्रतिरोध के बीच अपना धैर्य कैसे बनाए रखें? इसके लिए उन्हें संसद की कार्यशैली से भी अवगत कराया गया। 
  भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ‘सांसद और स्थानीय संगठन’ विषय पर अपने विचार केंद्रित किए। कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा का फोकस 'नए भारत का निर्माण और भारतीय राजनीति में भाजपा के योगदान' पर केंद्रित रहा। सांसदों के बीच समूह परिचर्चा भी हुई। समूह परिचर्चा के निहितार्थ को संबंधित मंत्रालय को रिपोर्ट बना कर भेजा जाना है। इस समूह परिचर्चा से भाजपा को अपने नए सांसदों का माइंड सेट समझने में सहूलियत हुई। इस बार भाजपा के करीब सवा सौ सांसद ऐसे हैं, जो पहली बार जीतकर संसद पहुंचे हैं। बहुत सारे ऐसे भी सांसद हैं जो दूसरे दलों का दामन छोड़कर भाजपा का हिस्सा बने हैं। भाजपा अपने सांसदों और पदाधिकारियों को प्रशिक्षित करने, उन्हें जागरूक बनाने के लिए इस तरह के आयोजन करती रहती है। वैसे भी इस तरह के अयोजन हर दल को करने चाहिए। संसद के अंदर और बाहर सांसद का आचरण अगर तय हो जाए, उसकी रूपरेखा बन जाए तो इससे सुधार-परिष्कार का बहुत बड़ा लक्ष्य पूरा हो जाएगा। सांसद ही क्यों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी अभ्यासवर्ग होते रहना चाहिए। उन्हें कार्य स्थल और कार्यस्थल के बाहर किस तरह रहना है, किस तरह का आचरण करना है, यह बताया जाना चाहिए। 
  भाजपा ने जिस तरह अपने सभी सांसदों की मौजूदगी अनिवार्य कर रखी है, वैसा ही अन्य दलों को करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को शिक्षित करने का निरंतर प्रयास करते हैं। वे अपने मन की बात में बहुत सारे ऐसे संदेश दे जाते हैं जो आम आदमी के लिए जरूरी भी है और जनहितकारी भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो सुझाव देते हैं, अगर उन पर अमल हो तो देश का कायाकल्प होते देर नहीं लगेगी। अन्य दलों के सांसदों को भी उस पर विचार करना चाहिए। 
 वर्ष 2014 में पहली बार नरेंद्र मोदी जब संसद पहुंचे थे तो उन्होंने वहां अपना माथा टेका था। उनके प्रधानमंत्रित्व काल में पहली बार संविधान की पूर्वपीठिका यानी उद्देशिका का पाठ हुआ था। संविधान की प्रस्तावना से बहुत कम लोग परिचित हैं। जो लोग भाजपा सरकार पर संविधान का गला घोंटने की बात करते हैं, वे संविधान की प्रस्तावना को, उसके सिद्धांतों, नियमों और उपनियमों को कितना याद कर पाए हैं, कितना आत्मार्पित कर पाए हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। भारतीय संविधान निर्माण के बाद संसद में संविधान की प्रस्तावना का पाठ यह याद दिलाता है कि भाजपा से पहले देश में सत्तारूढ़ किसी भी दल ने संविधान को देश की गीता, बाइबिल और कुरान कहने का साहस नहीं दिखाया था। सांसद जनप्रतिनिधि होता है। उसका देश और उसके संविधान में विश्वास तो होना ही चाहिए।
 वैसे भी जिस तरह अन्य दलों से लोग भाजपा में आ रहे हैं, उसे देखते हुए इस तरह के आयोजन जरूरी हैं। भाजपा में शामिल हो रहे जनप्रतिनिधियों को भाजपा की रीति-नीति का तो ज्ञान होना ही चाहिए। समाजवादी पार्टी ने कभी नारा दिया था कि 'काम बोलता है' यह अलग बात है कि चुनाव में उसका काम नहीं बोल पायालेकिन भाजपा निरंतर काम कर रही है। न केवल विकास के मोर्चे पर काम कर रही है बल्कि विचार के स्तर पर भी वह काम कर रही है। वह 'सबका साथ, सबका विकास' चाहती है। इसीलिए उसने गांव को फोकस किया है। गांव में रहने वालों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही है। उसे पता है कि जब तक गांव विकसित नहीं होंगे तब तक देश विकसित नहीं होगा।
भाजपा के बारे में एक आम धारणा है कि वह हर दिन चुनावी मोड में होती है। विपक्ष को उससे सबक लेना चाहिए। पहले भी नारे लगते रहे हैं कि जो जनता का काम करेगा, वह दिल्ली पर राज करेगा। भाजपा केवल अभ्यास वर्ग ही नहीं चला रही। विकास संवाद भी करती है। नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सभी सांसदों से एक गांव गोद लेने का आग्रह किया था। उनके आग्रह पर भाजपा के सांसदों ने कुछ गांव गोद लिए भी थे। कुछ गांवों में विकास हुआ भी लेकिन सबमें यह स्थिति नहीं रही। इस कार्यकाल में भाजपा खासकर नरेंद्र मोदी सरकार सुनयोजित तरीके से अपने सांसदों को प्रेरित और प्रशिक्षित कर रही है। सांसद अगर क्षेत्र का विकास करेंगे तो वहां जाएंगे भी। अगर वे क्षेत्र में जाएंगे तो उनका और भाजपा का सम्मान तय है। कुल मिलाकर कहा जाए तो मोदी सरकार की यह सराहनीय पहल है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए। सांसद शिक्षित होंगे तो सदन ठीक से चलेगा। वहां विकास के काम होंगे जिससे देश की तकदीर बदल जाएगी।      
(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)  


 
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