- तीन दिन होगा मंथन, संगठन चुनाव पर होगी चर्चा, 
- पहली बार नागपुर से बाहर होगी प्रतिनिधि सभा की चुनावी बैठक 

पवन कुमार अरविंद
नई दिल्ली, 05 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन के चुनावी वर्ष में पहली बार मुख्यालय नागपुर के बाहर आयोजित की जा रही है। यह बैठक कर्नाटक के बेंगलुरु में 19 से 21 मार्च तक आयोजित की गई है। 

साल में एक बार होली के आसपास होने वाली यह बैठक सांगठनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इस बार संगठन का चुनावी वर्ष होने के चलते इस बैठक की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ गयी है। वर्ष 1948 में संघ का लिखित संविधान अस्तित्व में आने के बाद से ही यह परंपरा रही है कि चुनाव वर्ष में प्रतिनिधि सभा की बैठक नागपुर में होती है। संघ में हर तीन साल पर सरकार्यवाह समेत कुछ प्रमुख पदाधिकारियों का चुनाव होता है। वर्ष 1948 के बाद से यह पहली बार है जब प्रतिनिधि सभा की चुनावी बैठक नागपुर से बाहर आयोजित की जा रही है। 

संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक महाराष्ट्र में कोविड-19 प्रोटोकाल को देखते हुए यह बैठक नागपुर से बाहर बेंगलुरु में आयोजित की जा रही है। कोरोना महामारी के चलते प्रतिनिधियों की संख्या इस बार आधी रहेगी। चुनावी वर्ष में जिला संघचालक, विभाग संघचालक, प्रांत संघचालक, क्षेत्र संघचालक का चुनाव किया जाता है। इसके साथ ही संगठन का शीर्षस्थ कार्यकारी पद सरकार्यवाह के लिए भी चुनाव होता है। प्रतिनिधि सभा में देशभर से आए विभिन्न आनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि वर्षभर के कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा दीर्घकालिक कार्ययोजना के बारे में प्रस्ताव भी पेश किए जाएंगे। वर्ष 2009 की प्रतिनिधि सभा में सुरेश जोशी उपाख्य भैयाजी जोशी को सरकार्यवाह के रूप में चुना गया था। यह उनका चौथा कार्यकाल है। वर्ष 2009 की प्रतिनिधि सभा में ही तत्कालीन सरसंघचालक के.एस. सुदर्शन ने डॉ. मोहन भागवत को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। 

कोरोना के कारण पिछली बार स्थगित हो गयी थी बैठक
संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री संजय ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि संघ की स्थापना के दो वर्ष बाद यानी वर्ष 1927 से ही संगठन की राष्ट्रीय स्तर की बैठक हो रही है। प्रारंभिक दिनों में संघ का स्वरूप इतना बड़ा नहीं था इसलिए राष्ट्रीय स्तर की बैठक छोटी हुआ करती थी, लेकिन जैसे-जैसे संघ का विस्तार हुआ, बैठक का स्वरूप भी बढ़ा और उसमें आने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या भी बढ़ी। वर्ष 1948 में संघ का लिखित संविधान अस्तित्व में आया। तबसे वर्ष में एक बार होने वाली इस राष्ट्रीय स्तर की बैठक को अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 को यदि छोड़ दें तो 1948 से अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक लगातार हो रही है। आपातकाल (1975 से 1977) के दौरान भी यह बैठक हुई थी, लेकिन इसमें ज्यादा प्रतिनिधि नहीं आ सके थे। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 की प्रतिनिधि सभा 8 से 10 मार्च तक ग्वालियर में हुई थी। इसमें देशभर से करीब 1400 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। जबकि वर्ष 2020 की प्रतिनिधि सभा 15-17 मार्च तक बेंगलुरु में आयोजित की गयी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह बैठक स्थगित कर सभी स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों को गरीब, मजदूर समेत सभी जरूरतमंदों के लिए राहत अभियान में सक्रिय होने के लिए कहा गया था।

हिन्दुस्थान समाचार
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