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हमें पांच साल दे दीजिए

18/09/2019

हमें पांच साल दे दीजिए

अमित शाह

‘‘इस देश को दो प्रधानमंत्री पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों ने दिए। डॉ. मनमोहन सिंह और गुजराल साहब। दूसरे राज्यों में बसा शरणार्थी प्रधानमंत्री तक बन सकता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में शरण लेने वाला पार्षद भी नहीं बन सकता है। यह कहां का न्याय है?’’

मैंआज इस सम्मानीय सदन के सामने एक ऐतिहासिक संकल्प और बिल लेकर उपस्थित हुआ हूं। जो दो संकल्प और बिल लाया हूं उसमें कई सदस्यों ने कुछ शंकाएं व्यक्त की हैं। विषय पर जाने से पहले मैं आज हमारे प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिन्होंने धारा 370 हटाने के लिए शहादत दी, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को जरूर याद करना चाहूंगा। मैं उन 41,849 लोगों को भी याद करना चाहता हूं, जो कश्मीर के अंदर वर्ष 1989 से लेकर वर्ष 2018 तक चले रक्तपात की भेंट चढ़ गए। मैं पूछना चाहता हूं कि इतने लोग घाटी और कश्मीर के मरे उनका हिसाब किसको देना है। मैं बहुत स्पष्ट हूं कि इन लोगों की जान नहीं जाती, अगर धारा 370 न होती। पूरे सदन ने धारा 370 और 35ए पर बहुत सारी बातें कहीं। मगर किसी ने धारा 370 की उपयोगिता के लिए कुछ नहीं बोला। देश का विभाजन हुआ, पाकिस्तान की रचना हुई, देश भर में पाकिस्तान से निराश्रित, शरणार्थी आए।

कुछ पंजाब में गए, कुछ गुजरात तो कुछ महाराष्ट्र में गए। कुछ जम्मू- कश्मीर में भी गए। जम्मू-कश्मीर में जो पाकिस्तान के शरणार्थी गए, उन्हें आज तक नागरिकता नहीं मिली। क्या यह उनके साथ अन्याय नहीं है? इस देश को दो प्रधानमंत्री पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों ने दिए। डॉ. मनमोहन सिंह और गुजराल साहब। दूसरे राज्यों में बसे शरणार्थी प्रधानमंत्री तक बन सकता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में शरण लेने वाले पार्षद भी नहीं बन सकता है। यह कहां का न्याय है? जो इसके पक्ष में खड़े हुए हैं, उन्हें इसका जवाब देना चाहिए। ये कहते हैं कि धारा 370 और 35ए चली जाएगी, तो कयामत आ जाएगी। धारा 370 के कारण ही जम्मू-कश्मीर भारत के साथ जुड़ा है।

मैं घाटी के लोगों को स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं कि 70 साल 370 के साथ जिए। मैं कहता हूं कि हमें 5 साल दे दीजिए, हम कश्मीर को देश का सबसे ज्यादा विकसित राज्य बनाएंगे। मैं कश्मीर घाटी के युवाओं को कहना चाहता हूं कि आप नरेन्द्र मोदी जी की सरकार पर भरोसा कीजिए, कुछ नहीं होने वाला है।

मैं इसके बारे में बाद में बताना चाहता हूं, लेकिन मैं पहले देश को और विशेषकर घाटी की जनता को बताना चाहता हूं कि धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और विशेषकर घाटी का क्या नुकसान किया। धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में कभी भी लोकतंत्र नहीं फला-फूला। धारा 370 और 35ए के कारण ही वहां गरीबी आई। आज पूरे देश में विकास दिखायी देता है। जब घाटी के गांवों को देखते हैं तो हृदय के अंदर संवेदना आती है। आंख में आंसू आते हैं। आखिर आजादी के 70 साल बाद भी वे क्यों गुरबत और गरीबी में जी रहे हैं। वहां आरोग्य की भी सुविधाएं नहीं मिल रही है। उसका कारण भी धारा 370 है। जम्मू-कश्मीर के विकास में बाधक भी धारा 370 है। आज शिक्षा लेने के लिए जम्मू कश्मीर के बच्चों को देश भर के शिक्षा संस्थानों में जाना पड़ता है। इसका भी कारण धारा 370 है। धारा 370 महिला विरोध, दलित विरोधी, आदिवासी विरोधी भी है और आतंकवाद की जड़ भी यही है। इस देश के अंदर संविधान का 73वां और 74वां संशोधन आया, लेकिन धारा 370 के कारण वह जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं हुआ।

स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी उसे लेकर आए थे। गुलाम नबी आजाद साहब मुख्यमंत्री थे, वे भी लागू नहीं कर पाए। क्यों नहीं कर पाए, क्योंकि वहां धारा 370 थी। वहां पंचायत और नगरपालिका के चुनाव नहीं होते थे। मैं पूछना चाहता हूं कि 40 हजार से ज्यादा पंच-सरपंच का अधिकार 70 साल तक नहीं मिला, इसका जिम्मेदार कौन है। वहां राष्ट्रपति शासन आया। प्रधानमंत्री जी ने आग्रह किया और जम्मू कश्मीर के पंचायत एक्ट के तहत वहां चुनाव हुए। आज 40 हजार पंच-सरपंच गांव की सेवा सिद्धि कर रहे हैं। उनके हाथ में 3,500 करोड़ पहुंच गए हैं। यह अधिकार उन्हें नहीं मिला था, लेकिन कोई नहीं बोलेगा। मैंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर की गरीबी के लिए धारा 370 जिम्मेदार है। मैं कुछ आंकड़े देना चाहता हूं। 2004 से 2019 तक 2,77,000 करोड़ रुपया जम्मू-कश्मीर को भारत सरकार की ओर से भेजा गया। यह नरेन्द्र मोदी पैकेज के अलावा है। जब हम नीचे देखते हैं, तो जमीन पर कुछ नहीं हुआ। मैं इस बात पर बाद में आता हूं कि क्यों कुछ नहीं हुआ। भारत सरकार ने 2011 और 2012 में भारत में प्रति व्यक्ति 3,683 रूपया भेजा था और जम्मू कश्मीर में प्रति व्यक्ति 14,255 रूपया भेजा गया। फिर भी वहां विकास नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? क्योंकि करप्शन को कंट्रोल करने वाली एजेंसियों को वहां एन्ट्री नहीं है। उन्हें धारा 370 रोकती है।

जम्मू-कश्मीर राज्य है, वह तो मैं मानता हूं मगर मुझे बताइए कि भारत की दोनों सदन जो कानून पारित करती हैं, क्या वह जम्मू-कश्मीर में लागू होता है? क्या जम्मू कश्मीर के नागरिकों को उसका फायदा मिलता है? सरकारें कानून सरकार चलाने के लिए नहीं बनाती है, सरकारें कानून नागरिकों के भले के लिए बनाती हैं।

जम्मू-कश्मीर बैंक के अंदर आॅडिटर गया, एडमिनिस्ट्रेटर रखा, तो मैंने अच्छे-अच्छे के चेहरों पर सर्दियों में पसीना देखा है। पूरी दुनिया मानती हैं कि कश्मीर की घाटी और लद्दाख, जमीन पर स्वर्ग है। मगर जितना पर्यटन बढ़ना चाहिए था, उतना नहीं बढ़ा। वहां पर बर्फ भी है, तालाब भी हैं, घाटी भी है, वन भी है। पर्यटन नहीं बढ़ने का कारण यह है कि वहां अच्छा होटल नहीं है। लोग अच्छे होटल लगाना चाहती हैं। बड़ी ट्रैवल कंपनियां वहां अपना आॅफिस खोलना चाहते हैं। यदि खुल गई तो घाटी के लोगों को रोजगार मिलेगा, घाटी के युवाओं को कामकाज मिलेगा, मगर वहां पर्यटन इसलिए नहीं बढ़ सकता क्योंकि वहां धारा 370 है। वहां हजरतबल हैं, शंकराचार्य हैं, वैष्णो देवी है, अमरनाथ है। ढेर सारी रिलिजियस टूरिज्म की संभावनाएं पड़ी है। मगर इन सभी संभावनाओं का ढंग से दोहन नहीं हो पाता। शिक्षा के बारे में कहूं तो देश के 6-14 साल के बच्चों को 2009 में ही शिक्षा का अधिकार मिल गया था।

संविधान के अंदर सुधार हुआ, राइट टू एजुकेशन मिला, लेकिन यह आज कश्मीर में नहीं है। गुलाम नबी आजाद साहब से कहना चाहता हूं कि क्यों कश्मीर घाटी के बच्चों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। इसका जवाब 370 की वकालत करने वाले अधिवक्ता को देना है। अब कोई जरूरत नहीं है। शिक्षा का अधिकार कल रात से जम्मू- कश्मीर के हर बच्चे को मिल जाएगा। वहां पर निजी शिक्षण संस्थान नहीं हैं। वे क्यों वहां जाएंगे? कौन प्रोफेसर वहां पढ़ाने जायेगा। कौन अपना पैसा निवेश करेगा। आप इसको क्यों पकड़ कर रखना चाहते हैं? अचानक बिल लेकर आए, हमें मौका नहीं दिया। मैं यह बताना चाहता हूं कि हम तो राष्ट्र हित का बिल लेकर आए थे, आपने इंदिरा जी को इलाहाबाद के जजमेंट से बचाने के लिए संवैधानिक सुधार उसी दिन लाकर, उसी दिन पारित कर इस देश के लोकतंत्र को खत्म किया और हमें उपदेश देते हैं। गुलाम नबी आजाद साहब ने बताया कि शेडयूल एक में जम्मू-कश्मीर राज्य है। जम्मू-कश्मीर राज्य है, वह तो मैं मानता हूं मगर मुझे बताइए कि भारत की दोनों सदन जो कानून पारित करती हैं, क्या वह जम्मू- कश्मीर में लागू होता है? क्या जम्मू कश्मीर के नागरिकों को उसका फायदा मिलता है? सरकारें, कानून सरकार चलाने के लिए नहीं बनाती है, सरकारें कानून नागरिकों के भले के लिए बनाती हें। अगर नागरिकों के भले के लिए इस देश की ससंद ने कोई कानून पारित किया, तो वह वहां पहुंचता ही नहीं है।

गुलाम नबी आजाद साहब ने मुझे संबोधित करके कहा कि शादियां होने लगी हैं। मुझे बताइए कि जम्मू कश्मीर की एक बच्ची ने किसी ओडिया भाषी से शादी कर ली, तो क्या उसको और उसके बच्चों को वहां पर कोई अधिकार मिलने वाला है? यह 370 दलित और आदिवासी विरोधी है। मैं पूछना चाहता हूं कि वहां किनते परसेंट ओबीसी हंै? मैं रामगोपाल यादव जी से भी पूछना चाहता हूं क्योंकि उनकी पार्टी तो ओबीसी की खैरख्वाह पार्टी है। आपको मालूम है कि वहां पर ओबीसी को रिजर्वेशन ही नहीं मिल पाता है। एसटी, दलितों को राजनीतिक रिजर्वेशन नहीं मिलता है। इसीलिए आज बहन मायावती जी की पार्टी ने इसका समर्थन किया है। हम कब तक इनके साथ अन्याय करेंगे? आदिवासी सिर्फ हिन्दू नहीं हैं। वे तो गुर्जर हैं, मुस्लिम गुर्जर हैं। उनको भी रिवर्जेशन से वंचित किया गया है। अब मैं आतंकवाद पर आता हूं। वहां पर आतंकवाद जन्मा, पनपा और चरम सीमा पर पहुंचा, लेकिन अब धीरे-धीरे नीचे आ रहा है।

हमें आतंकवाद की जड़ में जाना पड़ेगा। मैं बताना चाहता हूं कि इस धारा 370 के भूत ने समय-समय पर वहां अलगाववाद को मानने वाले युवाओं के मन को गुमराह करके एक नाराजगी की भावना खड़ी की। पाकिस्तान ने उस नाराजगी की भावना का उपयोग किया। देश के बाकी राज्यों की तुलना में, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद कई गुना ज्यादा बढ़ा है। आज तक आतंकवाद के कारण वहां 41,894 लोग मारे जा चुके हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि वे क्यों मारे गए? आप कह रहे हैं कि हमारी पॉलिसी ठीक नहीं है। स्वायतता की मांग उठी। तीन युद्ध हारने के बाद 1988 में पाकिस्तान के जनरल जिया उल हक ने आॅपरेशन ट्यूपेक को स्वीकृति दी।

उसके अंदर भी धारा 370 का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि ऐसे गु्रप खड़े करिए, जो कश्मीर के युवाओं को गुमराह करें और उन्हें भारत की मुख्य धारा से अलग करें और जब तब 370 कलम है, तब तक कश्मीर का युवा भारत के साथ जुड़ नहीं सकता है। 1988 में आॅपरेशन ट्यूपेक की शुरूआत हुई और 1989 से वहां पर आतंकवाद शुरू हो गया। मैं सभी से एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। जो पाक प्रेरित गु्रप्स और आतंकवादी हैं, वे तो पूरे देश में आतंकवाद फैलाना चाहते हैं, लेकिन राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, बिहार का युवा गुमराह क्यों नहीं होता है। गुजरात में भी तो पाकिस्तान का बॉर्डर है। बाकी प्रदेशों के युवा इसलिए गुमराह नहीं होते, क्योंकि वहां धारा 370 नहीं है।

वहां कोई अलगाववाद का भूत नहीं है। जब भी आतंकवाद खत्म होने के कगार पर आता है, कुछ लोग धारा 370 को लेकर वहां के लोगों को भड़काना शुरू कर देते हैं। जवाहरलाल नेहरू जी ने भी कहा था कि चिन्ता मत करो, धारा 370 घिसते-घिसते घिस जायेगी, मगर धारा 370 को इतने जतन से सम्भाल कर रखा कि 70 साल हो गये, मगर वह नहीं घिसी। अब मुझे बताइए, यह एक अस्थायी व्यवस्था है, इसे सब स्वीकार करते हैं, क्या अस्थायी शब्द 70 सालों तक चल सकता है? कुछ सदस्यों ने कह दिया कि सरदार पटेल जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान को देना चाहते थे। सरदार पटेल ने देश के अंदर 650 से ज्यादा रियासतों को जोड़ कर अखंड भारत बनाने का प्रयास किया और आप कह रहे हैं कि वह जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान को देना चाहते थे। मैं रिकॉर्ड साफ कर दूं कि जम्मू-कश्मीर को कभी सरदार पटेल ने डील नहीं किया था। सरदार पटेल ने जूनागढ़ को डील किया था, जो आज भारत में है बिना 370 के है।

उन्होंने हैदराबाद को डील किया था। वह बिना 370 के आज भारत में है। जम्मू-कश्मीर को पंडित नेहरू ने डील किया था वह 370 के साथ। महाराजा हरि सिंह ने 27 अक्टूबर, 1947 को विलय पत्र पर साइन किया और धारा 370 दो साल बाद 1949 में आई। भारत के साथ जुड़ाव का धारा 370 से कोई लेना-देना नहीं है। यह भ्रामक प्रचार किया गया है। कहते हैं कि धारा 370 नहीं रहेगी, तो जम्मू-कश्मीर भारत से अलग हो जायेगा। मेरी समझ में नहीं आता कि ये कैसे अलग हो जाएगा। मैं घाटी के लोगों से कहना चाहता हूं कि इस देश में बहुत सारी रियासतें थीं। वे 370 के बगैर, 35ए बगैर भारत के साथ घुल मिल गयी हैं। 1964 में लोकसभा में इस विषय पर चर्चा हुई थी।

चर्चा में भाग लेते हुए राम मनोहर लोहिया जी ने कहा था कि जब तक धारा 370 है, तब तक भारत और कश्मीर का एकीकरण नहीं हो सकता, एकरूपता नहीं आ सकती। मधु लिमये जी, सरजू पाण्डे जी, एसएम मुखर्जी, इन्दर मल्होत्रा जी, बीडी सबनानी, कश्मीर से आने वाले एक मुस्लिम सांसद अब्दुल गनी साहब, गोपाल दत्त जी, श्याम लाल सर्राफ और कांग्रेस के 14 संसद सदस्यों ने भी यही कहा, लेकिन उस समय सदन को स्थगित कर दिया गया। उस समय भी यही भ्रम पैदा हुआ था। दूसरे दिन, व्हिप डालकर सदन में कांग्रेस के सदस्य इसके पक्ष में वोट न करें, इसकी व्यवस्था करके, चर्चा हुई। उस वक्त देश के गृहमंत्री, गुलजारी लाल नंदा को कहना पड़ा कि बहुत से सदस्यों की भावना है कि अभी उचित समय नहीं आया है। उचित समय आने पर हम इस विषय पर सोच विचार करके संवैधानिक कदम उठायेंगे। महोदय, मेरा जन्म 1964 में हुआ था और मेरी आयु के 55 साल चले गए, लेकिन वह उचित समय नहीं आया।

उचित समय तब आया, जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बने। इसमें किसी उचित समय की जरूरत नहीं थी, सिर्फ पोलिटिकल विल की जरूरत थी। वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर देश के हित में फैसला करने का जिगर चाहिए था। धारा 370 का इससे पहले बहुत बार उपयोग और दुरूपयोग भी हुआ। मैं एक छोटा सा उदाहरण देना चाहता हूं। जब देश में आपातकाल लगाई गई, इंदिरा जी एक प्रस्ताव लेकर आईं कि सारे विधायक मंडलों और संसद सदस्यों का कार्यकाल 6 साल कर दिया जाए। उस समय जम्मू-कश्मीर असेम्बली ने धारा 370 होते हुए भी उस प्रस्ताव को ग्रहण कर लिया। उसने भी अपने सदस्यों को कार्यकाल 6 साल कर दिया। बाद में, मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 6 साल का कार्यकाल फिर से 5 साल कर दिया। लेकिन धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में कार्यकाल 5 साल नहीं हुआ। वहां आज भी सदस्यों का कार्यकाल 6 साल ही है। मैं निश्चित रूप से आश्वस्त करना चाहता हूं कि जैसे ही नॉर्मल परिस्थिति हो जाएगी। उचित समय आएगा, जम्मू कश्मीर को फिर से स्टेट बनाने में हमें कोई ऐतराज नहीं है।

मैं आज इस सदन के माध्यम से जम्मू कश्मीर की जनता को भी कहना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर भारत का मुकुटमणि है और इसमें कोई मतभेद नहीं है। जब भी उचित समय आएगा, अगर स्थिति सामान्य होती है तो हमें इसको कोई ज्यादा लंबा करने का शौक नहीं है। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 370 को बचाने के लिए हजारों महिलाएं विधवा हुई हैं। गुलाम साहब 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए, महिलाएं विधवाएं हुई हैं, लेकिन 370 के कारण नहीं। मैं घाटी के लोगों को स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं कि 70 साल 370 के साथ जिए। मैं कहता हूं कि हमें 5 साल दे दीजिए, हम कश्मीर को देश का सबसे ज्यादा विकसित राज्य बनाएंगे। मैं कश्मीर घाटी के युवाओं को कहना चाहता हूं कि आप नरेन्द्र मोदी जी की सरकार पर भरोसा कीजिए, कुछ नहीं होने वाला है। ये बरगला रहे हैं, गुमराह कर रहे हैं, ये अपनी राजनीति के लिए कर रहे हैं, उनकी मत सुनिए। कश्मीर के युवाओं को यह कहना चाहता हूं कि इस 5 साल के अंदर कश्मीर में परिवर्तन आएगा, तब जाकर आपको मालूम पड़ेगा कि 70 साल जिस चिज को लेकर निकले, वह चीज ही ठीक नहीं थी।


 
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