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बिना किसी सरकारी मदद के 12 वर्षो से समाज हित में सेवाएं दे रहा है श्यामा वन

02/07/2020

  •  स्पेस फॉर नर्चरिंग क्रिएटिविटी संस्थान 'श्यामा वन' में चार साल के बच्चे के साथ ही 20 वर्षीय बेटियां भी

रोहित डिमरी
रुद्रप्रयाग, 02 जुलाई (हि.स.)। जिस उम्र में युवा अपनी शादी के सपने संजोए रहते हैं और बेटियां अपने हाथों में मेहंदी रचाने के ख्वाब देख रही होती हैं, ऐसी उम्र में केदारघाटी की अर्चना बहुगुणा ने 35 बच्चों को गोद लेकर उन्हें दुनिया की आधुनिक चकाचौंध और पाश्चात्य संस्कृति से दूर करते हुए अपनी संस्कृति और थाती व माटी की सोंधी महक से रूबरू कराने का संकल्प साधे हैं। केदारघाटी के खुमेरा देवीधार में अर्चना बहुगुणा की ओर से स्पेस फॉर नर्चरिंग क्रिएटिविटी संस्थान के तहत श्यामा वन संचालित किया जा रहा है, जिसमें बच्चों की अठखेलियां, मस्ती, मुस्कुराहट और शालीनता देखी जा सकती है। यहां चार साल के बच्चे के साथ ही 20 वर्षीय बेटियां भी मिल जाएंगी, जो पौराणिक संस्कृति, अनुशासन और प्राकृतिक संसाधनों के बीच में अपना जीवन गुजार रहे हैं। 

श्यामा वन में पढ़ रहे इन नन्हें मुन्नें बच्चों का ज्ञान इतना तेज है कि वह कालीमठ की महिमा भी जानते  हैं तो मुगलकालीन इतिहास का भी बखूबी ज्ञान है। श्यामा वन में रह रहे यह बच्चे प्रत्येक दिन मेडिटेशन भी करते हैं और एक दूसरे को शिक्षा देकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों से आये बच्चे इस गुरुकुल में व्यक्तित्व विकास के साथ दुनियादारी की सच्चाइयों से रूबरू हो रहे हैं। अपने निजी संसाधनों से अर्चना बहुगुणा श्यामा वन का संचालन कर रही हैं। सरकारी तौर पर इन्हें कोई सहायता नहीं दी जा रही है। समाज हित में धन का उपयोग कैसे किया जा सकता है, यह श्यामा वन में आकर समझा जा सकता है। स्पेस फॉर नर्चरिंग क्रिएटिविटी संस्थान की संस्थापक अर्चना बहुगुणा ने बताया कि श्यामा वन में बच्चों से लेकर युवावस्था के लोग रहते हैं। इन्हें सामाजिक माहौल देने के साथ ही सभी प्रकार की गतिविधियों से रूबरू करवाया जाता है। उन्होंने बताया कि श्यामा वन में रह रहे बच्चे और युवा अपनी इच्छानुसार ही पठन-पाठन संगीत का ज्ञान लेते हैं। साथ ही कृषि का कार्य भी करते हैं। इसके अलावा स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाते भी हैं और आपदा जैसे दौर में लोगों की मदद को भी आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी सरकारी मदद के ही ये युवा सभी कार्यों को अंजाम देते हैं। 

युवाओं के नेतृत्व विकास को लेकर एक वर्षीय कोर्स 
स्पेस फॉर नर्चरिंग क्रिएटिविटी संस्थान में बच्चों के लिए सृजन निकेतन कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिसके तहत बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण के हर पहलू पर कार्य किया जाता है। इसके अन्तर्गत बच्चों को विषयगत अध्ययन की प्रयोगात्मक शिक्षा के अलावा योग, संगीत, कृषि, कला क्राफ्ट सहित कई प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से शिक्षण दिया जा रहा है। केंद्र पर चलने वाले सृजन कोर्स के तहत युवाओं के नेतृत्व विकास को लेकर एक वर्षीय कोर्स संचालित किया जाता है। इस कोर्स के तहत युवाओं के सवालों पर बातचीत करना व उन्हें किसी हुनर में दक्ष किया जाता है। कोर्स से निकले दर्जन भर युवा समाज में स्थानीय स्तर से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में सेवा कार्य कर रहे हैं। 

12 प्राथमिक विद्यालयों में चल रहा शिक्षण कार्यक्रम 
स्पेस फॉर नर्चरिंग क्रिएटिविटी संस्थान द्वारा केदारनाथ आपदा के बाद से प्राथमिक विद्यालयों के साथ शिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वर्तमान में स्थानीय 12 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के साथ शिक्षण गतिविधियों को लेकर समय-समय पर संवाद गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। इसके साथ ही इन्हीं विद्यालय के बच्चों के साथ रचनात्मक शिक्षण कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। विद्यालयों में बड़े स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, बाल मेला आयोजन, बच्चों का शैक्षिक भ्रमण व गांव की पौराणिक जानकारियों पर कार्य कर बच्चों की पुस्तक संपादन का कार्य भी कर रहा है। 

कोरोना महामारी में मजदूरों काे पहुंचाई राहत सामग्री 
स्थानीय स्तर से लेकर देशव्यापी आपदाओं में स्पेस फॉर नर्चरिंग क्रिएटिविटी संस्थान ने बड़े पैमाने पर कार्य किया है। वर्तमान में कोरोना महामारी में प्रवासियों को खाद्य सामग्री मुहै ̧या करवाने के अलावा बच्चों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाई गई। केदारनाथ आपदा में रेस्क्यू और राहत से लेकर पुनर्वास कार्य किया। ऊखीमठ आपदा के दौरान राहत सामग्री वितरित करना व केरल आपदा के समय सर्वे और राहत वितरण कार्य बड़े स्तर पर किया गया। वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान संस्थान की ओर से सोनप्रयाग से गुप्तकाशी के बीच फंसे 1200 प्रवासी मजदूरों को एक माह की भोजन सामग्री उपलब्ध कराने के अलावा रोजमर्रा की आवश्यक चीजें भी उपलब्ध कराई गईं। स्थानीय 12 गांवों के जो बच्चे प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, उन्हें अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई। इन्हीं गांवों में बच्चों के अध्ययन में सहयोग के लिए गांव के ही युवक युवतियों को जिम्मदारी दी गई। इस पहल के लिए के एसएनसी कार्यकर्ताओं का बहुत बड़ा सहयोग रहा। ग्राम प्रधानों व ग्रामीणों ने इस जिम्मेदारी को अपने स्तर पर ही करने का फैसला लिया। 

आजीविका संवर्द्धन की नई मिसाल
स्पेस फॉर नर्चरिंग क्रिएटिविटी संस्थान क्षेत्र में आजीविका संवर्द्धन की नई मिसाल पेश कर रहा है, जिससे पलायन जैसी विकट समस्या का निराकरण हो सके। केदारनाथ पूजा-प्रसाद के लिए जूट बैग तैयार कर प्लास्टिक उन्मूलन व महिलाओं की आजीविका बढ़ाने का लक्ष्य लेकर संस्थान ने बड़ा संदेश घाटी को दिया। इसके अलावा क्षेत्र की महिलाओं को जैम, जूस, प्रसाद बनाना व व्यावसायिक खेती का प्रशिक्षण देकर जागरूक किया जा रहा है। इस कोरोना के संकट में भी एसएनसी केंद्र पर ही युवा साथियों ने कई तरह की सब्जियां उगाकर बाजार को उपलब्ध करवाई। यह संस्थान सामाजिक आंदोलनों, जागरूकता कार्यक्रमों व गोष्ठियों के माध्यम से भी विभिन्न पहलुओं पर संवाद कर रहा है, जिससे समाज में सकारात्मकता व जागरूकता बढ़े। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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