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कोहरे में बल्हघाटी हवाई अड्डा

24/12/2019

कोहरे में बल्हघाटी हवाई अड्डा

मुरारी शर्मा

मंडी जिला के बल्हघाटी की बेहद सामरिक जगह में प्रस्तावित हवाई अड्डा का स्थानीय निवासियों द्वारा विरोध किया जा रहा है। देखना यह है कि अपनी उपजाऊ जमीन को लेकर हो रहे इस विरोध से सरकार कैसे निपटती है।

प्रदेश के केंद्रीय स्थल मंडी जिला में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का मुद्दा कड़ाके की ठंड के बीच सुर्खियों में है। मंडी के इस हवाई अड्डे को सामरिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंडी जिला जो मध्य हिमाचल का केंद्र बिंदु है यहां से लेह लद्दाख और चीन बार्डर तक सैन्य रसद पहुंचाने के लिए प्रस्तावित यह हवाई अड्डा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं पर कुल्लू-मनाली जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यटन स्थल के नजदीक मंडी ही ऐसा जिला है जहां इस स्तर का हवाई अड्डा बन सकता है। इससे प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा भी मिल सकता है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो अनिश्चितता के घने कोहरे के बावजूद उम्मीदों की ऊंची उड़ान जैसा है। मंडी जिला की बल्हघाटी में प्रस्तावित इस अति महत्वाकांक्षी हवाई अड्डे को लेकर अभी से पक्ष और विपक्ष में लोग लामबंद होने लगे हैं। हालांकि, मंडी की बल्हघाटी में हवाई अड्डे के निर्माण को लेकर कांग्रेस के शासन में भी लंबे समय से घोषणाएं होती रही हैं। उस दौरान बल्ह के नेर ढांगू में हवाई अड्डे निर्माण की बात चलती रही।
लेकिन यह बात सिरे नहीं चढ़ पाई। बल्हघाटी में धुंध का बहाना बनाकर कांग्रेस शासन में हवाई अड्डे से हाथ पीछे खींच लिए थे। मगर जबसे भाजपा की सरकार बनी है, हवाई अड्डे को लेकर प्रयास और तेज हो गए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जो स्वयं मंडी जिला से संबंध रखते हैं, वे चाहते हैं कि हवाई अड्डा मंडी जिला और वो भी बल्हघाटी में बनें। जिसके चलते केंद्र से बार-बार इस मुद्दे को व्यक्तिगत तौर पर उठाते आ रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से मंडी जिला के करीब आधा दर्जन स्थानों पर सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद मंडी जिला की बल्हघाटी में ही इस अनिश्चितता स्तर के हवाई अड्डे को मंजूरी दे दी गई। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इस सिलसिले में अभी केंद्रीय मंत्री नागरिक उड्डयन, आवास एवं शहरी मामले हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात भी की है। मंडी में बनने वाले हवाई अड्डे का निर्माण राज्य सरकार और भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण संयुक्त रूप से करेंगे। इसके लिए प्राधिकरण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगा।
जबकि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण के कार्य में तेजी लाएगी। इधर, राज्य सरकार की इस कवायद के साथ ही जमीनी स्तर पर हवाई अड्डे के पक्ष और विरोध में लोग लामबंद होना शुरू हो गए हैं। विरोधी पक्ष का कहना है कि हवाई अड्डा बनने से बल्हघाटी की सैंकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन उनसे छीन ली जाएगी। हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा, क्योंकि बल्हघाटी में पहले ही फोरलेन और रेल लाइन के लिए लोगों की जमीन का अधिग्रहण होना है। वहीं दूसरी ओर हवाई अड्डे के समर्थकों का कहना है कि देशहित के लिए वे कुर्बानी देने को तैयार हैं। बल्ह विकास मंच का कहना है कि जमीन की एवज में उचित मुआवजा मिले तो किसान अपनी जमीन देने को तैयार हैं। बल्ह विकास मंच के अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने कहा कि एयरपोर्ट के निर्माण का विरोध वे लोग कर रहे हैं, जिन्होंने सरकारी भूमि के साथ साथ लोगों की निजी भूमि पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। भूमि अधिग्रहण होने पर ऐसे लोगों को कोई मुआवजा नहीं मिल पाएगा। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनने से क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान होगी। वहीं युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। जिला मंडी के अनछुए क्षेत्रों का पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा मिलेगा। अब देखना है कि मंडी जिला में प्रस्तावित हवाई अड्डा घोषणाओं की उड़ान से जमीन पर उतर पाएगा या नहीं।


 
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