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पुलिस देखे कि मर्जी से शादी करने वालों के जीवन में कोई दखल न दे सके: हाईकोर्ट

11/09/2019

विद्याकांत मिश्र 
प्रयागराज, 11 सितम्बर (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एसएसपी प्रयागराज को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि अपनी मर्जी से शादी करने वाले याचियों के शान्तिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी के द्वारा हस्तक्षेप न होने पाए। कोर्ट ने कहा है कि याची दो माह में विवाह का पंजीकरण करा ले अन्यथा विवाह पंजीकृत न होने पर कोर्ट का संरक्षण देने का आदेश स्वतः समाप्त हो जायेगा।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि याचियों के माता पिता को लगता है कि गलत तथ्य देकर आदेश प्राप्त किया है तो वे आदेश वापस लेने की अर्जी दे सकते है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने ख़ुशी आर्या उर्फ खुशनुमा बानो व अन्य की याचिका पर दिया है। याची अधिवक्ता का कहना था कि याचीगण बालिग है। उन्होंने अपनी मर्जी से 19 दिसम्बर 18 को शादी की है और परिवार वाले उन्हें परेशान कर रहे हैं। पुलिस भी उन्हें संरक्षण नही दे रही है। याची का कहना था कि अन्तर्जातीय व अंतर्धार्मिक विवाह करने वालों को पुलिस संरक्षण देने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को ऐसी शादी करने वाले बालिगों को संरक्षण देने और यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि कोई उनका उत्पीड़न न करे, न धमकाने पाए और न ही उनके खिलाफ हिंसा हो। इस पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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