युगवार्ता

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आतंकवाद से लड़ने वाला विधेयक

01/08/2019

आतंकवाद से लड़ने वाला विधेयक

संतोष कुमार राय

राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण संशोधन विधेयक 2019 के जरिए आतंकवाद से लड़ने में सरकार को सहायता मिलेगी। इस तरह की गतिविधि में लिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने का अधिकार मिलना आतंकवाद को कुचलने के लिए बहुत जरूरी था। आज तक इस तरह के मामले में सीधे कार्रवाई का अधिकार नहीं था जिसका लाभ प्रथम दृष्टया आतंकवादियों को मिल जाता था।

अमित शाह ने जबसे गृह मंत्री का दायित्व संभाला है, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उनकी सक्रियता देखी जा रही है। आतंकवाद, नक्सलवाद, उग्रवाद और कश्मीर की सुरक्षा को लेकर गृह मंत्रालय लगातार नए-नए संशोधन विधेयक ला रहा है। उद्देश्य साफ है। वह यह कि आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति और उसी के अमल पर सरकार काम कर रही है। कुछ दिन पहले लोकसभा में ‘राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण संशोधन विधेयक 2019’ को मंजूरी मिली जबकि अब ‘गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन विधेयक 2019’। पहले सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को मजबूत बनाने का काम किया, उसके बाद गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन विधेयक 2019 के माध्यम से किसी की गतिविधि के आधार पर उसे व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकेगा।
दरअसल एनआईए को और अधिक अधिकार देने का संशोधन यानी राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण संशोधन विधेयक में प्रावधान किया गया है कि भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के मामले का पंजीकरण करने और उसकी जांच का निर्देश देने की व्यवस्था है। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों से स्पष्ट है कि ‘राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019’ यह उपबंध करता है कि अधिनियम की धारा 1 की उपधारा 2 में नया खंड ऐसे व्यक्तियों पर अधिनियम के उपबंध लागू करने के लिए है, जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के विरुद्ध या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला अपराध करते हैं।
अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 2 का संशोधन करके एनआईए के अधिकारियों की वैसी शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व प्रदान करने की बात कही गई है जो अपराधों के अन्वेषण के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा न केवल भारत में, बल्कि भारत के बाहर भी प्रयोग की जाती रही है। गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन बिल आतंकवाद से निपटने के लिए बहुत महत्वपूर्ण संशोधन है। हालांकि इसे पारित होने में सदन में पुरजोर विरोध का भी सामना करना पड़ा। विधेयक के पक्ष में 288 मत पड़े, जबकि विपक्ष में 8 मत पड़े। सदन में इस बिल की स्वीकृति पर गृहमंत्री अमित शाह ने इसके पक्ष को स्पष्ट किया, साथ ही इस बिल को लाने के उद्देश्यों पर विस्तार से बताया। उन्होंने इसके पक्ष में उदाहरण देते हुए कहा कि यासिन भटकल जैसे आतंकवादी, जो काफी वर्षों से जांच एजेंसियों के रडार पर थे, अगर यह अधिकार हमारे पास होता तो उसे बहुत पहले ही पकड़ लिया जाता।
और आतंकवादी घोषित कर दिया जाता। आतंक विरोधी कानून में अब तक सिर्फ यह प्रावधान था कि वह किसी समूह को प्रतिबंधित कर सकता था, लेकिन किसी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं, जिसका फायदा कई आतंकवादियों को मिला। इस कमी ने कई न्यायिक फैसलों को भी प्रभावित किया। ऐसे मामलों में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोगों को सजा दिलाना किसी भी जांच एजेंसी के लिए काफी कठिन साबित रहा। यह संशोधन ऐसे मामलों में बहुत कारगर साबित हो सकता है। इसके माध्यम से अब किसी की गतिविधि के आधार पर उसे व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकेगा। इन दोनों विधेयकों का विरोध करके विपक्ष ने अपना गैरजिम्मेदारना रवैया दिखा दिया। कारण यह है कि विपक्ष आतंकवाद को धर्म विशेष के आधार पर देखता है और उसे इस बात का डर है कि यह विधेयक उनके वोट बैंक को प्रभावित करेगा। कांग्रेस की ओर से मांग की गई कि सरकार विधेयक को जांच के लिए स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजे।
लेकिन सरकार का तर्क था कि आतंकवाद की जांच के लिए पुराने कानून में तत्काल बदलाव करना बहुत आवश्यक है। इसके बाद कांग्रेस के सांसदों ने सदन से वॉकआउट करते हुए अपनी गैरजिम्मेदारी का प्रदर्शन किया। एक बात तो तय है कि ये दोनों संशोधन राष्ट्रहित में सरकार द्वारा उठाया गया बहुत बड़ा कदम है। यह आतंकवाद पर लगाम लगाने में सफल होगा। साथ ही इस तरह के मामलों में जांच एजेंसी आसानी से सजा दिला सकती है। ये दोनों विधेयक सरकार की मंशा को भी सीधे-सीधे व्यक्त कर रहे हैं। अब तो स्पष्ट है कि सरकार ने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपना रुख साफ कर दिया है। सरकार अपने पहले सत्र में जिस तरीके का बिल लायी है उससे आतंकवाद का भारत से मिटना अब नजदीक दिख रहा है। इन दोनों संशोधनों का प्रभाव आने वाले समय में ही पता चलेगा लेकिन इसके उद्देश्यों का फलीभूत होना तय है।


 
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