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बीसीसीआई का नाडा के सामने समर्पण

10/08/2019

मनोज चतुर्वेदी

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लगते हैं आजकल दिन सही नहीं चल रहे हैं। एक तरफ आईसीसी उनके राजस्व में कटौती करने की धमकी दे रहा है। वहीं बीसीसीआई को लंबे समय तक टालमटोल करने के बाद नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) के दायरे में आने को मजबूर होना पड़ा है। वह लगातार कहता रहा था कि वह सरकार से कोई अनुदान नहीं लेता है और वह राष्ट्रीय खेल फेडरेशन नहीं है, इसलिए नाडा के दायरे में नहीं आता है। लेकिन पिछले दिनों पृथ्वी शॉ के डोपिंग मामले में फंसने और सरकार के दवाब बनाने से अब बीसीसीआई ने नाडा के दायरे में आना स्वीकार कर लिया है। बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी से मुलाकात के बाद खेल सचिव आरएस जुलानिया ने बताया कि बीसीसीआई ने लिखित में दिया है कि वह नाडा की डोपिंग निरोधक नीति को मानेगा। इस तरह बीसीसीआई ने भी अपने को एक राष्ट्रीय खेल फेडरेशन मान लिया है।

आईसीसी ने पिछले दिनों बीसीसीआई से कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उसे कर में छूट नहीं मिलती है तो वह बीसीसीआई के राजस्व में कटौती कर सकता है। असल में आईसीसी चाहता है कि 2016 में हुए टी-20 विश्वकप के लिए भारत सरकार से उसे कर में छूट मिले। ऐसा अबतक नहीं होने पर आईसीसी ने चेतावनी दी है। यह सही है कि बीसीसीआई इस मामले में आसानी से हाथ डालने वाला नहीं है पर इतना तो है कि आईसीसी ने चेतावनी देकर उसकी मुश्किलें जरूर बढ़ा दी हैं। इसके अलावा पृथ्वी शॉ के डोपिंग मामले को निपटने के ढंग की आलोचना होने से भी उसके ऊपर दवाब बना है। नाडा पृथ्वी शॉ के मामले शक की निगाह से देखता है और वह इस मामले को खोल सकता है। पृथ्वी शॉ पर बीसीसीआई ने पिछले माह आठ माह का प्रतिबंध लगाने की जानकारी दी है। दिक्कत यह है कि पृथ्वी को 16 जुलाई को दोषी पाया गया और 30 जुलाई को उन्हें सजा सुनाई गई। इस बीच 21 जुलाई को वेस्ट इंडीज दौरे के लिए टीम इंडिया का चयन किया गया और पृथ्वी शॉ टीम में चुने जाने के प्रबल दावेदार थे पर उनका चयन नहीं किया गया। इसका मतलब है कि पृथ्वी का डोप टेस्ट पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी चयनकर्ताओं को थी। अगर ऐसा था तो बीसीसीआई पूरे मामले को मीडिया से क्यों छिपाए रहा। यही नहीं पृथ्वी पर पाबंदी 16 मार्च से लगाई गई, जबकि वह आठ मई तक आईपीएल में दिल्ली केपिटल्स के लिए खेलते रहे।

बीसीसीआई को वाडा कोड के एक क्लॉज पर एतराज रहा है, इसलिए वह इसके दायरे में आने से एतराज करता रहा है। क्रिकेटरों को जिस क्लॉज पर एतराज रहा है, वह है कि वह जहां जाएं, उन्हें नाडा को इसकी जानकारी देनी होगी। इसकी वजह यह है कि जरूरत पड़ने पर उनका एक घंटे के नोटिस पर डोप टेस्ट किया जा सके। भारतीय क्रिकेटर इसे निजता के नियम का उल्लंघन मानते रहे हैं। साथ ही उन्हें लगता था कि वह अपने हर स्थान पर मौजूद रहने का खुलासा करेंगे तो उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। पर यह एतराज रोजर फेडरर से लेकर उसैन बोल्ट जैसे तमाम खिलाड़ियों का रहा है लेकिन उन्होंने इसपर एतराज जताते हुए वाडा कोड को भी अपना लिया। ऐसा ही भारतीय क्रिकेटर भी कर सकते थे लेकिन बीसीसीआई इसकी आड़ में नाडा के दायरे में आने से बचता रहा।

क्रिकेट बोर्ड ने क्रिकेटरों के डोप टेस्ट के लिए प्राईवेट-इंटरनेशनल डोप टेस्ट और मैनेजमेंट नामक एजेंसी को रखा हुआ था। यह एजेंसी नियमित तौर पर क्रिकेटरों के खून और मूत्र के नमूने लेकर टेस्ट करती रही है। दिक्कत यह थी कि यह एजेंसी नाडा से मान्यता प्राप्त नहीं थी और पृथ्वी शॉ मामले में बीसीसीआई की थू-थू होने की वजह से उसके पास नाडा के दायरे में आने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। वैसे, वाडा तो उनके ऊपर काफी समय से दवाब बनाता रहा है। उसने करीब दो साल पहले खेल मंत्रालय से बीसीसीआई को वाडा कोड अपनाने के लिए मदद करने की अपील की थी। पर उस समय खेल मंत्रालय का रवैया थोड़ा ढुलमुल था। उसने नाडा से कहा कि उसे देश के सभी खेलों में डोप टेस्ट करने का अधिकार है इसलिए वह क्रिकेटरों का भी डोप टेस्ट करे। वह यदि इससे मना करते हैं तो इस बारे में वाडा को लिखा जाएगा। यह समस्या का समाधान का प्रयास कम अपनी जान बचाने वाला ज्यादा लगता था। यह नहीं सोचा जा रहा था कि जब नाडा का बीसीसीआई से अनुबंध ही नहीं था तो वह क्रिकेटरों का डोप टेस्ट कैसे करता।

खेल मंत्रालय ने साल-डेढ़ साल पहले वाडा की चेतावनी के बाद मामले की गंभीरता को समझा। वाडा ने चेतावनी दी कि नाडा यदि बीसीसीआई में वाडा कोड लागू करने में असमर्थ रहता है तो उसकी मान्यता खत्म कर दी जाएगी। इस स्थिति में देश में कोई वाडा से मान्यता प्राप्त संस्था नहीं रहेगी। इस स्थिति में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने को जाने वाले खिलाड़ियों को बिना डोप टेस्ट के भेजने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही देश में खेलों को साफ-सुथरा बनाने के अभियान को भी करारा झटका लगेगा। यह सही है कि वाडा की चेतावनी का मकसद बीसीसीआई को इसके अंतर्गत लाने के लिए गंभीर प्रयास करने को प्रेरित करना था। इस तरह वाडा ने बीसीसीआई पर शिंकजा कसने के लिए तुरुप का इक्का चल दिया था।

खेल मंत्रालय ने पिछले दिनों बीसीसीआई पर दवाब बनाने के लिए दक्षिण अफ्रीका ए और महिला टीमों के दौरों को मंजूरी नहीं दी। इससे बीसीसीआई की समझ में आ गया कि अब वाडा कोड को मानने का समय आ गया है। इसलिए बीसीसीआई ने खेल मंत्रालय के साथ पिछले कुछ समय से चले आ रहे टकराव को टालते हुए नाडा के दायरे में आकर समर्पण करके समस्या का समाधान कर दिया है। इससे अब अन्य खेलों के खिलाड़ियों की तरह क्रिकेटरों के डोप टेस्ट भी नाडा करेगा।

(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं।)


 
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