राम जन्मभूमि

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त्रेता का गौरव पुनः प्राप्त करेगी अयोध्या, रामनगरी के कायाकल्प पर खर्च होंगे 2000 करोड़

03/09/2020

 -अयोध्या का भव्यरूप देने में जुटी योगी सरकार

-विश्वस्तरीय आध्यात्मिक व पर्यटन नगरी बनाने के लिए हो रहा कार्य
 
लखनऊ, 03 सितम्बर (हि.स.)। भगवान श्रीराम ने जिस अयोध्या के लिए स्वयं कहा है, ‘‘अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ,’’ उसी अवधपुरी को पुनः त्रेता युग की पहचान देने लिए योगी सरकार युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। राज्य सरकार अयोध्या को आध्यात्मिकता और पर्यटन के साथ व्यापार व रोजगार का भी केंद्र बनाना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में गुरुवार शाम को एक महत्वपूर्ण बैठक भी की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं का प्रस्तुतीकरण भी देखा। 

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की योजना के अनुरुप सनातनी आस्था की प्रतीक, सप्तपुरियों में प्रथम अयोध्या प्राचीन गौरव के साथ स्थापित होते ही रामनगरी न केवल भारतीय बल्कि दुनिया भर के सनातन परम्परा के अनुयायियों के लिए धर्म और आस्था के प्रमुख केन्द्र के रूप में गौरव प्राप्त करने में सफल हो जाएगी। करीब पांच शताब्दियों की आशाओं और उम्मीदों को संजोए सनातनियों के लिए हर्ष का क्षण है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ हो रहा है इसलिए अब आवश्यकता इस बात की है कि अयोध्या भविष्य की जरूरतों के लिहाज से तैयार हो। 

प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी अयोध्या को नई नई पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी के मद्देनजर राज्य सरकार अयोध्या के कायाकल्प पर 2000 करोड़ अधिक की राशि खर्च कर रही है। जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और वहां बनने वाली दुनियां की सबसे ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा बनने के बाद भविष्य में वहां पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। सरकार के अनुमान के अनुसार 2020 से 2031 के दौरान इस संख्या में तीन गुने 2.2 करोड़ से 6.8 करोड़ से अधिक की वृद्धि होगी। इसे देखते हुए सरकार अयोध्या में हास्पिटैलिटी पर विशेष फोकस कर रही है, ताकि वहां आने वालों को बेहतर सुविधाएं मिलें। उनके दिलो-दिमाग पर अयोध्या की अच्छी और अमिट छवि चस्पा हो। 

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की इच्छा है कि अयोध्या केवल आध्यात्मिक नगर के रूप में ही न देखी जाए बल्कि आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को भी जोड़ जाए यानि अयोध्या को आध्यात्मिक अर्थव्यवस्था से जोड़कर दुनिया भर के आध्यात्मिक पर्यटकों को आकर्षित करने उपादान निर्मित किए जाएं, इसके लिए रणनीतिक स्तर पर कार्ययोजना बन चुकी है और इसके परिणाम जल्द ही दिखने आरम्भ हो जाएंगे। 

प्रवक्ता ने बताया कि अगर सभी विभागों के कार्यों को जोड़ लिया जाय तो दो हजार करोड़ रुपये से अयोध्या के कायाकल्प की तैयारी है। मौजूदा समय में पर्यटन विभाग की ओर से 258.12 करोड़ रुपये की लागत से समेकित पर्यटन के लिए विकास के कई काम जारी हैं। कुछ पूरे भी हो चुके हैं। इसके अलावा सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर थीम बेस्ड गेट के निर्माण, परिक्रमा पथों के विकास, कुन्डों की जीर्णोद्धार, टूरिस्ट फैसिलिटेशन के निर्माण, पार्किंग, यात्री सुविधाओं और फूडकोर्ट के निर्माण आदि के लिए केंद्र सरकार को 200 करोड़ का प्रस्ताव भी विभाग की ओर से शीघ्र ही केंद्र को भेजा जाना है। 

वैदिक व स्मार्ट सिटी का समन्वय होगी नव्य अयोध्या

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि रामनगरी में एक नव्य अयोध्या का भी निर्माण होना है। ऐसी अयोध्या जो वैदिक और स्मार्ट सिटी का समन्वय हो। इसमें इक्ष्वाकुपुरी की वह परिकल्पना भी साकार होगी जो हमारी पौराणिक धरोहर की साक्षी बनेगी। इसके माध्यम से भावी पीढ़ियों तक अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ ऐतिहासिक चरित्रों को जानने का अवसर हासिल होगा। इसके लिए उप्र आवास-विकास परिषद ने 639 एकड़ भूमि भी चिन्हित की है। फिलहाल अयोध्या में राम की पैड़ी के सुंदरीकरण, यहां के फसॉड इंप्रूवमेंट के सिविल कार्य, बहुउद्देशीय हाल, गुप्तार घाट और लक्ष्मण किला घाट और रामकथा का विस्तारीकरण, राजा दशरथ की समाधि के जीर्णोद्धार का काम पूरा हो चुका है। पंच कोसी परिक्रमा पर परिक्रमा करने वालों के विश्राम के लिए जगह-जगह छाजन बनाने, मल्टी लेवेल कार पार्किंग, बस स्टैंड, क्ववीन-हो मेमोरियल का सुंदरीकरण और यात्री निवास के उच्चीकरण का काम जारी है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग,लोकनिर्माण, नगर विकास एवं शहरी नियोजन, सिंचाई एवं जल शक्ति, ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग की ओर से भी अयोध्या के कायाकल्प के लिए काम कर हैं। इन सबके कामों को जोड़ दें तो अयोध्या के विकास पर आने वाले समय में केंद्र और प्रदेश सरकार 2000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने जा रही है।

गुप्तार घाट से नया घाट तक सरयू तट का होगा सौंदर्यीकरण 

प्रवक्ता के अनुसार सरकार की योजना है कि गुप्तार घाट से नया घाट तक रीवर फ्रंट को विकसित किया जाए, जिससे कि नदी के किनारे पैदल चलने वालों को तकलीफ न हो। नए घाटों के निर्माण के साथ-साथ पुराने घाटों का सरंक्षण और नवीकरण हो। सरकार की यह भी मंशा है कि सरयू पर किसी डैम की संभावनाएं भी तलाशी जाएं जिससे राम की पैड़ी में जल का प्रवाह निरंतर बना रहे।
 
होटल इंडस्ट्री को भायी अयोध्या

उन्होंने बताया कि किसी शहर की संभावनाओं का अंदाजा बाजार को सबसे पहले लगता है। अयोध्या में पर्यटक आएंगे तो उनके ठहरने की भी व्यवस्था उनके बजट में होनी चाहिए। इन्हीं संभावनाओं के मद्देनजर होटल इंडस्ट्री के लिए अयोध्या निवेश का पसंदीदा स्थल बन गया है। 2018 में नयी पर्यटन नीति आने के बाद वहां के लिए 20 प्रस्ताव सरकार को मिल चुके हैं। इसमें एक-एक होटल और रीसॉर्ट के अलावा 12 बजट, तीन हेरीटेज और बाकी सामान्य होटल है। नव्य अयोध्या के निर्माण के साथ इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर भी अपने लक्जरी ब्रांड के साथ अयोध्या आएंगे। 

हिन्दुस्थान समाचार/ पीएन द्विवेदी/राजेश
 


 
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