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रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त फिर भी नहीं हारे हिम्मत, बने कर्मठता और आत्मनिर्भरता के मिसाल

18/06/2020

- चौकी पर पेट के बल लेट कर करते है सिलाई,लॉकडाउन में भी जैसे-तैसे खींच रहे जीवन की गाड़ी

श्रीधर त्रिपाठी
वाराणसी, 18 जून (हि.स.)। 'ना थके कभी पैर ना कभी हिम्मत हारी है, हौसला है जिंदगी में कुछ कर दिखाने का, इसीलिए अभी भी सफर जारी है। ये पक्तियां पेशे से टेलर जितेंद्र वर्मा पर सटीक बैठती है। एक दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने बेरंग और कठिन जिंदगी से हार नहीं मानी। पूरी हिम्मत के साथ जितेन्द्र इस शारीरिक परेशानी से जूझते हुए दृढ़ संकल्प और हौसलों की उड़ान से सामान्य जीवन जीने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। पिछले 17 साल से अपने परिवार का भरण पोषण का भार अपने कंधों पर वह भी बिना किसी सहयोग के उठा आत्मनिर्भर व स्वाभिमान के साथ जज़्बे और जुनून से जीवन जी रहे हैं। आज जितेन्द्र अपने जैसे मरीजों में जीने की लालसा जागते है और उनको इस बात का एहसास दिलाते है की आप किसी से कम नहीं है।

सारनाथ थाना क्षेत्र के हीरामनपुर निवासी जितेंद्र वर्मा पेशे से टेलर मास्टर है। वर्ष 2003 में छत से गिरने पर जितेन्द्र वर्मा की रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई। काफी इलाज के बाद भी वे बैठ नहीं पाये। जीवन में आये इस विकट संकट से जितेन्द्र वर्मा निराश होने की बजाय पूरे हिम्मत से संघर्ष करते रहे। ऐसे कठिन दौर में पत्नी ज्योति वर्मा, भाई दिनेश वर्मा, बिटिया जागृति सहारा बनी। पत्नी और भाई के सहयोग से जितेन्द्र चौकी पर पेट के बल लेटकर ही कपड़ा सिलने लगे। शुरू में लोग झिझके लेकिन उनके काम में बारीकी और पूरी निपुणता देख-देख ग्राहक भी उनके पास आने लगे तो जीवन एक बार फिर पटरी पर लौट आई।

गुरूवार को हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में जितेन्द्र वर्मा ने अपने कठिन प्रेरणादायी संघर्ष को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस शारीरिक कमी को आगे बढ़ने की राह में आड़े नहीं आने दिया। आज इस संघर्ष और परिश्रम से घर का खर्च चल रहा है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में फिर काम न मिलने पर आर्थिक स्थिति डगमगाई। कहीं से कोई सहारा नहीं मिला। जैसे—तैसे जीवन की गाड़ी चल रही है। उन्होंने बताया कि बिटिया जागृति को आइएएस बनाने का सपना है। उसके सपने को पूरा करने के लिए दिन रात एक कर रहा हूं। बिटिया बीएचयू से बीएसएसी कर रही है,पढ़ने में होनहार है।

- भाजपा नेता डा.उत्तम ओझा ने की मदद
जितेन्द्र वर्मा के कठिन संघर्ष के बारे में भाजपा नेता दिव्यांग बंधु डा.उत्तम ओझा को जानकारी हुई तो उनके आवास पर पहुंचे। जितेन्द्र वर्मा के जीवटता की तारीफ के बाद उन्हें मदद का भरोसा दिया। इसके बाद जितेन्द्र वर्मा के संघर्ष को सोशल मीडिया के जरिये साझा भी किया। 

डा.ओझा ने बताया कि वर्मा परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रयास कर रहे है। जल्द ही एक व्हीलचेयर इनको उपलब्ध करा देंगे। उनकी पहल से मोटराइज्ड साइकिल भी उन्हें मिली है। ओझा ने कहा कि व्हीलचेयर और चौकी पर जिंदगी गुजरने के बावजूद जितेन्द्र में एक अनोखी ताकत देखने को मिलती है जो हम सब के लिए प्रेरणादायी है।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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