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क्या टीम मोदी से जुड़ेंगे फडणवीस

06/09/2019

क्या टीम मोदी से जुड़ेंगे फडणवीस

सुधीर जोशी

यह चर्चा जोरशोर से है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू करते हैं, या फिर दिल्ली जाकर टीम मोदी के सदस्य बनकर अपनी नई पारी शुरू करेंगे।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तिथियां भले ही अभी घोषित न की गई हो लेकिन भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस, राकांपा, मनसे, वंचित आघाडी समेत अन्य सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि 14 सितंबर को विधानसभा चुनाव का बिगुल बज सकता है। इसे लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारे में चर्चाएं इसलिए और भी शुरू हो गई हैं क्योंकि हाल ही में एक टेलीविजन चैनल को दिए गए साक्षात्कार में राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ज्यादा दिनों तक राज्य की राजनीति में नहीं रहने की संभावना व्यक्त की। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वे कब तक दिल्ली की राजनीति सक्रिय हो रहे हैं। लेकिन इतना तो तय है कि देवेंद्र फडणवीस केंद्र की मोदी सरकार का हिस्सा कभी भी बन सकते हैं।
अगस्त माह में भाजपा के दो कद्दावर नेता सुषमा स्वराज तथा अरुण जेटली के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र नेताओं की कमी को ध्यान में रखते हुए देवेंद्र फडणवीस को दिल्ली बुलाने की रणनीति भाजपा के शीर्ष नेताओं ने बनायी है। देवेंद्र फडणवीस अगर राज्य की राजनीति छोड़कर केंद्र की राजनीति में सक्रिय हुए तो उनका नाम भी उन नेताओं की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन नेताओं ने महाराष्ट्र की सत्ता की पारी खेलकर केंद्र की सत्ता की भी पारी खेली है। सुधाकर राव नाईक के बाद पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले दूसरे नेता बने देवेंद्र फडणवीस का नाम प्रधानमंत्री के विश्वासपात्र नेताओं की सूची में शामिल है। प्रधानमंत्री की इच्छा के कारण ही वरिष्ठता क्रम में काफी नीचे होने के बावजूद फडणवीस को 2014 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया। उस वक्त महाराष्ट्र भाजपा के कई कद्दावर नेता प्रधानमंत्री के इस फैसले से खासे नाराज हुए थे।
इसे लेकर राज्य की राजनीति में काफी खींचतान भी हुई। राज्य की राजनीति में रस रखने वाले गोपीनाथ मुंडे को जब भाजपा ने लोकसभा चुनाव में उतारने की तैयारी की थी, उस वक्त उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ने का विरोध किया था। लेकिन तत्कालीन कुछ नेताओं के समझाने के बाद गोपीनाथ मुंडे लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गए और बीड से सांसद भी चुने गए।
लेकिन शपथ ग्रहण के बाद दिल्ली में कार दुघर्टना में उनकी मौत हो गई। गौर करें तो राज्य की राजनीति में लंबा अरसा व्यतीत करने वाले नेताओं ने कभी मन से केंद्र की राजनीति में जाने का मन नहीं बनाया। चाहे वे शरद पवार हों, विलासराव देशमुख हो या फिर भाजपा के वर्तमान राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे हो। कहा तो यह भी जा रहा है कि राज्य के पूर्व राजस्व मंत्री तथा वरिष्ठ भाजपा नेता एकनाथ खड़से को भी दिल्ली भेजने की तैयारी की जा रही है। इस बीच यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि अगर देवेंद्र फडणवीस केंद्र की राजनीति का हिस्सा बने तो फिर राज्य की कमान किसे सौंपी जाएगी। नाम तो कई हैं। क्या वर्तमान राजस्व मंत्री तथा महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल की मुख्यमंत्री के रूप में ताजपोशी की जा सकती है। फडणवीस सरकार के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, परिवार तथा बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे के अलावा विनोद तावडे का नाम उस वक्त भी मुख्यमंत्री के लिए चर्चाओं में आया था। ये नाम फिर से चर्चाओं में आ सकते हैं।
लेकिन देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सबसे प्रबल दावा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का ही माना जा रहा है। कुछ राजनीतिक जानकारों का यह भी दावा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कमान सौंपी जा सकती है। नितिन गडकरी एक ऐसा नाम है, जिनका बतौर मुख्यमंत्री कोई विरोध नहीं करेगा। गडकरी के स्वास्थ्य के मद्देनजर अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उनके नाम पर मुहर लगाकर मुख्यमंत्री की कमान संभालने का आग्रह करे, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। हालांकि नितिन गडकरी केंद्र की मोदी सरकार के टॉप नेताओं में शुमार हैं, इसलिए उनको महाराष्ट्र भेजे जाने की संभावना बहुत कम है।


 
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