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घाटी में सुरक्षाबलों की तैनाती का विरोध क्यों?

01/08/2019

रमेश गुप्ता
पिछले कुछ दिनों से जम्मू कश्मीर का माहौल गरमाया हुआ है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के जम्मू कश्मीर के दौरे को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। कुछ लोग इसे अमरनाथ यात्रा से जोड़कर देख रहे हैं तो कुछ इसे अनुच्छेद 35ए को हटाने को लेकर की जा रही तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं। इससे राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। महबूबा मुफ्ती तथा उमर अब्दुल्ला इसे राजनीतिक नफा-नुकसान से जोड़कर देख रहे हैं। अनुच्छेद 35ए का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें कोई छेड़खानी नहीं कर सकता। फिर भी अपनी खोई साख को बचाने के लिए पीडीपी और नेशनल कान्फ्रेंस द्वारा हल्ला किया जा रहा है। कुछ का कहना है कि अमरनाथ यात्रा की सफलता से अलगाववादी ताकतें घबरा गई हैं। अभी तक लगभग साढ़े तीन लाख लोग बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि आतंकी किसी बडे़ हमले के फिराक में हैं। उनकी साजिशों को नाकाम करने के लिए ही घाटी में सुरक्षा बल भेजे जा रहे हैं।
पिछले दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अचानक श्रीनगर पहुंचकर सुरक्षा अधिकारियों के साथ राज्य की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने जम्मू कश्मीर राज्य में 10 हजार अर्द्ध सैनिक बल भेजने का निर्णय लिया। इनमें से केन्द्रीय सुरक्षाबल की 50 कम्पनियां, सीमा सुरक्षाबल की 10, एसएसबी की 30 तथा भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस बल की 10 कम्पनियां हैं। इनमें दो कम्पनियां लेह में तथा शेष कंपनियां कश्मीर घाटी में तैनात की जाएंगी। इतने अधिक सुरक्षाबल किसलिए तैनात किए जा रहे हैं, इसको लेकर प्रदेशभर में हड़कम्प मचा है। रविवार 28 जुलाई को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पी.डी.पी) का 20वां स्थापना दिवस था। उसमें पार्टी की अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कार्यकर्ताओें को संबोधित करते हुए कहा कि यहां पर जो सुरक्षाबल तैनात किए जा रहे हैं, वह इसलिए तैनात किए जा रहे हैं ताकि राज्य से अनुच्छेद 35ए समाप्त किया जा सके। उसके परिणामों से निपटने के लिए इतने सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी तक दे डाली कि इसके परिणाम गंभीर होंगे तथा घाटी में आग लग जाएगी। अनुच्छेद 35ए को जम्मू व लद्दाख के निवासी समाप्त करना चाहते हैं परंतु पीडीपी व नेशनल कान्फ्रेंस इसका विरोध कर रहे हैं। एक - दूसरे की घोर विरोधी रही महबूबा ने तो डॉक्टर फारूख अब्दुल्ला से सभी विपक्षी पार्टियों की बैठक बुलाने को भी कहा है। अनुच्छेद 35ए के अंतर्गत इस राज्य में न तो देश के अन्य भाग के लोग जमीन-जायदाद खरीद सकते हैं, न ही यहां नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। यहां की बेटियां यदि बाहरी राज्य के किसी व्यक्ति से शादी कर लेती हैं तो उनका यहां की अचल सम्पति से अधिकार समाप्त हो जाता है। जम्मू- कश्मीर की सीमा के पास बसे कठुआ जिले व जम्मू जिले में बहुत से ऐसे परिवार हैं जिन्होंने पंजाब में अपनी बेटियों की शादियां की हुई हैं। इसके अतिरिक्त दिल्ली व अन्य राज्यों में भी बेटियों की शादियां हैं। इससे वह यहां के सभी अधिकारों से वंचित हो गई हैं। सरकार पर इसको समाप्त करने का दबाव पड़ता जा रहता है। पीडीपी व नेशनल कान्फ्रेंस का कहना है कि इससे भौगोलिक स्थिति में परिवर्तन होगा। बाहर के लोग यहां पर आकर बस जाएंगे। इससे यहां के लोगों का रोजगार व जायदाद प्रभावित होगा। यह दोनों दल इसे समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें यही डर है कि जो अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए जा रहे हैं वह इसीलिए किए जा रहे हैं। 
एक और धारणा यह भी है कि राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। गत लोकसभा चुनावों में कश्मीर घाटी में 12 प्रतिशत लगभग ही मतदान हुआ था। आतंकवादियों के डर से लोग मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच सके थे। विधानसभा चुनावों का भी कुछ ऐसा ही हश्र न हो, क्योंकि आतंकवादी ताकतें ऐसे समय में जनता पर हावी हो जाती हैं। ऐसे में 10 से 25 प्रतिशत ही मतदान की संभावना रहती है। ऐसे में सुरक्षाबलों की तैनाती करके आतंकवादियों का सफाया करके लोगों में विश्वास बहाल करना भी है। बताया जाता है कि राज्य में 250 के लगभग आतंकी अभी भी सक्रिय हैं। इसके अलावा ओवर ग्राउंड वर्कर जो कि आतंकवादियों की हर प्रकार की सहायता करते हैं, उन्हें शरण देते हैं, हथियार उपलब्ध कराते हैं, उनकी संख्या 15 हजार के लगभग बताई जाती है। सरकार व प्रशासन आतंकवादियों से ज्यादा इनसे परेशान है। कहा जाता है कि अब ऐसी ताकतों को भी पकड़ने का अभियान चलाया जा सकता है।
वर्ष 2019 में अभी तक 105 आतंकवादी घटनाएं हुई जिनमें 24 आम लोगों ने जान गंवाई। इनमें सुरक्षाबलों के 74 जवान शहीद हुए जबकि 133 आतंकवादी मारे गए। वर्ष 2018 में आतंक की 205 घटनाएं हुई जिनमें  271 आतंकवादी मारे गए जबकि 86 आम लोग तथा 95 सुरक्षाबलों के जवान शहीद हुए थे। सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए अभियानों में 12,575 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। यह सिलसिला अभी जारी है। अभी तक 4793 आम लोग व 3423 सुरक्षाबलों व सेना के जवान शहीद हुए हैं। इस वर्ष सबसे बड़ी घटना 14 फरवरी 2019 को हुई थी जब 40 सीआरपीएफ के जवान आत्मघाती हमले में मारे गए थे। उसके उपरांत केंद्र सरकार ने काफी सख्त कदम उठाए तथा आतंकवादियों के विरूद्ध अभियानों में तेजी लाने के साथ-साथ पाकिस्तान में स्थित बालाकोट में आतंकवाद के आकांओं पर बड़ी कार्रवाई की थी, जिसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे। 
राज्य में हालात को सामान्य करने में केंद्र सरकार व राज्यपाल बड़ी तेजी से काम कर रहे हैं। इसके लिए आतंकवादियों के खिलाफ शिकंजा कसने के साथ-साथ राजनीतिक गतिविधियों में भी तेजी लाई गई है। 29 जुलाई को राज्य के भाजपा नेताओं की दिल्ली में कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बैठक ली उसमें आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। जम्मू कश्मीर में विपक्ष के साथ-साथ राज्य के भाजपा नेता भी विधानसभा चुनाव जल्द से जल्द करवाने के पक्ष में हैं। इसी से कयास लगाए जा रहे हैं कि अमरनाथ यात्रा के उपरांत किसी भी समय विधानसभा चुनावों का बिगुल बज सकता है। इसीलिए सभी राजनीतिक पार्टियां अभी से तैयारियों में जुट गई हैं।  
(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से सम्बद्ध हैं।)


 
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