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मेरे लिए हर प्रतिभाशाली जरूरतमंद दलित: आनंद कुमार

11/08/2019

मेरे लिए हर प्रतिभाशाली जरूरतमंद दलित: आनंद कुमार 

-राजस्थान सरकार ने दिया है भरोसा, यहां भी होगा सुपर-30 
-सिर्फ जमीन आवंटन में सरकार का सहयोग चाहते हैं आनंद 
-कुछ नहीं, बल्कि कई ज्यादा आनंद कुमारों की है जरूरत 

-सुनीता कौशल 
उदयपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। गरीब और जरूरतमंद की कोई जाति नहीं होती। मेरे सुपर-30 में भी जाति को लेकर कोई भेदभाव नहीं होता। मैं आरक्षण के सम्बंध में कोई टिप्पणी नहीं करता, न ही जरूरतमंदों को उस दृष्टि से देखता हूं। मेरे यहां हर जरूरतमंद दलित है। मेरे यहां उन प्रतिभाशाली बच्चों को प्रवेश मिलता है जो वास्तव में परिस्थितियों से जूझ रहे हैं और जरूरतमंद हैं बशर्ते वे इंजीनियरिंग के लिए पैशन और इनोवेटिव माइंड रखते हों। उनके मन में यह भाव भी हो कि वे भी आगे जाकर ऐसे ही जरूरतमंदों के सहयोगी बन सकेंगे। इसीलिए मेरे यहां हर बैच में ऐसे बच्चे मिल जाएंगे जो अनारक्षित वर्ग से हैं, लेकिन मेरे लिए वे जरूरतमंद और होनहार हैं। 

यह बात सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार ने उदयपुर में 'हिन्दुस्थान समाचार' से ख़ास बातचीत में कही। वे यहां एक संस्था की ओर से आयोजित ग्लोबल एजुकेटर्स फेस्ट-2019 में बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत करने आए थे। उन्होंने बताया कि सुपर-30 पर आधारित फिल्म रिलीज होने के बाद हर जगह से सहयोग का आग्रह मिल रहा है, लेकिन वे सिर्फ जमीन के लिए सरकारों से सहयोग लेने की भावना रखते हैं क्योंकि आज तक उन्होंने बच्चों के भोजन तक के लिए भी किसी का सहयोग नहीं लिया। चूंकि जमीन महंगी होती है, इतनी क्षमता सुपर-30 में नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात के बाद राजस्थान में भी शीघ्र ही सुपर-30 की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया है। 

आनंद कुमार शीघ्र ही छठी कक्षा से 12वीं तक का आवासीय विद्यालय स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस अब तक योजना है, इससे आगे कुछ नहीं। विजन तैयार है, धरातल पर स्थापित करने के लिए धीरे-धीरे प्रयास चल रहे हैं। सुपर-30 फिल्म के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अब तक की फिल्मों में बिहार का नकारात्मक चित्रण सामने आता रहा है, यह ऐसी फिल्म है जिसने सकारात्मक तस्वीर पेश की है। साथ ही उन्होंने यह भी जिक्र किया कि नीतीश कुमार के आने के बाद बिहार में सुधार भी हुआ है। उन्होंने कहा कि फिल्म के बाद कई लोगों के फीडबैक प्राप्त हुए। एक पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने मोबाइल छोड़ किताबें पढ़ने में रुचि बना ली। इससे अच्छा फीडबैक क्या हो सकता है। अभिभावकों से वे आग्रह करेंगे कि वे बच्चों पर अपने सपने न थोपें। अलग-अलग विधाओं में जाने के लिए हर वक्त प्रोत्साहित करें। बच्चे को जो पसंद है उसे पूरे पैशन के साथ करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने शिक्षकों को भी बच्चों का दोस्त बनने का आग्रह किया ताकि बच्चे अपने मन की बात उन्हें बता सकें। इससे शिक्षकों को बच्चे के आगे की दिशा तय करने में आसानी होगी। 

कोटा के कोचिंग उद्योग से छात्रों पर बढ़ रहे प्रेशर के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोटा कोचिंग का बाजार है, उन्हें पैसे से मतलब है। आप पैसा खर्च करने की ताकत रखते हैं तो आपके बच्चे को रटा-रटा कर इंजीनियरिंग में भेज ही दिया जाएगा। मल्टीपल चॉइस के प्रश्नों को लगातार हल करवाकर माइंड सेट कर दिया जाता है। वहां से व्यावहारिक ज्ञान कोसों दूर है। वहां जीवन की शिक्षा नहीं मिलती। ऐसे में जब बच्चे के सामने आगे जाकर कोई चुनौती आती है तो वह खुद को असहाय महसूस करने लगता है और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। 

आनंद कुमार प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन की प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन चाहते हैं। वे कहते हैं कि सरकार को प्रश्नपत्र 12वीं कक्षा तक के सिलेबस के आधार पर रखने होंगे साथ ही उनमें बच्चे के इनोवेटिव माइंड को परखने के प्रश्न भी शामिल करने होंगे। रटे-रटाए फार्मूलों पर प्रश्नपत्र हल करने वाले आगे जाकर अच्छे इनोवेटर होंगे, यह गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे दूसरा बड़ा फायदा यह होगा कि स्कूल के सिलेबस और कॉम्पिटीशन के सिलेबस की खाई और बीच में कोचिंग सेंटर्स की मजबूरी को भी पाटा जा सकेगा। 
उन्होंने राजस्थान के बच्चों के लिए संदेश दिया कि वे चाहें तो सुपर-30 की वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर लें, राजस्थान में शीघ्र ही टेस्ट होगा। उन्होंने यह भी बताया कि वे अपनी कक्षाओं को ऑनलाइन क्लास की तरह यू-ट्यूब पर भी लाएंगे। 

'आपके बाद कितने आनंद कुमार तैयार हुए, बातचीत के आखिरी सवाल पर उन्होंने कहा, कुछ हुए हैं जो अपने-अपने तरीकों से जरूरतमंद प्रतिभाशाली बच्चों के सहयोगी बन रहे हैं, लेकिन और ज्यादा आनंद कुमारों की जरूरत है। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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