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जनता ने कामयाब किया ‘जनता कर्फ्यू’

23/03/2020

योगेश कुमार सोनी

क्या शानदार नजारा था। कोई शंख बजा रहा था तो कोई पीट रहा थाल, ताली बजाते हुए पूरे देश का था एक जैसा हाल। ऐसा नजारा भारत में पहली बार देखने को मिला। एकजुटता के प्रतीक बने ऐसे दृश्य दिल को सूकून पहुंचाने वाले लग रहे थे। इससे पहले इस तरह के विडियो और चित्र केवल विदेशों से ही आते थे। कुछ लोगों ने तो हनुमान चालीसा पढ़ी तो कुछ भजन गा रहे थे। देशवासियों का एक सुर में अपने घरों के छज्जों में बाहर निकलकर ऐसा प्रर्दशन इस बात की गवाही बन गया कि हम धागे में पिरोए एक जैसे मोती हैं।

विश्व को प्रभावित करने वाले कोरोना वायरस की रफ्तार तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर देश की जनता ने उसपर अमल करते हुए बिना किसी प्रतिबंध के स्वयं पर कर्फ्यू लगाकर साबित कर दिया कि हमारा देश एक समझदार मुखिया के हाथ में हैं। हालांकि कुछ लोगों ने इसमे विघ्न डालने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। जैसा कि हमारे देश में विपक्ष हर बात को लेकर विरोध करना अपना धर्म, फर्ज और कर्तव्य समझता है तो उसने बहुत कुछ करने का प्रयास किया लेकिन जनता ने उनकी एक नहीं सुनी। इसके अलावा कुछ घटिया सोच वालों ने जनता कर्फ्यू का मजाक तक बनाया।

प्रधानमंत्री ने कुछ पेशे में कार्यरत लोगों के सम्मान के लिए कहा था कि स्वास्थ्यकर्मियों, दूध, अखबार, राशन पहुंचाने वालों, पुलिसकर्मियों और पत्रकारों का आभार जताने के लिए शंख, ताली, घंटा-थाली बजाएं, जिसे देशवासियों ने बखूबी निभाया। सभी ने एक सकारात्मक ऊर्जा के साथ योगदान दिया। साथ ही जब इसपर डॉक्टरों, योग और आयुर्वेद के जानकारों ने इसके कई फायदे बताए, जिससे लगा कि यह काम हम रोज करें। यदि ताली बजाने के संदर्भ में बात करें तो ताली बजाने से प्रेशर प्वाइंट्स दबने से लंग्स को फायदा मिलता है। हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स अधिक होते हैं, जिससे ताली बजाने के दौरान हथेलियों के इनपर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे हृदय और फेफड़ों की बीमारियां दूर होती हैं। अब शंख बजाने की बात करें तो इसका मानव युग के साथ ही जन्म हुआ था। शंख की उपस्थिति हर युग में देखी गयी और आज भी पूजा पाठ के इसका प्रयोग होता है। इस यंत्र के बारे में डॉक्टरों का भी कहना है कि शंख बजाने से फेफड़ों, त्वचा, हड्डियों, आंखों, बालों के अलावा हृदय रोग में फायदा होता है। शंख मस्तक से लेकर पैरों तक को प्रभावित करता है। घंटी और थाली बजाने से किसी मुहिम से जुड़ने के लिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराना माना जाता है, जिससे व्यक्ति में सामूहिकता की अद्भुत ऊर्जा आ जाती है। स्वाभाविक है कि यदि किसी के योगदान की आप सराहाना करते हैं तो उसे अच्छा लगता है। यदि आप को ज्ञात हो कि कुछ समय पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि जहां भी देश का जवान दिखे उसके सम्मान में ताली बजाना। इसके बाद लोगों ने इस मुहिम को अपनाया तो देश की हर सैन्यकर्मी का हौसला बढ़ने लगा। इससे जनता के मन में हमारे देश के जवानों के प्रति सम्मान भी बढ़ा और जवानों में भी अच्छा एहसास होता है।

बहराहल, इस कर्फ्यू में हर किसी की भागीदारी प्रशसंनीय है क्योंकि आम से लेकर खास ने इसपर अमल किया। कोरोना जैसे घातक वायरस से पूरा विश्व प्रभावित है और हमारे लिए अच्छी खबर यह है कि शासन-प्रशासन द्वारा दी गई गाइडलाइन पर अमल करते हुए हमारा देश इससे इतना प्रभावित नहीं हुआ जितने विश्व के अन्य देश हुए हैं। यदि कुछ देशों की बात करें तो एक ही दिन में पांच सौ से ज्यादा मौतें हुई हैं जबकि हमारा देश अधिक जनसंख्या वाला देश है और हम अभी स्टेज टू की स्थिति में हैं। जाहिर है कि थोड़ी सावधानी और बरत गए तो हम जल्द ही इसपर विजय प्राप्त कर लेंगे।

हमें एक बात में अधिक सर्तकता बरतनी होगी कि सोशल मीडिया पर कुछ शरारती तत्व सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।आपकी इच्छाशक्ति ही आपको जीतने की राह बताती है। यदि कोई काम मानव जीवन सुरक्षित करने के लिए हो तो उसमें भागीदारी जरूर निभानी चाहिए क्योंकि यह किसी अकेले की नहीं पूरे देश और दुनिया को सुरक्षित करने वाला कदम है। कोरोना वॉयरस हमारे देश को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाया, जिसके लिए डब्लूएचओ ने हमारी सरकार और देशवासियों की प्रशंसा की है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)


 
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