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कोराना संकट और सनातन संस्कृति

20/03/2020

बिपिन सेमवाल
चीन से योजनाबद्ध तरीके से उत्पादित कोविड- 19 संक्रमक है मगर वायु में फैलने वाला माइक्रो वाइरस नहीं। चीन में जानवर, कीट, पतंग, स्तनधारी, सरीसृप सभी प्रजातियों को जिंदा ही बड़े चाव से खाया जाता है। दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कृति मानव इतना इतना स्वार्थी कि यह विस्मृत कर गया कि जल, थल तथा वायु में उत्पन्न समस्त प्राणियों का उतना ही अधिकार इस लोक पर है, जितना मानव का। लेकिन अपनी शक्ति, बुद्धि और बल के दर्प में चूर मानव समय-समय पर डार्विनवाद की परिकल्पना योग्यतम की उत्तरजीविता के अनुरूप कार्य करते हुये अस्तित्वहीन प्राणियों का जघन्य वध करता रहा। इसी वाद में अस्तित्व के लिये संघर्ष का जिक्र भी जरूरी है। अस्तित्व उसी का बरकरार रहेगा, जिसका अपना वजूद होगा।
चीन आर्थिक रूप से मजबूत ही नहीं बल्कि विकास के क्रम में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर आता है। लेकिन प्रदूषण का खतरा यहां उतना ही ज्यादा है। एक खबर के अनुसार चीन के शहर बीजिंग में इतना अधिक प्रदूषण है कि एक व्यक्ति एकदिन में उतना ही प्रदूषित होेता है, जितना एक नशेड़ी एकदिन में 32 सिगरेट पीने से प्रदूषित होता है। एक अपुष्ट खबर के अनुसार चीन ने कई वर्षों पहले इस वायरस की खोज की थी ताकि लगातार बढ़ती जनसंख्या को कम करने के लिये इस वायरस का समय पर उपयोग किया जाये, लेकिन वक्त से पूर्व ही इसका प्रादुर्भाव हो गया। लेकिन थोड़ी सावधानी रखी जाये तो इस वायरस से स्वयं को बचाया जा सकता है। वर्ष 1981में डीन कोन्ट्ज द्वारा प्रकाशित द आईस ऑफ डार्कनेस में बताया गया कि चीन के बुहान शहर में सबसे छुपाकर कोरोना निर्मित किया था।
बहरहाल सनातनी और हिन्दू संस्कृति की वेद ऋचाओं, उपनिषदों तथा शास्त्रों में ऐसे-ऐसे श्लोक या पूजन विधियां वर्णित हैं, जिसको आचरण में लाते ही आध्यात्मिक रूप से व्यक्ति सक्षम ही नहीं होता है, अपितु अनाम बीमारियों से लड़ने की क्षमता हमारे शरीर में समाविष्ट होती है। कोरोना वाइरस मुख्यतः उन देशों में फैलता है, जहां मांस मुख्य भोजन है। मांस में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के हानिकारक तत्व न केवल पाचक अंगों को क्षतिग्रस्त करते हैं, बल्कि श्वांस नली को भी संक्रमित करते हैं। जिस कारण मानव को कई गंभीर बीमारियां घेर लेती हैं, जिसमें प्रतिश्याय, कास तथा दमा मुख्य है। इस बात की घोषणा हजारों वर्ष पूर्व हमारे शास्त्रों ने कर दी थी। सुश्रुत संहिता सूत्र स्थान मांस वर्ग 127/128 के अनुसार,

अरोचकं प्रतिश्याय गुरू शुष्कं प्रकीत्र्तितम्, विषव्याधि हतं मृत्युं बालं छर्दिच्च कोपयेत्।।
कास श्वासकरं वृद्धं त्रिदोषं व्याधिदूषितम्, किन्नमुत्क्लेशजननं कृतं वातप्रकोपणम्।।

अर्थात् मांस भक्षण अरूचिजनक, प्रतिश्यायकर, दर्दनाशक होता है, साथ ही यह अन्य लोगों में भी फैलकर मौसम प्रदूषित करता है। कोविड-19 की घातकता का दर 23 फीसद है। यह 2003 में फैले सार्क घातक दर 10 फीसद तथा 2012 में सामने आये मेर्स घातक दर 35 फीसद से बेहद कम है। 
हिन्दू संस्कृति सनातनी संस्कृति कहलाती हैं। हवन, यज्ञ, पंचगव्य को हमारे शास्त्रों में मुख्य पूजा बताई गयी है। जौं, तिल, अगर, जटामासी तथा घी का हवन करने से वायुमंडल में व्याप्त हानिकारक वाइरसों का विनाश ही नहीं होता है, बल्कि मानव का शरीर तथा आंतरिक मांसपेशियां भी संतृप्त रहती हैं। हमारी संस्कृति में खाना खाने, पूजा करने तथा सोने से पूर्व हाथ-पैर धोने का विधान है। पूर्व काल में महिलायें घूंघट रखती थी। योग का इतिहास तो हमारे ऋषि-मुनि तथा मनीषियों का समकालीन है। कपाल भाति की क्रिया श्वास से सम्बन्धित है। बीपी, अनिद्रा, शुगर आदि की समस्या को दूर करने के लिये कपाल भाति की क्रिया को सर्वोपरि माना गया है। योग कहता है कि कपाल भाति करने के दौरान श्वांस रोकने से अंदर घुस रहा हानिकारक वाइरस मर जाता है। हिन्दू संस्कृति में सूर्य नमस्कार का विधान बताया गया है। सूर्य नमस्कार की क्रिया में अर्घ्य देते जल की धार सेे सूर्य को अपलक देखना होता है, पुनः झुककर प्रणाम की मुद्रा में सूर्य को प्रणाम करना होता है, इस क्रिया से सूर्य की प्रातःकालीन किरणों का नंगी आंखों से देखने पर विटामिन डी के साथ-साथ बीपी नियंत्रित होता है। सूर्य के प्रकाश को अपलक निहारने पर चेहरे पर अदृश्य वाइरस मर जाते हैं।
भारत वर्ष में तीन सप्ताहों में 175 से अधिक कोरोना संक्रमण पोजेटिव पाये गये हैं। जबकि भारत की जनसंख्या चीन के बाद दूसरे स्थान पर है और चीन के करीब ही यह देश भी है। लेकिन भारतीय संस्कृति में रचे-बसे हिन्दुओं तथा पुराण शास्त्रों की देव ऋचाओं पर भरोसा करने वाले व्यक्ति की कोरोना को करो ना है। अभी भी वक्त है, हिन्दुओं का अपने बच्चों को इन पुराणों धर्मशास्त्रों के बारे में अवगत कराना चाहिये। गीता के ज्ञान, गायत्री मंत्र के जाप के साथ साथ नवग्रहों के बीज मंत्रों का जाप करने से मानवों की समस्त शाररिक तथा मानसिक समस्या दूर होती है।
(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)


 
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