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हम ही नहीं पूरी दुनियां में हैं श्रीराम के वंशज : दीयाकुमारी

11/08/2019

ईश्वर वैरागी
जयपुर, 11 अगस्त (हि.स.) । जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम का वंशज होने का दावा किया गया है। पूर्व राजपरिवार की सदस्य एवं राजसमंद से भाजपा सांसद दीया कुमारी ने दस्तावेजों के आधार पर दावा किया है कि जयपुर राजपरिवार की गद्दी भगवान श्रीराम के पुत्र कुश के वंशजों की राजधानी है। उन्होंने कहा कि हम ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में श्रीराम के वंशज मौजूद हैं।
दीयाकुमारी ने दावा किया कि हम भगवान श्रीराम के वंशज हैं। सबूत के तौर उन्होंने रविवार को मीडिया के सामने प्रमाण भी साझा किए। उन्होंने एक पत्रावली दिखाई है, जिसमें भगवान श्रीराम के वंश के सभी पूर्वजों का क्रमवार उल्लेख है। इसी में 289वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में महाराजा भवानी सिंह का नाम दर्ज है। इसके अलावा अयोध्या से जुड़े नक्शे भी पोथीखाने में उपलब्ध हैं। इनमें श्रीराम जन्मभूमि पर कछवाह/कुशवाह के अधिकार के प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि वंश का मुद्दा राममंदिर निर्माण में बाधा पैदा करे। श्रीराम सबकी आस्था के प्रतीक हैं।
जयपुर सिटी पैलेस के संग्रहालय के पोथीखाने में उपलब्ध नौ दस्तावेज और दो नक्शे साबित करते हैं कि अयोध्या के जयसिंहपुरा व श्रीराम जन्मस्थान सवाई जयसिंह द्वितीय के अधिकार में थे। राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास एवं भारतीय संस्कृति के पूर्व विभागध्यक्ष और पुरातत्वेता प्रो. आर नाथ ने भी इस विषय पर लंबा शोध किया था। उन्होंने प्रमाणित किया था कि अयोध्या में पहले से ही मंदिर था, जिसे कई बार तोड़ा गया और कई बार बनाया भी गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने उत्खनन में भी इसे प्रमाणित किया है। इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि अयोध्या में जहां राममंदिर है, वह भूमि जयपुर के सवाई राजा जयसिंह की है। उन्होंने ही अंतिम मंदिर (1717-1725 ई.) के बीच बनवाया था। इसे 18वीं शताब्दी तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी मान्यता दी थी। औरंगजेब ने मथुरा, वुंदावन, प्रयागराज, बनारस, उज्जैन और गया में मंदिर तोड़े थे। इन सभी मंदिरों और आसपास की भूमि को सवाई राजा जयसिंह ने खरीदा और वहां मंदिर बनवाए। इस क्षेत्र का नाम जयसिंह घेरा अथवा जयसिंह पुरा रखा।  
1776 ई. में नवाब वजीर असफ उद्दौला ने राजा भवानी सिंह को हुक्म दिया था कि अयोध्या और इलाहबाद स्थित जयसिंहपुरा में कोई दखल नहीं दिया जाएगा। ये जमीनें हमेशा कच्छवाहा के अधिकार में रहेंगी। 
सिटी पैलेस के ओएसडी रामू रामदेव ने बताया कि कच्छवाहा वंश को भगवान राम के बड़े बेटे कुश के नाम पर कुशवाहा वंश भी कहा जाता है। राज घराने की वंशावली के मुताबिक 62वें वंशज राजा दशरथ, 63वें वंशज श्रीराम, 64वें वंशज कुश थे। 289वें वंशज आमेर-जयपुर के सवाई जयसिंह, ईश्वरी सिंह, सवाई माधोसिंह और पृथ्वी सिंह रहे। भवानी सिंह 307वें वंशज थे।
दीयाकुमारी ने कहा कि हम सभी चाहते हैं राम मंदिर जल्द से जल्द बने। इस काम में देरी नहीं होनी चाहिए। जब सुप्रीम कोर्ट ने भगवान श्रीराम के वंशज के बारे पूछा तो मैंने अपनी बात रखी। यह मेरा व्यकितगत मत था, जो मैंने व्यक्त किया। हम राम के वंशज हैं तो हमें अपनी बात बोलनी चाहिए। मैं इस विषय में कानूनी दांवपेंच में नहीं जाना चाहती, ना ही इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देना चाहती हूं। श्रीराम जन्मभूमि मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई हो रही है। इसलिए हम इसमें अपनी ओर से हस्तक्षेप नहीं करेंगे। हम सभी की इच्छा है कि जल्द से जल्द भव्य राममंदिर बने। उन्होंने दावा किया कि श्रीराम जन्मभूमि के संबंध में महाराजा सवाई जयसिंह के समय का नक्शा 1992 में हमनें कोर्ट को उपलब्ध करवाया था। हमारे पोथीखाने में उपलब्ध दस्तावेज यदि कोर्ट मांगेगा तो हम उपलब्ध करवाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारी वंशावली श्रीराम के बेटे कुश से शुरू होती है। हम बचपन से सुनते आए हैं। मेरे लिए यह नई बात नहीं है। जब सप्रीम कोर्ट ने यह पूछा कि कौन हैं राम के वंशज तो मेरे अंदर से आवाज निकली की हम भी हैं राम के वंशज। इस पर हमें गर्व है। श्रीराम के वंशज हमारे अलावा और भी है और पूरी दुनियां में हैं। इसे हमें राजनीति के चश्में से नहीं देखना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर नियमित सुनवाई चल रही है। नौ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के एक जज ने रामलला की पैरवी कर रहे वकील से पूछा था कि क्या भगवान श्रीराम के वंशज इस दुनियां में हैं? इस पर वकील ने जानकारी नहीं होने की बात कही थी। इसके बाद दीयाकुमारी ने इस संबंध में ट्विट कर यह दावा किया था। उन्होंने इस बारे में रविवार को भी कुछ चुनिंदा मीडियाकर्मियों से बातचीत की।
हिन्दुस्थान समाचार


 
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