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प्रकृति और मानव को संतुलित रखता है यज्ञ : महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी

10/10/2019

जितेन्द्र तिवारी
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (हि.स.)। लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर) में इन दिनों छह दिवसीय चतुर्वेद स्वाहाकार महायज्ञ चल रहा है। नौ अक्टूबर से प्रारंभ हुए इस महायज्ञ का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद्, झंडेवाला मंदिर सोसायटी एवं अशोक सिंघल फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। छह दिनों तक दोनों सत्रों में प्रातः नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम को पांच बजे से रात्रि आठ बजे तक चारों वेदों का अलग-अलग यज्ञ कुंडों पर उच्चारण होगा, वेद मंत्र कंठस्थ वेदपाठी, विद्वानों द्वारा अलग-अलग यज्ञ कुंडों में शुद्ध सस्वर उच्चारण करते हुए उन्होंने यज्ञ में आहुति दी जाएगी। 14 अक्टूबर को प्रातः पूर्णाहुति संपन्न होगी। 
महायज्ञ में आए जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी ने इस महायज्ञ के उद्देश्य बताते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण विश्व में वैमनस्यता बढ़ रही है, प्रकृति में प्रतिकूलता बढ़ रही है तो हम ऐसा मानते हैं कि यज्ञ के माध्यम से धरती, अम्बर, अग्नि, जल, वायु, निहारिका, नक्षत्रों का संतुलन बनेगा और प्राणियों में सद्भावना आती है। यज्ञ से उन्माद शिथिल होता है, उत्तेजना शिथिल होती है। यज्ञ के माध्यम से वो हारमोन-कैमिकल्स डेवलप होते हैं जो व्यक्ति को सहज, स्वाभाविक, नैसर्गिक, प्रकृतिक और संयमित रखते हैं अतः उसे अत्यंत संतुलित करते हैं। यज्ञ से पाचक रस सहज बनते हैं। यज्ञ के परिणाम यह भी देखे गए कि समूची प्रकृति में एकता आ जाती है, एकरुपता आ जाती है। यज्ञ सब के कल्याण की चीज है 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयः' तो सबका आनन्द हो, सबके स्वाभिमान सम्मान की रक्षा हो।
विश्व हिन्दू परिषद की प्रबन्ध समिति के सदस्य दिनेश चन्द्र ने बताया कि विश्व के कल्याण के लिए यह यज्ञ है। वेद के विषय में अनेक भ्रांतियां फैली हैं जैसे महिलाएं वेद नहीं पढ़-सुन नहीं सकतीं, कोई विशेष वर्ग नहीं सुन सकता यह सच नहीं है। वेद के बारे में फैले भ्रम इत्यादि दूर हो इसलिए दिल्ली में ऐसा महायज्ञ पहली बार हो रहा है। सामाजिक समरसता की दृष्टि से भी यह ऐतिहासिक है, इसमें झुग्गियों से लेकर महलों तक रहने वाले विभिन्न समाज नेता, धर्म नेता, राज नेता, सभी को बुला रहे हैं वे सब आ रहे हैं। दक्षिण के 61 आचार्य यहां आए हुए हैं जिनको वेद कंठस्थ हैं। घनपाठी विद्वान आए हैं जो शुरू से जो वाक्य पढ़ा उसे उसी स्वर में विपरीत दिशा में भी उसको उसी रूप में बोल सकते हैं ऐसे वर्षों में तैयार होने वाले घनपाठी विद्वान भी यहां आए हैं।
इस महायज्ञ में यजमान के नाते महेश भागचंदका व उनका परिवार, विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर जी, विश्व हिन्दू परिषद से दिनेश चन्द्र जी एवं अनिल सिंहल का परिवार, कोहली टेंट के कीमती लाल धर्म पत्नी, पुत्र एवं पुत्र वधु सहित उपस्थित थे। आज महायज्ञ में आए संतों में बृज के कार्ष्णि शरनानंदजी जी महाराज रमण रीति मथुरा, जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य अवधेशानंद गिरी जी, पूज्य दीदी मां ऋतम्भरा जी के गुरु युगपुरुष परमानन्द जी महाराज, वृंदावन से चार सम्प्रदाय के परम पूज्य फुलडोलदास जी महाराज, वृंदावन से ही चित्र प्रकाशानंद जी महाराज, नेपाल से पूज्य गुरु कर्माचार्य जी, पंजाब से रमेश शास्त्री जी महाराज, महामंडलेश्वर पूज्य ज्योर्तिमयानंद जी महाराज, उदासीन आश्रम पहाड़गंज के स्वामी राघवानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी अमृतानन्द जी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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