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कोरोनाः मोदी के सन्देश का वैश्विक महत्व

20/03/2020

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
करोना विश्वव्यापी संकट है। इससे प्रभावित देश अपने-अपने तरीके से इस महामारी से बचाव का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका सहित कई देशों ने राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया है। इधर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकसाथ तीन मोर्चों पर कार्य किया। उन्होंने विश्व समुदाय को साझा रणनीति बनाने का सुझाव दिया। यह वादा किया कि भारत इसमें अपनी भूमिका का निर्वाह करेगा। दूसरा उन्होंने सार्क देशों का केवल आह्वान ही नहीं किया, बल्कि इस संगठन के सबसे बड़े सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी के निर्वाह का जज्बा दिखाया। भारत कारोना से निपटने की तैयारी में सार्क के नेतृत्व हेतु भी तैयार है। मोदी की तीसरा मोर्चा राष्ट्रीय स्तर पर है। उन्होंने दवाई, जांच आदि के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को रेखांकित किया। सरकार इसके लिए सभी संभव प्रयास कर रही है। राज्य सरकारों के साथ भी सहयोग किया जा रहा है। इसके अलावा मोदी ने अभिभावक के रूप में भी राष्ट्र ने नाम सन्देश दिया है। विश्व के किसी भी शासक ने ऐसी भावपूर्ण अपील नहीं की है।
भारतीय संस्कृति में मानवता और वसुधैव कुटुम्बकम के साथ आत्मसंयम व कर्तव्य पालन को भी महत्व दिया गया। प्रधानमंत्री के सन्देश में इन्हीं तत्वों का समावेश था। इस बीमारी के बारे में जगजाहिर है कि यह बीमार व्यक्ति के छूने से होती है। इतना ही नहीं उसके द्वारा छुई गई वस्तुओं से भी संक्रमण हो जाता है। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति के इलाज के साथ ही भीड़भाड़ न करना, जहां तक संभव हो घर में ही रहना भी अपरिहार्य है। इसी सन्देश को फिलहाल दिनचर्या में उतारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिन आवश्यक सेवाओं वाले लोगों को छोड़कर किसी को भी घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए यथासंभव घरों के अंदर ही रहना बचाव का तरीका है। मोदी ने कहा कि 22 मार्च को हमारा आत्मसंयम, देशहित में कर्तव्य पालन के संकल्प का एक मजबूत प्रतीक होगा। जनता के लिए जनता के द्वारा लगाया गया कर्फ्यू होगा। इतना ही नहीं, मोदी चाहते हैं कि कारोना पीड़ितों का उपचार व सेवा करने वालों के प्रति भी आभार व्यक्त होना चाहिये। 22 मार्च की शाम पांच बजे डॉक्टरों, चिकित्सा सेवा में लगे लोगों, साफ-सफाई में लगे कर्मचारियों को उनकी सेवा के लिए धन्यवाद देना चाहिए। कोरोना वायरस से निपटने के लिए कोई सटीक उपाय नहीं मिला है। न ही कोई टीका विकसित हुआ है। ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करना चाहिए जो जोखिम उठाकर आवश्यक कामों में लगे हैं, इस महामारी से लड़ने में मदद कर रहे हैं। रविवार को पांच बजे से अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर, बालकनी व खिड़कियों के सामने खड़े होकर पांच मिनट तक ताली या थाली बजाकर उन लोगों के प्रति कृतज्ञता जताएं, जो लोगों को कोरोना से बचाने में लगे हैं।
इसके पहले मोदी ने दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन सार्क देशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग संवाद किया। मोदी का यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह बीमारी चीन से फैली है। ऐसे में दक्षिण एशिया के देशों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। इसी में सबकी भलाई है। ये बात अलग है कि पाकिस्तान जैसे देश इस समय भी कश्मीर का राग अलाप रहे हैं। पाकिस्तान को ऐसे सद्भावना के प्रयास पसंद भी नहीं आते। जबकि सार्क के अन्य सदस्य देशों ने मोदी के प्रयासों का समर्थन किया है। ये देश सहयोग के लिए तैयार हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मोदी जी के प्रस्ताव का स्‍वागत किया। कहा कि नेपाल सार्क सदस्‍य देशों के साथ मिलकर इस घातक संक्रमण से लड़ने के लिए काम करने को तैयार है। भूटान के प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग, श्रीलंका के राष्‍ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे, मालदीव के राष्‍ट्रपति इब्राहिम मोहम्‍मद सोलिह, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना आदि ने भी ऐसी ही प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन नेताओं ने भरोसा जताया है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साझा प्रयासों से इस बीमारी का मुकाबला किया जा सकता है। मोदी ने सार्क सदस्यों को बताया था कि प्रशासन और जनता भी इससे निपटने के लिए अपनी ओर से भरपूर प्रयास कर रही है। सार्क सदस्यों को मजबूत रणनीति बनानी चाहिए।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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