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गयाना में दोबारा मतगणना का निर्णय सही : गोपाल अरोड़ा

18/03/2020

सुप्रभा सक्सेना

नई दिल्ली/जॉर्जटाउन, 17 मार्च (हि.स.)। गयाना में 2 मार्च को राष्ट्रपति पद के चुनाव सम्पन्न हुए थे। लेकिन परिणाम अब तक लंबित है। इसकी मुख्य वजह है चुनावों में की गई धांधली और चौथे रीजन की मतगणना में हेरफेर की कोशिश। भारतीय मूल के लोगों द्वारा समर्थित पीपुल्स प्रोग्रेसिव कांग्रेस ने इस गड़बड़ी के लिए गयाना की सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और कोर्ट ने एक स्वतंत्र निगरानी एजेंसी के सामने पुर्न मतगणना के निर्देश भी दिए हैं। पर अब तक सत्तारूढ़ रहा दल इसमें भी देरी कर रहा है।

इस मुद्दे पर हिन्दुस्थान समाचार ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के मानद निदेशक नारायण कुमार और सचिव गोपाल अरोड़ा से बातचीत की। उन्होंने कहा कि गयाना के चुनाव में हमारी रुचि इसलिए है कि वहां बड़ी संख्या में भारतवंशी रहते हैं और भारतवंशी छेदी जगन को वहां राष्ट्रपिता के तौर पर मान्यता मिलती रही है। वे 1992 से 1997 तक गयाना के राष्ट्रपति रहे। फिर भारतीय मूल के ही भरत जगदेव 1999 से 2011 तक गयाना के राष्ट्रपति रहे। वे ही पीपुल्स प्रोगेसिव कांग्रेस के महासचिव हैं।वर्तमान में सत्तारूढ़ पीपुल्स नेशनल कांग्रेस और राष्ट्रपति डेविड ए ग्रैंगर चुनाव में अनैतिक तरीके अपनाकर सत्ता में बनी रहना चाहती है। उसने चुनावों में धांधली की है। इसलिए दोबारा मतगणना  (रिकाउंटिंग) का निर्णय पूरी तरह से सही है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और अन्तरराष्ट्रीय सरकारों के लगातार दबाव बनाने के बाद गयाना चुनाव आयोग ने मतपत्रों की गिनती फिर से उच्चस्तरीय कैरीकॉम की निगरानी में कराने का निर्णय लिया है।

नारायण कुमार और गोपाल अरोरा ने गयाना के चुनावी इतिहास के बारे में बताया कि दिसम्बर, 2018 में विपक्षी पार्टी एक ‘नो कॉन्फिडेस मोशन’ लेकर आई थी। 65 सदस्यों की संसद में यह 33-32 से पास हुआ था लेकिन सत्तारूढ राष्ट्रपति ग्रैंगर ने इस निर्णय को माना नहीं। इसके बाद गयाना हाईकोर्ट मेें कानूनी लड़ाई चलने के बाद यह मामला कैरेबियन कोर्ट में गया, जिसने जून 2019 में दिए अपने निर्णय में कहा कि सरकार के खिलाफ ‘नो कांफिडेंस मोशन’ पास हुआ था। साथ ही यह भी कहा कि उसके बाद सरकार द्वारा गयाना चुनाव आयोग के नए अध्यक्ष असंवैधानिक थी। उसके स्थान पर अब नए चुनाव आयोग के ऩए अध्यक्ष की नियुक्ति करनी चाहिए। नए अध्यक्ष की नियुक्ति सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर करनी थी ।

इससे बाद 2 मार्च 2020 को चुनाव हुए। इसकी मतगणना में चुनाव आयोग के रिटर्निंग अधिकारी ने रीजन 4 में जो काउटिंग प्रकिया और टैब्यूलेशन प्रक्रिया की, वो स्टेटमेंट ऑफ पोल्स के साथ मेल नहीं खा रही थी। इसी रीजन में  पीपीपी का वर्चस्व है और माना जा रहा है कि ठीक से मतगणना हुई तो उसकी ही सरकार बनेगी।ग्रैगर के प्रभाव में आए चुनाव आयोग की योजना थी कि वह चुनाव परिणाम घोषित कर दे और सत्तारूढ़ पार्टी को विजयी घोषित कर दे, जो एक प्रकार से पिछले 15 महीनों से केयरटेकर ही है। इसके खिलाफ पीपीपी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।कोर्ट ने निषेधाज्ञा लागू की और गयाना चुनाव आयोग को अंतिम निर्णय सुनाने से रोक दिया। 

नारायण कुमार ने बताया कि गयाना में पहले 52 प्रतिशत भारतवंशी थे जो अब 38-40 प्रतिशत रह गए हैं।उल्लेखनीय है कि गयाना की जनसंख्या 7,86000 है इनमें से 38 से 40 फीसदी भारतीय हैं। भारतीय मूल के लोग वहां के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिकाउंटिंग के बाद पीपीपी की सरकार बनने की संभावना पर प्रोफेसर गोपाल अरोड़ा ने बताया कि इस पर अभी कई सवाल हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि जो बैलेट बॉक्स हैं वो कितने सुरक्षित हैं, जो रिकाउंटिंग हो रही है वो कानून के मुताबिक हो और सही हो। इस पर सभी अंतरराष्ट्रीय समुदायों की नजर बनी हुई है। इसी कारण कैरिकॉम ऑब्जरवरों के होने बाद भी रिकाउंटिंग प्रक्रिया को टाला जा रहा है, लेकिन अब उन्हें चेतावनी दी गई है कि ऐसा करने पर आप विश्व समुदाय से अलग-थलग पड़ जाएंगे। अमेरिका ने साफ तौर पर कहा है कि उन पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। 

अन्तरराष्ट्रीय सहयोग परिषद का मानना है कि भारत सरकार को गयाना पर नजर रखनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप भी करना चाहिए, क्योकि वहां की जनसंख्या में भारतीय मूल की संख्या बड़ी है और वे भारत से सहयोग की अपेक्षा भी रखते हैं।गयाना सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से हमसे जुड़ा हुआ देश है। वहां पर कुछ साल पहले तेल के बहुत बड़े भंडार मिले हैं। उसकी क्षमता बहुत है। तेल के भंडार गयाना को अगले दस साल में विश्व के दस बड़े तेल निर्यातक देशों की सूची में ला सकता है। 


हिन्दुस्थान समाचार


 
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