राहत पैकेज से कितनी राहत?


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राहत पैकेज से कितनी राहत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लिए जो राहत पैकेज की घोषणा की है, उस पर आम लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। यह राहत लोगों को कितनी राहत देने वाली है, आइये लोगों से ही जानते हैं।

सौरव राय

प्रधानमंत्री ने 12 मई को देश को संबोधित किया। इस संबोधन में मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते  हुए एक बड़े आर्थिक सहयोग की बात कही। वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन चार के भी संकेत दे दिए। लॉकडाउन चार कितने समय का होगा यह तो अभी नहीं घोषित है परन्तु प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में साफ कहा है कि यह लॉकडाउन पिछले लॉकडाउन से अलग होगा। एक अनुमान के मुताबिक देश के उन इलाकों को आंशिक रूप से खोला जायेगा। जहां कोरोना के संक्रमण का केस कम है या नहीं है। नए नियमों के साथ उद्योग जगत को भी छूट दी जा रही है। अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए राज्य भी अपने स्तर पर काम कर रहा है। उत्तर प्रदेश ने श्रमिक कानून को अपने राज्य में तीन साल के लिए स्थगित कर दिया है। इसकी कुछ हलकों में आलोचना जरुर हुई। लेकिन आर्थिक जगत के महारथी इसे अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा कदम बता रहे हैं। चीन से कई कंपनिया पलायन कर रही हैं। इसे भारत और उसके कई राज्य अवसर के रूप में देख रहे हैं

कोविड -19 से पूरी दुनिया आर्थिक रूप से भारी नुकसान में है। पहले लगा था कि लॉकडाउन से इस वायरस को खत्म किया जा सकता है। पर अभी जो आंकड़े आ रहे हैं, उनमें साफ है कि यह लॉकडाउन से संक्रमण कम हो सकता है पर खत्म नहीं हो सकता। इसका एक उदहारण यह भी है कि जिन देशों ने लॉकडाउन से इस वायरस पर लगभग विजय पा ली थी वहां लॉकडाउन में ढील दी गयी। जिसके बाद वहां वायरस फिर से बढ़ने लगा। प्रधानमंत्री इस गंभीरता को समझ रहे है। इसीलिए लॉकडाउन चार को कुछ विशेष छूटों के साथ जारी रखना होगा। ताकि अर्थव्यवस्था और जन जीवन दोनों ही पटरी पर रहें।

प्रधानमंत्री के इस फैसले और लॉकडाउन चार के बारे में लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया रही। नोएडा के सेक्टर आई ब्लाक में किराना की दुकान चलाने वाले रमेश कोटियाल ने प्रधानमंत्री के उद्बोधन को एक सधे हुए राजनेता का उद्बोधन बताया। उनका कहना था कि इस दौरान बड़े बड़े देश को कुछ समझ नहीं आ रहा है, उनके यहां और हमारे यहां की व्यवस्था में अंतर है। लेकिन इसके बावजूद हम अन्य देशों की अपेक्षा कम परेशान हैं। आप उनको देख लो, अमेरिका जो सबसे शक्तिशाली देश है उसने इस वायरस के आगे घुटने टेक दिए हैं। अगर ट्रम्प ने सही समय पर सही फैसला लिया होता तो अमेरिका में इतनी बड़ी तबाही नहीं देखने को मिलती। उस लिहाज से मोदी ने सही फैसला लिया है। जब उनसे पूछा गया कि विपक्ष तो उनकी आलोचना कर रहा है, तो उनका कहना है कि मोदी ने लॉकडाउन तो कर दिया लेकिन कोई तैयारी नहीं की, क्या आप भी ऐसा ही मानते हैं? इस पर उनका कहना था कि हां, अगर थोड़ी तैयारी होती तो इसे और बेहतर तरीके से रोका जा सकता था। प्रधानमंत्री ने देश में आर्थिक राहत पैकज की घोषणा की है। क्या आपको लगता है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी? हमको उतनी तो अर्थव्यवस्था की जानकारी नहीं है लेकिन अगर सरकार इतना बड़ा पैकज दे रही हैं तो जरुर सुधरेगा। उनकी बातों से लगा कि विपक्ष जो भी कहे पर देश को अभी भी मोदी पर विश्वास है। उसे पता है कि इस भयावह समय में देश को एक मजबूत लीडरशिप की जरूरत है।

एक फल बेचने वाले संजय जो अपना फल का ठेला आजकल छूट मिलने की वजह से लगा रहे हैं उनसे पूछा गया कि चौथे लॉकडाउन में सरकार कुछ छूट दे रही है। क्या आपको लगता है इससे व्यवसाय को राहत मिलेगी? पता नहीं साहब, अभी तो हम दूकान कुछ दिनों से लगा रहे हैं। लेकिन हमारी आमदनी जितनी पहले होती थी उसकी आधी भी नही रही। कोई घर से निकल ही नहीं रहा और निकल भी रहा है तो वह खरीददारी डर कर कर रहा है। अब इस परिस्थिति में आप ही बताएं कि  कैसे काम होगा। लॉकडाउन चार में अगर लोगों को कुछ ढील दी जाएगी तब देखते हैं जब लोग बाजार आयेंगे ही नहीं तो कौन इसे खरीदेगा। प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें भारत देश के नागरिक होने के नाते आत्मनिर्भर होना होगा। इस पर आप क्या सोचते हैं? उन्होंने सही कहा देश अगर आत्मनिर्भर नहीं होगा तो कैसे देश तरक्की करेगा।

सेक्टर 12 में ही फैमिली केयर दवा की दुकान के मालिक ने प्रधानमंत्री की तारीफ की और कहा कि उन्होंने देश हित में फैसला लिया है। मुझे इस बात की जरुर तकलीफ है कि जो गरीब प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों में फंसे हुए हैं उनके लिए और प्रयास करें। हमलोग जब उनकी स्थिति देख रहे हैं तो दु:ख हो रहा है। प्रधानमंत्री के आर्थिक पैकेज को आप कैसे देखते हैं? अच्छा फैसला है। अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गयी है ऐसे में फैसला सराहनीय है। देश को फिर से खड़ा करना होगा। वो तो धन्य हो हमारे किसानों का जिनकी वजह से हम जिन्दा हैं। इस महामारी में यह साबित हो गया कि देश आज भी किसानों के भरोसे चलता है और अगर उन्हें और मजबूत कर लें तो हमें दूसरे देशों की आवश्यकता ही नहीं।

उसी जगह पर बेकरी की दुकान चलाने वाली मंजू गुप्ता से जब लॉकडाउन चार और प्रधानमंत्री द्वारा दिए गये राहत पैकेज के बारे में पूछा तो उन्होंने उल्टा सवाल किया कि आप बताइए उस राहत पैकज में हम जैसे दुकानदारों के लिए क्या कोई प्रवधान किये हैं। हमारा दुकान दो महीने से बंद है। हमें दुकान का किराया से लेकर अपने यहाँ काम करने वाले मजदूरों को भी पैसा देना पड़ता है। हम जैसे छोटे दुकानदार को इस वायरस की वजह से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। क्या हमें इस पैकेज से कुछ  मिलेगा? जब उनको बताया कि छोटे और माध्यम व्यपारियों के लिए भी प्रवधान किया गया है। उनका कहना था कि देखते हैं अगर ऐसा है तो स्वागत है क्योंकि हमें पूछने वाला कोई नहीं होता। बड़े-बड़े व्यपारी तो सरकार से फायदा ले लेते हैं। कुछ ने तो पैसा लेकर देश ही छोड़ दिया। दिक्कत तो हमारे जैसे छोटे लोगों को होती है। अपनी बात कहते हुए मंजू काफी परेशान लग रहीं थी। उनकी बातें कितनी सही कितनी गलत इसका तो फैसला सरकार और उसकी नीति ही कर सकती है।

सवाल तो और भी थे परन्तु उस वक्त उनका उत्तर लेना उचित नहीं था। इस वायरस ने हर तरह के इन्सानों के साथ एक सामान व्यवहार किया है। चाहे बड़ा हो या छोटा, हर कोई इस महामारी में बुरी तरह से फंसा हुआ है। मनुष्य जो अपने आप को ब्रह्मांड का शक्तिशाली जीव मानता था। आज वह भी इस वायरस के सामने असहाय स्थिति में दिख रहा है। वायरस का असर इतना खतरनाक और इतने दिनों तक चलेगा यह किसी को नहीं मालूम थो जिसके कारण लोगों में अब एक रोष देखने को मिल रहा है। लगातार लगभग दो महीने से घरों में रहने के कारण लोग उगता गये हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा यह कब खत्म होगो और वह पहले जैसी सामान्य जिन्दगी में कब लौट पाएंगे।

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