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कोरोनाः बचाव उपायों में पिछड़ रहा मध्य प्रदेश

16/03/2020

प्रमोद भार्गव
पूरे देश में जहां जानलेवा कोरोना वायरस का संकट गहराया हुआ है, मध्य-प्रदेश में अस्तित्व के संकट से जूझ रही कमलनाथ सरकार कोरोना से बहुमूल्य जीवन को बचाने के सार्थक उपाय करने में पिछड़ रही है। यह इस बात से पता चलता है कि कोरोना वायरस की आशंका में इंदौर निवासी इटली से आई युवती को एमवाय अस्पताल में भर्ती किया गया। युवती का मित्र कोविड-19 की जांच में पाॅजीटिव पाया गया है। इस जानकारी के बाद युवती स्वयं अस्पताल पहुंची और खून के नमूने दिए। इस लड़की को सावधानी बरतते हुए पृथक वार्ड में रखा गया है। मध्य-प्रदेश के अन्य शहरों में भी चीन, इटली, मलेशिया, ईरान व जापान से कुछ लोग आए हैं। इसके संदिग्ध मरीज उज्जैन और ग्वालियर में भी मिले हैं। शिवपुरी में मलेशिया से लौटे दो युवकों को जांच के दायरे में रखा गया है। चीन में रहकर चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई कर रहे खरगोन का युवक और इंदौर की लड़की वुहान से लौटी है। वुहान वही शहर है, जहां की विषाणु प्रयोगशाला से कोरोना वायरस निकलकर दुनिया के 126 शहरों में फैल गया और इसने पांच हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। भारत सरकार ने इस महामारी को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे विश्वव्यापी महामारी घोषित कर चुका है।
देश में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दिल्ली और कर्नाटक में एक-एक मौत हो चुकी है। अबतक कोरोना के संक्रमण के 7 रोगी दिल्ली, 11 उत्तर-प्रदेश, 6 कर्नाटक, 14 महाराष्ट्र, 19 केरल और तीन लद्दाख में पाए गए हैं। राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडू, जम्मू-कश्मीर, आंध्र-प्रदेश और पंजाब में एक-एक मरीज पाए गए हैं। इन रोगियों में 17 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें इटली के 16 और कनाडा का एक पर्यटक है। अबतक देश के अस्पतालों से 10 कोरोना संक्रमित ठीक होकर अपने-अपने घर लौट चुके हैं। इस बात को लेकर संतुष्ट हुआ जा सकता है कि मध्य-प्रदेश में अभीतक एक भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति नहीं मिला है। प्रदेश सरकार अस्तित्व के संकट से जूझ रही है, इसलिए स्वाभाविक है कि वह इस खतरनाक बीमारी के प्रति सर्तक नहीं है। फिर भी स्वास्थ्य मंत्री तरुण भनोत का कहना है कि बैंगलुरु में कांग्रेस के जो 22 विधायक नजरबंद हैं, उनका भोपाल आते ही स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। क्योंकि बैंगलुरु में कोरोना के छह संक्रमित मरीज मिले हैं, उनमें से एक 76 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो चुकी है। लेकिन विडंबना यह है कि भनोत को स्वास्थ्य मंत्रालय का छह मंत्रियों की बर्खास्तगी के बाद पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट का प्रभार मिला है। ऐसे में वे स्वयं अजमंजस में हैं कि इस वायरस से बचने के क्या उपाय किए जाएं। कौन-सी आपातकालीन सुविधाएं एवं दवाएं जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाई जाएं?
हालांकि प्रदेश सरकार ने प्राथमिक सावधानियां बरतते हुए प्रदेश के सभी सरकारी व निजी विद्यालय व महाविद्यालय, सिनेमाघर, डे-केयर सेंटर और आंगनवाड़ी केंद्र 31 मार्च तक बंद कर दिए हैं। इस दौरान घरों पर ही पोषण आहार पहुंचाया जाएगा और वहीं वजन व ऊॅचाई नापी जाएगी। जिला अस्पतालों में पृथक वार्ड खोलने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सकों, नर्सों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की छुटिट्यां रद्द कर दी गयी है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा की अधिसूचना जारी करने के बाद राज्य सरकारों को कहा गया है कि इससे निपटने के लिए एसडीआरएफ के तहत आर्थिक मदद की जाएगी। राज्य सरकारें इस सिलसिले में वायरस पर नियंत्रण के लिए प्रभावित लोगों के अस्थाई तौर पर ठहरने, खाना, वस्त्र, दवाएं और आइसोलेशन कैंप के लिए एसडीआरएफ धनराशि का इस्तेमाल कर सकती हैं। इस राशि का उपयोग स्क्रीनिंग टेस्ट और सैंपल लेने के साथ प्रयोगशालाएं बनाने में भी किया जा सकेगा।
मध्य-प्रदेश में सरकार जिस उठापटक के दौर से गुजर रही है, उसके चलते कोरोना की रोकथाम के प्रति ज्यादा सचेत नहीं है। हां, मुख्यमंत्री कमलनाथ के चित्र लगे विज्ञापन जरूर अखबारों में रोजाना छापे जा रहे हैं। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो छोड़िए जिला चिकित्सालयों तक में मास्क, सेनेटाइजर व डिटाॅल तक नहीं हैं। इसलिए वरिष्ठ नागरिक इन वस्तुओं की मांग जिला कलेक्टरों को ज्ञापन देकर भी करने लगे हैं। इन नागरिकों के संगठनों ने जिला चिकित्सालयों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से ऐसा कक्ष बनाने की मांग की है, जिसमें इस बीमारी से जुड़े लक्षणों बुखार, खांसी, सर्दी-जुकाम, निमोनिया और सांस के विशेषज्ञ चिकित्सक जांच करें और फिर दवा दें। दरअसल वरिष्ठ नागरिकों को बीमारी से पहले उपचार की चिंता इसलिए सता रही है क्योंकि कोरोना का सबसे ज्यादा असर 70 साल के अधिक उम्र के बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर देखने में आ रहा है। उम्रदराज लोग ही मौत के मुंह में ज्यादा जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस उम्रों में रोग-प्रतिरोधात्मक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। गर्भवती महिलाएं भी इसकी गिराफ्त में जल्दी आ सकती हैं। जिन लोगों को हृदय, गुर्दा, जिगर और अस्थिरोग है, उन्हें भी कोरोना तेजी से अपनी चपेट में लेता है।
बहरहाल, शासन व प्रशासन की शिथिलता से जूझ रहे स्वास्थ्य केंद्रों से ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे रहने की बजाय अच्छा है लोग स्वयं सावधानियां बरतें। हाथ मिलाने की बजाय नमस्ते करें। सर्दी-जुकाम से पीड़ित व्यक्ति से 5-6 फीट तक की दूरी तक रहें। क्योंकि इनके छींकने पर जो तरल बूंदें निकलती हैं, उनमें यदि कोरोना वायरस है तो वह इस दूरी के बीच स्वयं मर जाएगा। इसलिए मास्क का प्रयोग करें, साबुन व सेनेटाइजर से हाथ धोएं। सेनेटाइजर नहीं होने पर डिटाॅल में साबुन मिलाकर हाथ धो लें। जबतक प्रदेश में स्थिर सरकार नहीं आ जाती है तबतक वरिष्ठ नागरिक भी सुरक्षा के लिए सरकार के भरोसे बैठे रहने की बजाय अपने स्तर पर भी बचाव के उपाय करें।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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