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विपक्ष को बवाल पसंद है

24/01/2020

विपक्ष को बवाल पसंद है

Yugwatra

भारत में इन दिनों विपक्ष बवाल खड़ा करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहता है। नागरिकता संशोधन बिल का मसला हो अथवा एनआरसी का मुद्दा, विपक्ष सरकार को घेरने का हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। सीएए का भूत अभी उतरा भी नहीं था कि विपक्ष ने 2021 में पूर्ण होने जा रही जनगणना की प्रक्रिया को भी विवादों में घसीटने में जुट गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर, 2019 के तीसरे सप्ताह में भारत की जनगणना-2021 की प्रक्रिया शुरू करने तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पर काम करने की मंजूरी दी है। मंजूरी मिलने के बाद से विपक्ष इसे भी एनआरसी एवं सीएए के साथ जोड़कर देख रहा है। जबकि इस बाबत गृह मंत्री सहित सरकार के कई मंत्रियों ने इस बात से साफ तौर से इंकार किया है कि एनपीआर का एनआरसी अथवा सीएए से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध है।

राष्ट्रीय जनगणना से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें
 भारत की जनंसख् या गणना प्रक्रिया दुनिया की सबसे बड़ी जनंसख् या गणना प्रक्रिया है। देश
में जनगणना का काम हर दस साल बाद होता है। ऐसे में अगली जनसंख् या गणना 2021 में
होनी है। जनसंख् या गणना का यह काम दो चरणों में किया जाएगा।
 पहले चरण के तहत अप्रैल-सितंबर 2020 तक प्रत् येक घर और उसमें रहने वाले व् यक्तियों
की सूची बनाई जाएगी। असम को छोड़कर देश के अन् य हिस् सों में एनपीआर रजिस् टर के
अद्यतन का काम भी इसके साथ किया जाएगा। जबकि दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28
फरवरी 2021 तक पूरी जनसंख् या की गणना का काम होगा।
 राष् ट्रीय महत् व के इस बड़े काम को पूरा करने के लिए 30 लाख कर्मियों को देश के विभिन् न
हिस् सों में भेजा जाएगा। जनगणना 2011 के दौरान ऐसी कर्मियों की संख् या 28 लाख थी।
 डेटा संकलन के लिए मोबाइल ऐप और निगरानी के लिए केन् द्रीय पोर्टल का इस् तेमाल
जनसंख् या गणना का काम गुणवत्ता के साथ जल् दी पूरा करना सुनिश्चित करेगा।
 एक बटन दबाते ही डेटा प्रेषण का काम ज् यादा बेहतर तरीके से होगा और साथ ही यह
इस् तेमाल में भी आसान होगा ताकि नीति निर्धारण के लिए तय मानकों के अनुरूप सभी
जरूरी जानकारियां तुरंत उपलब् ध करायी जा सकें।
 मंत्रालयों के अनुरोध पर जनसंख् या से जुड़ी जानकारियां उन् हें सही, मशीन में पढ़े जाने
लायक और कार्रवाई योग् य प्रारूप में उपलब् ध करायी जाएगी।

क्या है एनपीआर

देश में हर दस साल बाद जनगणना का काम 1872 से किया जा रहा है। जनगणना 2021 देश की 16 वीं और आजादी के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। जनसंख् या गणना आवासीय स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों, जनसंख् या संरचना, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति, भाषा, साक्षरता और शिक्षा,आर्थिक गतिविधियों, विस् थापन और प्रजनन क्षमता जैसे विभिन् न मानकों पर गांवों, शहरों और वार्ड स् तर पर लोगों की संख् या के सूक्ष् म से सूक्ष् म आंकड़े उपलब् ध कराने का सबसे बड़ा स्रोत है। जनगणना कानून 1948 और जनगणना नियम 1990, जनगणना के लिए वैधानिक फ्रेमवर्क उपलब् ध कराता है। नागरिकता कानून 1955 तथा नागरिकता नियम 2003 के तहत राष् ट्रीय जनसंख् या रजिस्टर (एनपीआर) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। आधार से जोड़े जाने के बाद 2015 में इसका अद्यतन किया गया था। अब 2019 में एनपीआर पर काम करने की मंजूरी केन्द्र सरकार ने दी है। जनगणना प्रक्रिया पर 8754.23 करोड़ रूपये तथा एनपीआर के अद्यतन पर 3941.35 करोड़ रूपये का खर्च आएगा। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि देश की पूरी आबादी जनगणना प्रक्रिया के दायरे में आएगी, जबकि एनपीआर के अद्यतन में असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा।

जनसंख्या गणना के फायदे

जनगणना केवल एक साख् यंकी प्रक्रिया भर नहीं है। इसके नतीजे आम जनता को इस तरह उपलब् ध कराए जाएंगे ताकि उन् हें इन् हें समझने में आसानी हो। साथ ही जनसंख् या से जुड़े सभी आंकड़े मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संगठनों सहित सभी हितधारकों और उपयोगकतार्ओं के लिए उपलब् ध कराए जाएंगे। जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों को गांवों और वार्ड जैसी प्रशासनिक स्तर की आखिरी इकाइयों के साथ भी साझा किया जाएगा। जनसंख् या से जुड़े ब्लॉक स् तर के आंकड़े परिसीमन आयोग को भी मुहैया कराए जाएंगे ताकि लोकसभा और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में इनका इस् तेमाल हो सके। सर्वेक्षणों और अन् य प्रशासनिक कार्यों से संबंधित आंकड़ों को यदि जनंसख् या के आंकड़ों के साथ लिया जाए तो यह जननीतियों के निर्धारण का एक सशक् त माध् यम बनते हैं।

रोजगार सृजन में जनगणना

इस बड़े महत्व के काम का एक सबसे बड़ा नतीजा दूर-दराज के क्षेत्रों से लेकर पूरे देश में प्रत् यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार का सृजन होना है। यह जनगणना और एनपीआर के काम में लगाए गए कर्मियों को दिए जाने वाले मानदेय के अतिरिक् त है। जनगणना और एनपीआर के काम में स्थानीय स् तर पर 500 दिनों के लिए करीब-करीब 48 हजार लोगों को लगाया जाएगा। दूसरे शब् दों में इससे करीब 2 करोड़ चालीस लाख मानव दिवस के रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। आंकड़ों के संकलन के लिए डिजिटल प्रक्रिया और समन् वय की नीति अपनाए जाने से जिलों और राज्यस्तर पर तकनीकी दक्षता वाले मानव संसाधनों के क्षमता विकास में भी मदद मिलेगी। आगे ऐसे लोगों के लिए इससे रोजगार पाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

कार्यान्वयन नीति और लक्ष्य

जनगणना की प्रक्रिया में प्रत् येक परिवारों से मिलना, प्रत् येक घर तथा उसमें रहने वाले लोंगों की सूची तैयार करना तथा सबको मिलाकर जनसंख् या गणना के लिए अलग-अलग प्रश् नावली तैयार करना शामिल है। जनगणना करने वाले आमतौर पर राज् य सरकारों द्वारा नियुक् त कर्मचारी और सरकारी शिक्षक होते हैं। इन् हें अपनी नियमित ड्यूटी के अति रिक् त जनगणना के साथ ही एनपीआर का काम भी करना होता है। इन लोगों के अलावा जनगणना के काम के लिए जिला, उप जिला और राज् य स् तर पर राज् यों और जिला प्रशासन द्वारा अन् य कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाती है।

इस जनगणना में हो रही नई पहल
 पहली बार आंकड़ों के संकलन के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल।
 जनगणना के काम में लगाए गए अधकारियों और पदाधिकारियों को विभिन्न भाषाओं में
जानकारी उपलब् ध कराने के लिए जनगणना निगरानी और प्रबंधन पोर्टल की व्यवस्था।
 आम लोगों को अपनी ओर से जनंसाख्यकी आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए आॅनलाइन
सुविधा देना तथा कोड डायरेक्टरी की व् यवस् था करना ताकि विस् तार से दी गई जानकारियों
को कूटबद्ध कर आंकडों के प्रसंस्करण के काम में समय की बचत की जा सके।
 जनगणना तथा एनपीआर के काम में लगे लोगों को दी जानेवाली मानदेय राशि सार्वजनिक
वित् तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से
सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की व् यवस् था है। यह जनसंख्या गणना और एनपीआर पर
होने वाले कुल खर्च का 60 फीसदी हिस् सा होगा।
 जनगणना के काम के लिए जमीनी स् तर पर काम करने वाले 30 लाख कर्मियों को गुणवत्ता
परक प्रशिक्षण देना और इसके लिए राष् ट्रीय और राज्यस्तर पर प्रशिक्षक तैयार करने के लिए
राष्ट्रीय तथा राज्यस्तर की प्रशिक्षण संस्थाओं की सेवाएं लेना।


 
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