ब्लड बैंक में खत्म हो रहा ब्लड


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ब्लड बैंक में खत्म हो रहा ब्लड


पूरे देश में कोरोना वायरस के चलते  स्वास्थ्य की प्रक्रिया भी बाधित है इसके चलते ब्लड बैंक रक्त की कमी का सामना कर रहे हैं। क्योंकि इस समय  रक्त देने वाले इच्छुक व्यक्ति  लॉकडाउन के चलते घर से नहीं निकल पा रहे हैं। इसलिए अस्पतालों में रक्त की कमी हो गई है। ब्लड की कमी को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत रक्त दाताओं से अस्पताल संपर्क करना शुरू कर दिया है। इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित लोग रक्त विकार वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाएँ, बी-पॉजिटिव ब्लड ग्रुप, सांस या दिल के मरीज आदि को मुख्यत: रक्त की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अस्पताल द्वारा सूचीबद्ध दाताओं तथा दुर्लभ रक्त समूहों वाले लोगों से रक्त दान की अपील की जा रही है। इस दौरान थैलेसीमिया के रोगियों को बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि ऐसे रोगियों को जीवित रहने के लिये बार-बार रक्त बदलने की आवश्यकता होती है। गौरतलब है कि विश्व का पहला ब्लड बैंक वर्ष 1937 में रेडक्रॉस की पहल पर अमेरिका में खुला था। आज विश्व के अधिकांश ब्लड बैंकों का संचालन रेडक्रॉस एवं उसकी सहयोगी संस्थाओं द्वारा किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुुताबिक किसी देश की आबादी के 1फीसदी लोगों की रक्त की आवश्यकता को उस देश रक्त की जरूरतों के मानक के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए। इस मानक से देखें साल 2018 में भारत में 1.9 मिलियन यूनिट रक्त की कमी थी। राष्ट्रीय रक्त आधान के मुताबिक भारत में 2,023 ब्लड बैंक हैं, जो रक्त की 78 फीसदी  आपूर्ति स्वैच्छिक रक्तदाताओं से प्राप्त करते हैं।
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