यथावत

Blog single photo

समर्थन में भी खड़े बड़े नाम

24/01/2020

समर्थन में भी खड़े बड़े नाम


सीएए पर देश भर में विरोध के बीच अब लोग इसके समर्थन में भी उतरने लगे हैं। कई बड़े शहरों में गैर राजनीतिक संगठनों ने रैली निकालकर इसका समर्थन किया है तो ग्यारह सौ बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदें ने एक साक्षा बयान भी जारी किया है। ऐसा नहीं है कि नए संशोधित नागरिकता कानून लागू होने के बाद से इसका सिर्फ विरोध हो रहा है। दिल्ली समेत पूरे भारत में इसे लागू करने को लेकर भी आवाजें उठ रही हैं। देशभर में लोग इस कानून के समर्थन में अपने-अपने स्तर पर आवाज उठा रहे हैं। कोई रैली निकालकर इसका समर्थन कर रहा है। कोई सोशल मीडिया पर कैंपेन चला रहा है। इसी क्रम में 1100 बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने इसके समर्थन में एक साझा बयान पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में राज्यसभा सांसद स्वप्न दासगुप्ता, आईआईएम शिलॉन्ग के प्रमुख शिशिर बजोरिया, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सुनैना सिंह, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के डीन ऐनुल हसन, इंस्टीट्यूट आॅफ पीस एंड कॉन्μिलक्ट स्टडीज के सीनियर फेलो अभिजीत अय्यर मित्रा, पत्रकार कंचन गुप्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रकाश सिंह, डॉ. स्वदेश सिंह, डॉ. तरुण कुमार गर्ग, डॉ. पंकज मिश्रा, जेएनयू के डॉक्टर प्रमोद कुमार, प्रोफेसर अश्विनी महापात्रा और प्रोफेसर अजहर आसिफ जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

सीएए एक ऐसा कानून है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आये अल्पसंख्यक शरणार्थियों के साथ हुए अन्याय को खत्म करता है। साथ ही यह कानून भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मुख्य भूमिका निभाने वाले समुदायों का सामाजिक सम्मान बहाल करता है।

स्वप्न दासगुप्ता, राज्यसभा सदस्य

इनके साझा बयान में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को अपने देश में शरण देने की पुरजोर वकालत की गई है। इसमें लिखा गया है, ‘1950 की लियाकत-नेहरू समझौते की विफलता के बाद से, विभिन्न नेताओं और राजनीतिक दलों ने जैसे कांग्रेस, सीपीआई (एम) इत्यादि ने वैचारिक मतभेदों को भुलाते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की मांग की है। इन लोगों में अधिकतर पिछड़ी जातियों से संबंधित हैं।’ नागरिकता कानून के पक्ष में खड़े बुद्धिजीवियों ने सरकार को बधाई भी दी है। अपने साझा बयान में उन्होंने कहा है कि हम भारतीय संसद और सरकार को इन भुला दिए गए अल्पसंख्यकों के लिए खड़े होने और धार्मिक उत्पीड़न की वजह से वहां से पलायन करने वाले लोगों को आश्रय देने के साथ ही भारत के सामाजिक स्वभाव को बनाए रखने के लिए बधाई देते हैं। हम इस बात पर भी संतोष जाहिर करते हैं कि पूर्वोत्तर राज्यों की चिंताओं को सुना गया और उसे माकूल तरीके से संबोधित किया जा रहा है। हमारा मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान से पूरी तरह तालमेल रखता है। क्योंकि यह किसी भी देश, किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से नहीं रोकता है। न ही यह किसी भी तरह से नागरिकता के मानदंडों को बदलता है।

सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के खिलाफ दिल्ली में हो रही हिंसा में आम आदमी पार्टी की भूमिका है। आप के एकएक नेता को दिल्ली के अलग अलग इलाकों में दंगा करवाने की जिम्मेदारी मिली है।

कपिल मिश्रा, बीजेपी नेता

यह किसी भी तरह से इन तीन देशों के अहमदिया, हजारा, बलूच या किसी भी अन्य संप्रदायों और जातियों को नियमित प्रक्रियाओं के जरिए नागरिकता प्राप्त करने से नहीं रोकता है। इस पत्र में आगे लिखा गया है कि हम बहुत दुख के साथ यह ध्यान दिलाना चाहते हैं कि घबराहट और डर की अफवाह फैलाकर देश में जानबूझकर डर और उन्माद का माहौल बनाया जा रहा है। इस कारण से कई हिस्सों में हिंसा हो रही है। अपने साझा बयान में इन लोगों ने समाज के हर वर्ग से अपील की है कि वो, संयम बरते और दुष्प्रचार, सांप्रदायिकता और अराजकता को बढ़ावा देने वाले प्रोपगेंडे में न फंसे।


 
Top