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भारतीय जागरुकता से जरूर हारेगा कोरोना

22/03/2020

सियाराम पांडेय 'शांत'
कोरोना के जानलेवा वायरस से पूरी दुनिया त्राहि-त्राहि कर रही है। दुनिया के 163 देशों में कोरोना वायरस ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। कहीं कम और कहीं अधिक। हालात यह है कि ढाई लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस की चपेट में हैं। 11 हजार से अधिक लोगों की इससे मौत हो चुकी है। हालांकि सभी देश अपने-अपने स्तर पर इसे शिकस्त देने में जुटे हैं लेकिन भारत न केवल खुद जागरूक हुआ बल्कि अन्य देशों की भी मदद की है। उसने दुनिया भर के देशों को न केवल संकट की घड़ी में एकजुट रहना सिखाया है बल्कि इस बात का संदेश भी दिया कि अगर संयम और संकल्प के साथ विवेकपूर्वक सावधानी बरती जाए, समस्या के खिलाफ संघर्ष किया जाए तो उसे शिकस्त देने में वक्त नहीं लगेगा। चीन के वुहान शहर से फंसे अपने लोगों को तो उसने सुरक्षित निकाला ही, बांग्लादेश और नेपाल के नागरिकों को भी इस संकट से उबारा। इतना ही नहीं, उसने चीन को भी 1100 करोड़ की औषधि भेजी।
चीन के वुहान में कोरोना वायरस ने सर्वप्रथम दस्तक दी थी। इसकी वजह क्या रही, इसपर चर्चा से बेहतर यह होगा कि कोरोनाजन्य मौतों के रथ को रोका कैसे जाए? सर्वप्रथम इस वायरस से चीन के 80976 लोग संक्रमित हुए थे, जिसमें 3248 मरीजों की जान चली गई थी। इस रोग से सर्वाधिक 4032 मौतें इटली में हुई हैं, जबकि वहां 47021 लोग कोरोना संक्रमित हैं। भारत में कोरोना प्रभावितों और इससे मरने वालों की तादाद अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है और इसकी वजह यह है कि भारत सरकार पहले ही दिन से कोरोना से बचाव को लेकर सजग है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् की रिपोर्ट बताती है कि भारत में कोरोना संक्रमित केवल 236 मरीज हैं, जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस संख्या को 223 ही बता रहा है। देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों में 32 विदेशी हैं, जिनमें 17 इतालवी, तीन फिलीपीन, दो ब्रिटेन और एक-एक कनाडा, इंडोनेशिया और सिंगापुर का निवासी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वायरस के खतरों के मद्देनजर जनता कर्फ्यू की अपील के साथ स्कूल-कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को 2 अप्रैल तक बंद करने की सलाह दी है। इसपर अमल भी हो चुका है। सार्वजनिक कार्यक्रमों और समारोहों पर रोक लगा दी गई है। धार्मिक संस्थाओं ने भी धार्मिक आयोजनों से दूरी बना ली है। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। सिनेमाघरों, मॉल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी पर्याप्त सावधानियां बरती जा रही हैं। जरा भी खांसी-जुकाम होने पर लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इंडिगो ने जहां कोरोना वायरस से बचाव के लिए अपनी पचास प्रतिशत से अधिक उड़ानें स्थगित करने और गो एयर ने अपनी सभी उड़ानें स्थगित करने का निर्णय लिया है। इस सकारात्मक ऐहतियात की सराहना की जानी चाहिए।
पिछली महामारियों से हुई जनधन की क्षति बताती है कि तब धार्मिक स्थलों ने अपने कार्यक्रमों पर रोक नहीं लगाई थी लेकिन इसबार भारत में हर कदम फूंक-फूंककर उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह वायरस नया है। दुनिया भर में अभी इसका इलाज तलाशा नहीं गया है, ऐसे में सावधानी बरतकर ही हम खुद और अपने संपर्क में आने वाले लोगों को इस वायरस के प्रभाव से बचा सकते हैं। इसमें संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री की इस अपील का पूरे देश ने न केवल स्वागत किया है, वहीं अपने स्तर पर वे उसपर हरसंभव अमल भी कर रहे हैं लेकिन इस सच से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि बेबीडाल सिंगर कनिका कपूर जैसे लोग भी इस समाज में हैं, जो लंदन की यात्रा के बाद भी वायरस की गंभीरता को नहीं समझते। कार्यक्रम करते हैं। उनके कार्यक्रमों में कई सांसद और मंत्री भी उनके संपर्क में आए। उनसे मिलने के बाद एक सांसद तो संसद में भी चले गए। राष्ट्रपति से भी मिल आए। छत्तीसगढ़ में भी विदेश से लौटी एक युवती के संपर्क में आए कई लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। इस स्थिति से बचा जा सकता है।
कोरोना वायरस से बचने और इस बाबत किसी भी तरह की सहायता या परामर्श प्राप्त करने के लिए टोल फ्री नंबर 1075 का इस्तेमाल करने, किसी भी तरह की अफवाह और भ्रामक सूचना से बचने को कहा गया है। प्रधानमंत्री का मानना है कि एकदिन के सहयोग से संक्रमण की कड़ी को तोड़ने में मदद मिलेगी लेकिन हमें सावधानी तो रोज ही बरतनी होगी। प्रधानमंत्री ने केवल जनता से ही संवाद नहीं किया बल्कि सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी विचार-विमर्श किया है। उन्हें अपने राज्यों में कोरोना वायरस के खतरों के प्रति न केवल आगाह किया है बल्कि उन्हें अपने-अपने राज्यों में व्यापार संघों के साथ वीडियो कांफ्रेंस करने को भी कहा है ताकि कालाबाजारी और अनुचित मूल्यवृद्धि को रोका जा सके। मुख्यमंत्रियों ने जिस तरह कोरोना से निपटने संबंधी अपनी तैयारियां बताई हैं, वह इस बात का द्योतक है कि शीघ्र ही यह देश कोरोना वायरस को मात देने में सफल हो जाएगा। जब जनता और सरकार साथ मिलकर किसी समस्या का समाधान तलाशते हैं तो बड़ी से बड़ी आपदा को घुटना टेकने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के न्यायपूर्ण उपयोग के महत्व को समझना वक्ती जरूरत भी है और उससे भी ज्यादा जरूरी है पृथक केंद्गों की संख्या तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना। स्वास्थ्य कर्मियों के क्षमता निर्माण और स्वास्थ्य ढांचे में विस्तार करना। उसे मजबूती देना। कोरोना वायरस के चलते सर्वाधिक मार देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ी है। हर राज्य को प्रतिदिन हजारों करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसलिए भी इस समस्या से यथाशीघ्र निपट लेने में ही भलाई है। और यह सब तभी मुमकिन है जबतक देश में बड़े पैमाने पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और इस निमित्त सभी परामर्शों का पालन किया जाए।
दवा नियामक भारतीय औषधि महानियंत्रक ने स्विट्जरलैंड की एक कंपनी समेत 14 निजी कंपनियों को कोरोना वायरस जांच किट की गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए लाइसेंस दिया है। रोशे डायग्नोस्टिक्स इंडिया के अलावा बाकी 13 कंपनियां भारतीय हैं। इनमें अहमदाबाद के सारा डायग्नोस्टिक्स और चेन्नई की सीपीसी डायग्नोस्टिक्स शामिल हैं। ये सभी कंपनियां जांच किटों की गुणवत्ता का मूल्यांकन करेंगी और डीसीजीआई को अपना डाटा जमा कराएंगी। कुल मिलाकर जिस तरह से कोरोना से जूझने की तैयारी है, उसे बनाए रखने में ही देश का कल्याण है।
(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)


 
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