लेख

Blog single photo

पैसे कमाओ पर बिल गेट्स से कुछ सीख लो

21/03/2020

आर.के.सिन्हा

संसार के सर्वाधिक धनी इंसान बिल गेट्स का अपने हाथों से बनाई और खड़ी की गयी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक मंडल से इस्तीफा देकर पूरी तरह से अपना बचा जीवन मानव सेवा में झोंक देने का फैसला करना कोई सामान्य घटना नहीं है। धन कुबेर तो हर काल में पैदा होते और मरते रहे हैं और नए-नए बनते भी रहेंगे। पर बिल गेट्स जैसे भामाशाह बिरले ही होते हैं। गेट्स की दिली चाहत है कि वे अपने शेष जीवन में स्वास्थ्य, विकास और शिक्षा जैसे सामाजिक और लोक परोपकारी कार्यों पर ही अधिक ध्यान दें। जरा बताइये कि हाल के दौर में कितने उद्यमी या राजा-महाराजा इस तरह अपनी गाढ़ी कमाई को लुटाने के लिए समाजसेवा में पूरी तरह से जुट गए हों? दुनिया के किस देश का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बिल गेटस से मिलना नहीं चाहता? पर उन्हें यह मुकाम मात्र इसलिए नहीं मिला है कि वे धनी हैं। उन्हें यह सम्मान इसलिए भी मिलता है क्योंकि अब वे एक तरह से विश्व नागरिक बन चुके हैं। वे समूचे विश्व से गरीबी और निरक्षरता खत्म करना चाहते हैं। गेट्स की हार्दिक इच्छा है कि दुनिया सेहतमंद हो।

भारत में कैसे सक्रिय बिल गेट्स

बिल गेट्स की संस्था "बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन" भारत में भी लंबे समय से काम कर रही है। इस संस्‍था ने अबतक भारत में दो बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। संस्था बीमारी और गरीबी से उबरने में भारत की मदद करती है। बिल गेट्स भारत में कुपोषण के शिकार बच्‍चों को देखकर दुखी हो जाते हैं। बिहार और उत्‍तर प्रदेश के इलाकों में फांउडेशन काफी सक्रिय है। बिल खुद कहते हैं कि बिहार और उत्‍तर प्रदेश जैसे विशाल राज्‍यों में विकास के लिए काफी कुछ करना शेष है। बिल गेट्स पिछले साल पटना आए थे। तब बिल गेट्स की बिहार के मसलों पर जानकारी और समझदारी से सभी प्रभावित और चमत्कृत हुए थे। बिहार बिल की पत्नी के भी दिल के करीब है। वह भी चाहती हैं कि बिहार के सभी बच्चे स्वस्थ रहें और अच्छी शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम हों। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उनका फाउंडेशन राज्य सरकार के साथ काम मिलकर लगातार काम कर भी रहा है।

गेट्स का बेदाग जीवन

बिल गेट्स अपने जीवन के हर पल को सार्थक बनाने में जुटे रहते हैं। बेशक मानव जीवन क्षणभंगुर हो, फिर भी इंसान को अपने सत्कर्मों से ही उसे  सार्थक बनाने का अवसर ईश्वर प्रदान करते हैं। अंधकार का साम्राज्य चाहे कितना भी बड़ा हो पर एक कोने में पड़ा छोटा-सा दीपक अपने अंत समय तक अंधेरे से मुकाबला तो करता ही रहता है। अब देखिए कि फूलों का जीवन कितना छोटा-सा होता है पर वो अपने सुगंध देने के धर्म का निर्वाह तो करते ही हैं। गेट्स ने अपने जीवन को फूलों और दीपक जैसा जाने-अनजाने में बना ही लिया है। वे सदैव बेहतर कर्म करते रहना चाहते हैं। गेट्स दम्पति का जीवन बेदाग रहा है। उनकी कंपनी माइक्रोसाफ्ट पर कभी किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगा है। उनपर कभी किसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान से धन लेने के बाद उसे वापस न करने का भी कोई आरोप नहीं लगा है। आप जानते हैं कि हाल के दौर में कितने भारतीय उद्यमियों ने जल्दी-जल्दी पैसा कमाने के फेर में कितने भयंकर पाप किए हैं। इस तरह के दागदार उद्यमियों की सूची तो बहुत लंबी है।

क्या कभी किसी ने बिल गेट्स या फेसबुक के फाउंडर चेयरमैन मार्क जुकरबर्ग पर भी किसी के साथ धोखाधड़ी के आरोप लगते सुने हैं? ये दोनों भी अपनी कंपनियों को नई दिशा देते हुए कल्याणकारी योजनाओं के लिए करोड़ों डॉलर दान में देते रहे हैं। इसीलिए तो ये संसार भर में आदरणीय व्यक्तित्व की हैसियत पा चुके हैं।

गेट्स ने स्वयं कभी गरीबी नहीं देखी। इसके बावजूद वे गरीब देशों में स्वास्थ्य की स्थिति को सुधारने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। वे हर साल अरबों डॉलर का दान देते हैं ताकि दुनिया रोग मुक्त हो। गेट्स पोलियो के खिलाफ सघन अभियान चलाते रहते हैं। उनके जैसे ही मार्क जुकरबर्ग भी हैं। उन्होंने भी कुछ समय पहले ही अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर 12 अरब डॉलर (करीब 77,800 करोड़ रुपये) जुटाए। इस धन का इस्तेमाल अब विश्व भर के गरीब देशों में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक कार्यों के लिए ही हो रहा है। गेट्स या जुकरबर्ग के पास नकारात्मक सोच का वक्त ही नहीं है। भारत के सभी कारोबारियों को बिल गेट्स या जुकरबर्ग जैसों शख्सों से प्रेरणा लेनी चाहिए। ये अब बिना कहे विश्व नागरिक का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। ये सही माने में "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के विचार को मानते हैं और अक्षरशः पालन करते हैं। 

मुझे पद्मभूषण स्वर्गीय डॉ. गोपाल दस "नीरज" की पंक्तियाँ याद आ रही हैं- "जो कुछ भी लुटा रहे हो तुम यहाँ, वही तो तुम्हारे साथ जायेगा । जो कुछ भी छुपाकर रखा है तिजोरी में वह तो कोई काम नहीं आयेगा।" शायद बिल गेट्स या जुकरबर्ग ने कभी नीरज दादा को न तो देखा होगा, न ही सुना होगा। पर, काम तो ये वही कर रहे हैं।

भारत में गेट्स जैसा कौन

भारत में बिल गेट्स की शख्सियत से मिलता-जुलता इंसान विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी एवं शिव नाडार हैं। अजीम प्रेमजी शिक्षण संस्थाओं के विकास के लिए दान करने वालों में अग्रणी हैं। दलित समुदाय से संबंध रखने के बाद भी नडार आगे गए। भारत के उद्योग संसार में पिछड़ी जाति के उद्यमी काफी कम हैं। शिव नाडार एक प्रमुख उद्यमी एवं समाजसेवी हैं। वे एचसीएल टेक्नोलॉजीज के अध्यक्ष एवं प्रमुख रणनीति अधिकारी हैं। शिव नाडार देश के सबसे धनी उद्यमियों में माने जाते हैं। पाँच देशों में, 100 से ज्यादा कार्यालय, 30 हजार से ज्यादा कर्मचारी-अधिकारी और दुनिया भर के कंप्यूटर व्यवसायियों, उपभोक्ताओं का विश्वास- शिव नाडार अगर सबकी अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं तो इसके केंद्र में उनकी मेहनत, योजना और सूझबूझ ही है। शिव ने 1976 में राजधानी के एक आवासीय इलाके के गैरेज में एचसीएल इंटरप्राइजेज की स्थापना की, तो 1991 में वे एचसीएल टेक्नोलॉजी के साथ बाजार में एक नए रूप में हाजिर हुए। एचसीएल को उत्कर्ष तक ले जाने के पीछे शिव नाडार की लीडरशिप प्रमुख है। तमिलनाडु में पहले नौकरी छोड़ना और बाद में दिल्ली में डीसीएम समूह की बढ़िया नौकरी को पाना और फिर ठोकर मारने का साहस नाडार ही कर सकते थे। लेकिन वे न सिर्फ कामयाब हुए, बल्कि उन्होंने साथियों और निवेशकों का भरोसा भी जीता। शिव बड़े परोपकारी भी हैं। वे शिक्षा को लेकर बेहद गंभीर रहते हैं। गरीब बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना उनकी शीर्ष प्राथमिकता है। शिव नाडार ग्रामीण भारत के सबसे गरीब गांवों से प्रतिभाशाली बच्चों को चुनकर बोर्डिंग स्कूल भेजते हैं।

शिव नाडर शिक्षण संस्थाओं के विकास के लिए 3,000 करोड़ रुपये दान दे चुके हैं। यह राशि उनके द्वारा संचालित शिव नाडर फाउंडेशन के तहत खर्च की गई। शिव का लंबी अवधि में फाउंडेशन की गतिविधियों के विस्तार पर एक अरब डॉलर का निवेश करने का मन है। शिव नाडार फाउंडेशन के तहत उत्तर प्रदेश में विद्याज्ञान स्कूल व शिव नाडार यूनिवर्सिटी और तमिलनाडु में एसएसएन इंस्टीट्यूशन चलाए जा रहे हैं। बहरहाल, एक बात साफ है कि संसार को बिल गेट्स और शिव नाडार सरीखे सैकड़ों परोपकारी उद्यमियों की बड़ी संख्या में दरकार है।

(लेखक राज्यसभा सदस्य हैं।)


 
Top