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शिकंजे में चिदंबरम

28/08/2019

शिकंजे में चिदंबरम

 बद्रीनाथ वर्मा

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का ही परिणाम है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ़्तारी। अग्रिम जमानत याचिका खारिज किये जाने के बाद सरकार का यह खौफ ही था कि कानूनी दांवपेंच के माहिर खिलाड़ी चिदंबरम जैसे धाकड़ वकील को मोबाइल बंद कर छिपने पर मजबूर कर दिया।बावजूद इसके गिरफ़्तारी से बच नहीं सके। आखिर क्यों हुई चिदंबरम की गिरफ़्तारी और क्या हैं उन पर आरोप? क्यों दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें आईएनएक्स मीडिया मामले का किंगपिन (मुख्य सरगना) करार दिया? इन्हीं सब सवालों के जवाब तलाशती इस बार की आवरण कथा।

 क्त बदलते देर नहीं लगती। वक्त का पहिया जब घूमता है तो बड़े बड़े तुर्रम खान बेदम नजर आने लगते हैं। वक्त वक्त की बात है। आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई की गिरμत में आये पी चिदंबरम की बतौर देश के गृहमंत्री आज के गृहमंत्री अमित शाह को जेल भिजवाने के लिए साजिश दर साजिश रचने में प्रमुख भूमिका रही है। वक्त ने करवट बदला और आज अमित शाह देश के गृहमंत्री व चिदंबरम सीबीआई की रिमांड पर हैं। इसे यूं भी कह सकते हैं कि अब जाकर ऊंट पहाड़ के नीचे आया है। कानून की बारीकियों पर गहरी पकड़ रखने वाले चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका जैसे ही हाईकोर्ट ने उन्हें घोटाले का किंगपिन (मुख्य सरगना) बताते हुए खारिज की उनके हाथ पांव फूल गये। गिरफ़्तारी से बचने के लिए भागे-भागे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन नामी गिरामी वकीलों की भारी भरकम फौज के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद गिरफ़्तारी का डर ऐसा समाया कि सुप्रीम कोर्ट से लौटते हुए बीच रास्ते अपने क्लर्क व ड्राइवर को उतारा और अपना दोनों मोबाइल नंबर स्वीच आॅफ कर चंपत हो गये। इसके बाद सीबीआई व ईडी तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें खोज नहीं पाई। मजबूर होकरजोरबाग स्थित उनके घर पर एजेंसियों के सामने पेश होने के लिए नोटिस भी चिपकाई गई। लेकिन यह भी बेकार गया। अंतत: जांच एजेंसियों से लगातार 27 घंटों तक लुकाछिपी खेलने के बाद चिदंबरम प्रकट हुए। वह भी कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए। इसमें उन्होंने अपने आपको निर्दोष बताते हुए अपने गायब होने के पीछे कानूनी तैयारी करने का बहाना बनाया। प्रेस कांफ्रेंस करने के बाद जैसे ही वे अपने घर पहुंचे पीछे-पीछे सीबीआई व ईडी की टीम भी पहुंच गई। उनके घर का दरवाजा खोलवाने की चेष्टा व्यर्थ होने के बाद दीवार फांदकर अफसर अहाते में दाखिल हुए। अफसरों ने वहां मौजूद कांग्रेस नेता व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल व अभिषेक मनु सिंघवी की मौजूदगी में चिदंबरम से कुछ देर की पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें गिरμतार कर लिया गया। इस दौरान जमकर हाईवोल्टेज ड्रामा हुआ।


कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए उत्पात मचाने की कोशिश की। लेकिन दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी ने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया। बहरहाल, वित्तमंत्री के रूप में आईएनएक्स मीडिया के जरिए अपने पुत्र कार्ति चिदंबरम की संपत्ति में इजाफा कराने के लिए सीबीआई के चंगुल में फंसे चिदंबरम एक वक्त अपने राजनीतिक विरोधी अमित शाह को फंसाने के लिए सारी हदे लांघ गये थे। नॉर्थ ब्लॉक स्थित गृहमंत्री कार्यालय में बैठकर आतंकी इशरत जहां को निर्दोष बताने के लिए नई फाइल तैयार करवा रहे थे और साबरमती जेल में बंद अमित शाह अपने बचाव की फाइल में रोज ही नए पन्ने जोड़ रहे थे। संयोग देखिए कि आज तस्वीर बिल्कुल उल्टी है। अमित शाह बाइज्जत बरी हो चुके हैं और अब तक कानून को चकमा देते आये चिदंबरम अपने किये की सजा भुगतने की राह पर हैं। कल को भले ही उन्हें जमानत मिल जाये लेकिन उनकी गिरफ़्तारी आईएनएक्स मीडिया घोटाले में संलिप्तता का जीता जागता प्रमाण है। यहां यह भी याद रखा जाना चाहिए कि अमित शाह के गृहमंत्री होने का खौफ ही था कि चिदंबरम रातोंरात लापता हो गये थे। कभी देश के सबसे ताकतवर मंत्री रहे चिदंबरम का ये हश्र भी होगा, कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था।


भ्रष्टाचारी जाएंगे जेल इसी साल 31 मार्च को तालकटोरा स्टेडियम में मैं भी चौकीदार कैंपेन की शुरूआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि आपकी मदद से मैं इन लोगों (भ्रष् टाचारियों) को जेल के दरवाजे तक ले गया हूं। कोई जमानत पर है, कोई अभी डेट ले रहा है। लोग चक् कर काट रहे हैं। पुराने अफसर गए और नए आए हैं तो कागज भी हाथ लगने लगे हैं। बराबर मामला सीधी दिशा में जा रहा है। वर्ष 2014 से अब तक मैं उन् हें जेल के दरवाजे तक ले गया हूं लेकिन वर्ष 2019 के बाद…(इशारे में कहा, जेल भेजूंगा।)

बहरहाल, दिल्ली की राउज ऐवेन्यू कोर्ट ने पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम के बचाव में उतरे कपिल सिब्बल व अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों को खारिज करते हुए उन्हें 4 दिन की रिमांड पर सीबीआई को सौंपने का फैसला दिया। जज अजय कुमार कुहाड़ की अदालत में सुनवाई के दौरान पी. चिदंबरम के वकीलों ने उन्हें जमानत देने की मांग करते हुए तमाम दलीलें दीं, लेकिन कोर्ट ने सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों को तरजीह दी। मेहता ने चिदंबरम के लिए 5 दिन की रिमांड मांगते हुए कहा था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसलिए उनसे अभी और पूछताछ किए जाने की जरूरत है। मेहता की दलील थी कि चिदंबरम खासे चतुर हैं और वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे। वैसे चिदम्बरम मार्च 2018 से लगातार अपनी गिरफ़्तारी पर रोक का आदेश हासिल कर रहे थे। मगर इस बार किस्मत जवाब दे गई। सीबीआई व ईडी के पास उनके खिलाफ ठोस सबूत हैं। विदेशों में परिवार के नाम हजारों करोड़ों की संपत्ति के कागज हैं। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक उनके पास तीन अरब रुपये के आसपास मूल्य की अवैध संपत्ति है। चिदंबरम के खिलाफ आईएनएक्स मीडिया और फिर एयरसेल-मैक्सिस के मामले में एफआईपीबी नियमों को तोड़ मरोड़ कर सैकड़ों करोड़ का फायदा पहुंचाने और उसका एक बड़ा हिस्सा बेटे कार्ति की कंपनी तक पहुंचाने के पक्के सबूत हैं। ये सब तब हो रहा था जब चिदंबरम देश के वित्तमंत्री थे।


मेरे पिता की गिरफ़्तारी राजनीति से प्रेरित व बदले की कार्रवाई है। टीवी के रियलिटी शो की तरह हुई गिरफ़्तारी अनुच्छेद 370 के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए की गई है। – कार्ति चिदंबरम

वैसे कांग्रेस में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरने वाले पी चिदंबरम अकेले नेता नहीं हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा से लेकर मोतीलाल वोरा तक लंबी फेहरिश्त है। खुद पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी जमानत पर चल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी कई भाषणों में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के जमानत पर बाहर होने पर चुटकी भी लेते रहे हैं। संसद के बीते बजट सत्र के दौरान जब कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने कहा था कि भ्रष्टाचार के मामले हैं तो गिरμतार क्यों नहीं करते, तब पीएम मोदी ने हंसते हुए कहा था- जमानत पर हैं तो एन्जॉय करिए। गौरतलब है कि विदेशी निवेश की आड़ में फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) में चल रहे ‘खेल’ का खुलासा 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के दौरान एयरसेल-मैक्सिस डील की जांच से होनी शुरू हुई। इस डील में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी टीम का ध्यान मैक्सिस से जुड़ी कंपनियों से तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनियों में पैसे आने पर गया। जब ईडी मामले की तह तक पहुंची तो इस केस में घूसखोरी की परतें एक के बाद एक खुलती चली गईं। बेटी की हत्या के जुर्म में सजा काट रही आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी के सरकारी गवाह बनने के बाद चिदंबरम पर शिकंजा कसना शुरू हो गया। उल्लेखनीय है कि एफआईपीबी ने आईएनएक्स को मई 2007 में 4.62 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश के लिए स्वीकृति दी थी।

रिश्वत के पैसों से विदेशों में करोड़ों की संपत्ति जांच एजेंसियों का दावा है कि चिदंबरम और उनके परिवार ने शेल कंपनियों में करोड़ों रुपये का निवेश किया और उसी के जरिए विदेशों में निजी संपत्तियां खरीदीं। इनमें मलयेशिया, यूके और स्पेन में महंगी और आलीशान संपत्ति खरीदी। ईडी के सूत्रों के मुताबिक भारत में चिदंबरम की शेल कंपनी में 300 करोड़ रुपये एक और शेल कंपनी ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड ने निवेश किए। इस शेल कंपनी के 2 डायरेक्टर स्कूल टीचर और उनके पति हैं। दोनों से जांच एजेंसियों ने लंबी पूछताछ की। इस डायरेक्टर दंपति से कहा गया कि वह अपनी एक वसीयत बनाएं जिसमें सारी संपत्ति कार्ति की पुत्री के नाम ट्रांसफर कर दें।

इसमें स्पष्ट किया गया था कि कंपनी में ‘डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट’ के लिए अलग स्वीकृति की जरूरत होगी। डाउनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट एक भारतीय कंपनी की ओर से अन्य में सब्सक्रिप्शन या शेयर्स खरीदने के जरिए इनडायरेक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट होता है। खैर, 4.62 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की अनुमति मिली थी लेकिन वित्तमंत्री चिदंबरम की कृपा से अनियमितता बरतते हुए आईएनएक्स ने 305 करोड़ रुपये से अधिक का एफडीआई हासिल किया। आरोप है कि इसके लिए कंपनी की ओर से चिदंबरम के बेटे कार्ति को 50 करोड़ रुपये दिये गये। मामले का खुलासा होने के बाद 15 मई 2017 को सीबीआई ने एफआईपीबी की अनियमितता के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।

ईडी भी लाइन में
अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बड़े संकट से गुजर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी
चिदंबरम के खिलाफ जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सीबीआई के बाद प्रवर्तन निदेशालय
(ईडी) भी चिदंबरम से पूछताछ करने वाला है। प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई की जांच की दिशा
एफआईपीबी अप्रूवल को लेकर है। एफआईपीबी ने डिएगो स्कॉटलैंड लिमिटेड, कटारा होल्डिंग्स, एस्सार
स्टील लिमिटेड और एल्फोर्ज लिमिटेड को अप्रूवल दिया और जांच एजेंसियां इन सभी की जांच कर रही
हैं। आईएनएक्स मीडिया केस में पैसा कथित तौर पर फर्जी कंपनियों में लगाया गया। ये सभी फर्जी कंपनिया                             चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पर आरोप है कि एयरसेल मैक्सिस

केस और आईएनएक्स मीडिया से उन्होंने करीब 300 करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर लिए।

एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्डरिंग ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया था। तबसे ही कानूनी दांवपेंच का इस्तेमाल कर चिदंबरम जांच एजेंसियों को झांसा देते आ रहे थे लेकिन आखिरकार उनके सारे दांवपेंच धरे के धरे रह गये और अब वे सीबीआई की रिमांड पर हैं। चिदंबरम की गिरफ़्तारी से पहले और बाद में भी कांग्रेस की ओर से इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। लेकिन यहां भी उसकी दाल गलती दिखाई नहीं दे रही है। बता दें कि इसी केस में उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम को भी फरवरी 2018 में 23 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था। कार्ति पर भारत ही नहीं विदेशों में भी एक साथ कई शेल कंपनियां चलाने का आरोप। इन्हीं फर्जी कंपनियों के जरिए भारत और विदेशों में कार्ति के 2 दर्जन से अधिक विदेशी अकाउंट में रिश्वत का पैसा ट्रांसफर किया गया। 


 
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