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कोरोना की विभीषिका और शाहीनबाग का प्रदर्शन

17/03/2020

योगेश कुमार सोनी

कोरोना वॉयरस से पूरा विश्व प्रभावित है। हर देश इससे बचने का अथक प्रयास कर रहा है लेकिन हमारे देश में शाहीनबाग के प्रदर्शनकारियों को इससे होने वाले खतरे का कोई डर नहीं है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना वॉयरस के चलते आदेश जारी कर राज्य में पचास से अधिक लोगों की भीड़ जमा होने पर पाबंदी लगा दी है लेकिन शाहीनबाग के प्रदर्शनकारियों ने इसे मानने से मना कर दिया। देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे वैश्विक संकटकाल में भी लोग गैर जिम्मेदार व्यवहार कर रहे हैं। वक़्त की जरूरत के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें आपसी समन्वय से जब कोरोना के खतरों से निबटने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं तो जनता को भी ऐसे समय में अपने कर्तव्य को समझना जरूरी है।

अबतक के आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या सवा सौ को पार कर चुकी है। संक्रमण को रोकने संबंधी उपायों के चलते सिनेमाघर, शिक्षण संस्थान के अलावा तमाम भीड़भाड़ वाली जगहों को 31 मार्च तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। हिन्दुस्तान की विशाल जनसंख्या को देखते हुए तेजी से फैलते कोरोना के खतरों से बचाव के लिए जाहिर है कि हमें अन्य देशों की अपेक्षा अतिरिक्त एहतियात बरतने की जरूरत है। यदि हम बचाव के उपायों को गंभीरता से लेंगे तो एकजुट होकर ऐसे खतरों से निबटना काफी हद तक संभव है। ऐसा नहीं होने पर चीन जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा पैदा हो सकता है। इस वायरस की वजह से हर देश को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है लेकिन इस जानलेवा महामारी से निबटने के लिए हर जरूरी प्रबंध करने में कोई भी पीछे नहीं है।

दरअसल, हमारे देश में हर मुद्दे पर राजनीति होती है। हम क्यों भूल जाते हैं कि कुछ मुद्दे बेहद संवेदनशील होते हैं। क्या जिंदगी से बढ़कर हो सकता है किसी भी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन? हम यह भूल जाते हैं कि इसमें भलाई हमारी ही है और जब कुछ बर्बाद होता है तो आरोप सिस्टम और सरकार पर मढ़ा जाता है। पिछले लगभग तीन महीने से शाहीन बाग का प्रदर्शन पूरे देश में आग की तरह काम कर रहा है। वहां के प्रर्दशनकारियों पर पैसे लेकर बैठने का आरोप भी लगा था। कुछ लोगों का मानना है कि यह कौन लोग हैं जो इतने दिनों से काम पर नहीं जा रहे हैं और इनका घर कैसे चल रहा है।

बहराहल, कोरोना वायरस के रूप में हमारे सामने जिंदगी का खतरा उत्पन्न हो गया है तो हमें इसके खिलाफ सामूहिक रूप से लड़ने की सख्त आवश्यकता है। यदि वहां बैठा कोई भी एक प्रदर्शनकारी इसकी चपेट में आ गया तो वहां सबकी जिंदगी दांव पर लग जाएगी। पूरी दिल्ली और देश में इसे फैलते देर नहीं लगेगी। जहां एक ओर शासन-प्रशासन कोरोना वॉयरस को लेकर हर कदम संभलकर रख रहा है वहीं दूसरी ओर हम ऐसा व्यवहार करके खुद का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।

इसके अलावा एक अहम बात और कि हमारे देश में ऐसी बीमारियों के इलाज के नाम पर बहुत से लोग सक्रिय हो जाते हैं जो झाड़-फूंक तरह-तरह के नुस्खे बताकर स्थिति को और भी पेचीदा बनाने से बाज नहीं आते। हमें झाड-फूंक से लेकर उतारा करने वाले इस तरह के लोगों के चक्कर में आने से बचना होगा। यदि आपको अपने स्वास्थ को लेकर कुछ भी गड़बडी महसूस हो तो डॉक्टरों पास जाएं। किसी के बहकावे में न आएं।

हाल ही में कोरोना संदिग्ध बेटी को बचाने के चक्कर में पिता पर केस दर्ज हुआ है। लड़की को छुपाने और प्रशासन को गुमराह करने के आरोप में आगरा में 123 साल पुराने महामारी कानून के तहत रेलवे अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस ऐक्ट के तहत यह पहली कार्रवाई है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि शासन-प्रशासन युद्धस्तर पर कार्य कर रहा है लेकिन शाहीन बाग के प्रर्दशनकारी स्थिति की गंभीरता नहीं समझ रहे। यदि वहां समझाया भी जा रहा है तो वह इसे सरकार की साजिश समझते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

(लेखक पत्रकार हैं।)


 
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