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पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के सामने उठाया जम्मू-कश्मीर का मुद्दा

08/08/2019

कृष्ण कुमार

न्यूयॉर्क/ इस्लामाबाद, 08 अगस्त ( हि.स.) पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के सामने उठा दिया है। इस वैश्विक संस्था में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने संयुक्त राष्ट्र को भारत के फैसले की जानकारी दी

मलीहा लोधी ने कहा, ''आज मैंने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस के चीफ स्टाफ मारिया लुईसा रिबेरो वियोटी से मुलाकात की उनके सामने कश्मीर पर भारत के फैसले के बारे में जानकारी दी और कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का अनुपाल कराने के लिए संयुक्त राष्ट्र को दखल देना चाहिए।''

समाचार पत्र डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने गुरुवार को यह ऐलान किया कि पाकिस्तान जम्मू एवं कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाएगा।

इस्लामाबाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर विवाद पर पहले से पारित कई संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के आलोक में यह फैसला लिया गया है।

कुरैशी ने नई दिल्ली के इस तर्क को भी खारिज कर दिया है कि भारतीय संविधान की धारा 370 समाप्त करना उसका आंतरिक मामला है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का यह दावा ऐतिहासिक, कानूनी और नैतिक दृष्टिकोण से भी गलत है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने नई दिल्ली के इस दावे को भी खारिज कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद में परिवर्तन कश्मीरियों के कल्याण के मद्देनजर किया गया है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि वह क्या चीज थी जो 70 साल से नई दिल्ली को इस तरह के कदम उठाने से रोक रही थी। कुरैशी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कश्मीरियों के लिए कल्याणकारी कदम के तहत वहां 9 लाख सुरक्षा बलों को तैनात कर प्रदेश को एक तरह से जेल बना दिया गया है।

कश्मीर में हाल के घटनाक्रमों को आंतरिक मामला बताने को चुनौती देते हुए कुरैशी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के वादों और प्रतिबद्धताओं का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि कश्मीर के भविष्य का अंतत: कश्मीरी ही फैसला करेंगे। नेहरू ने आगे कहा था कि कश्मीर मामले में कोई भारतीय संसद की सद्भावना और खुशी का कोई महत्व नहीं होगा।

दरअसल अब कुरैशी पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू के भाषणों के आलोक में पाकिस्तान के दावे को पुष्ट करना चाहते हैं, लेकिन शायद वह इस बात को भी झुठलाना चाहते हैं कि इस 70 साल क्या –क्या हुए हैं। उन्होंने शिमला समझौता, लाहौर समझौता और कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंकवाद का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने अपनी खाल बचाने के लिए यह नहीं कहा कि बातचीत के जरिए कश्मीर मसला सुलझाने से भारत नहीं , बल्कि पाकिस्तान पीछे हट रहा है और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए आतुर है।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह खबर झूठी है कि पाकिस्तान ने वायु क्षेत्र का एक भाग भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के मद्देनजर बंद कर दिया है। हालांकि उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तनातनी के बावजूद करतारपुर गलियारे का काम समय पर पूरा होगा, क्योंकि पाकिस्तान सभी धर्मों का सम्मान करता है।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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