युगवार्ता

Blog single photo

देश की नई उड़नपरी

30/07/2019

देश की नई उड़नपरी

 बद्रीनाथ वर्मा/ मो. शहजाद

प्रतिभा हो तो सफलता मिलेगी ही, इसे सच साबित कर दिखाया है हिमा दास ने। गांव की गलियों से निकलकर विश्व मंच पर धूम मचा देने वाली हिमा की सफलता हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो सुविधाओं की कमी का रोना रोते रहते हैं। 19 दिनों में पांच गोल्ड मेडल जीतने वाली इसी गोल्डन गर्ल के इर्द-गिर्द इस बार की आवरण कथा।

 सम के एक छोटे से गांव ढिंग से निकलकर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में छा जाने वाली हिमा दास की कहानी किसी परिकथा से कम नहीं है। ढिंग एक्सप्रेस से गोल्डन गर्ल बनी 19 साल की हिमा दास ने 19 दिनों के भीतर पांच गोल्ड मेडल जीतकर सबको दांतों तले अंगुलियां दबाने पर मजबूर कर दिया है। हिमा की यह असाधारण सफलता साबित करती है कि अगर मन में लगन हो तो कोई भी काम असाध्य नहीं है। अगर पूरी शिद्दत के साथ कोई काम किया जाय तो सफलता झख मारकर कदम चूमेगी। एथलेटिक्स में लगातार गोल्ड हासिल करके हर रोज एक नया इतिहास रचने वाली हिमा दास का नाम आज सभी की जबान पर है। हिमा की उपलब्धियां किसी भी भारतीय को गर्व से भर देने के लिए काफी है। 19 साल की हिमा की कहानी बेहद दिलचस्प है।

तीन सप्ताह के भीतर 5वां स्वर्ण पदक जीतने पर हिमा दास को बधाई। आप अद्भुत हैं। यही प्रदर्शन दोहराती रहें।
रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति


भारत को हिमा दास की पिछले कुछ दिनों की उपलब्धियों पर बहुत गर्व है। हर कोई इस बात से बहुत खुश है कि उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में पांच पदक जीते। उनको बधाई और भविष्य के
प्रयासों के लिए शुभकामनाएं। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

एक गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली हिमा असम के छोटे से गांव ढिंग की रहने वाली हैं। इसीलिए उन्हें ‘ढिंग एक्सप्रेस’ के नाम से भी जाना जाता है। हिमा ने दो साल पहले ही रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा है। हिमा के पिता असम के नौगांव जिले के ढिंग गांव में रहते हैं। मात्र दो बीघा जमीन के मालिक पिता रंजीत दास इसी पर खेती करके अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं। जाहिर है हिमा का बचपन गरीबी में गुजरा है। अभावों के बीच पली बढ़ी हिमा को बचपन में फुटबॉल खेलने का शौक था। वह खेतों में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं और इसी में अपना कैरियर बनाना चाहती थीं लेकिन विधि को कुछ और मंजूर था। सीमित संशाधनों में अपनी प्रतिभा को धार देकर स्वर्णिम यात्रा पर निकली हिमा ने अभी हाल ही में प्रथम श्रेणी से इंटरमीडिएट पास की है। पिता रंजीत दास व मां जोनाली दास की चार संतानों में सबसे छोटी हिमा की प्रतिभा को 2014 में एक इंटर स्कूल दौड़ प्रतियोगिता के दौरान जवाहर नवोदय विद्यालय के पीटी टीचर शमशूल हक ने सबसे पहले पहचाना। शमशूल हक ने हिमा का परिचय नगांव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर राय से कराई। एसोशिएशन की तरफ से हिमा ने जिला प्रतिस्पर्धा में भाग लिया और दो स्वर्ण पदक जीत लिए। पैसों की कमी की वजह से उसके पास अच्छे जूते भी नहीं थे।

गोल्डन गर्ल की उपलब्धियां
 अप्रैल 2018 में गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों की 400 मीटर स्पर्धा में 51.32 सेकंड में दौड़ पूरी करते हुए छठवां स्थान प्राप्त किया।
 जुलाई 2018 में फिनलैण्ड में आयोजित आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 चैम्पियनशिप में 400 मीटर दौड़ जीत कर अंतरराष्ट्रीय ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय धावक बनीं।
 2018 एशियाई खेलों की 400 मीटर वर्ग के लिए क्वलिफाई करते हुए 51.00 में दौड़ पूरी करने का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
 26 अगस्त 2018 को इन्हीं खेलों में 400 मीटर के अपने राष्ट्रीय रिकॉर्ड में बेहतरी करते हुए 50.79 सेकंड में पूरा किया और रजत पदक जीता।
 30 अगस्त 2018 को एशियाई खेलों में 4100 मीटर रिले दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला टीम का वह हिस्सा रहीं।
 2 जुलाई 2019 को पोलैण्ड में आयोजित पोज्नान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में 200 मीटर का स्वर्ण पदक जीता।
 7 जुलाई 2019 को पोलैण्ड के ही कुटनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर का गोल्ड मेडल हासिल किया।
 13 जुलाई 2019 चेक गणराज्य की क्लांडो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर दौड़ में स्वर्णिम सफलता हासिल की।
 17 जुलाई 2019 को चेक गणराज्य में टाबोर एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस का गोल्ड मेडल जीता।
 20 जुलाई 2019 को चेक गणराज्य के नोवे मेस्टो में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। 

बावजूद इसके जिला स्तर की 100 और 200 मीटर की स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता तो हर कोई हैरान रह गया। हिमा की इस धमाकेदार जीत ने ‘स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयर’ के निपोन दास को काफी प्रभावित किया। उन्होंने हिमा के माता-पिता से मिलकर हिमा को गुवाहाटी ले जाने की सहमति ले ली। निपोन दास ने गुवाहाटी में हिमा के सारे खर्चे खुद वहन किए। उस समय तक असम खेल अकादमी में एथलेटिक्स के लिए अलग विंग नहीं था। निपोन दास के गंभीर प्रयासों के बाद पहली बार हिमा के लिए ही अकादमी में एथलेटिक्स विंग बनी। हिमा को नई उड़न परी बनाने वाले उनके कोच निपोन दास के मुताबिक जब पहली बार जनवरी 2018 में उन्होंने हिमा को हवा की तरह दौड़ते देखा, तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। इससे पहले हिमा की उम्र वाली किसी भी लड़की को उतना तेज दौड़ते हुए उन्होंने नहीं देखा था। हिमा की उपलब्धियों से खुद को गौरवान्वित महसूस करने वाले कोच निपोन दास कहते हैं कि उन्हें अपने चयन पर पूरा भरोसा था। वह जानते थे कि यह लड़की एक न एक दिन जरूर देश का नाम रौशन करेगी।

जिस तरह से हिमा दास ने प्रदर्शन किया है उससे मैं बहुत खुश हूं। मैं प्रार्थना करता हूं कि वह आगामी कार्यक्रमों
में अच्छा करें। मुझे उम्मीद है कि वह 2020 ओलंपिक में भी इसी तरह का प्रदर्शन करेंगी। हिमा ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
निपोन दास, कोच

बीते 19 दिनों में आप जिस अंदाज में यूरोपियन सर्किट में दौड़ रही हैं। वह बहुत लाजवाब है। जीत के प्रति आपकी
भूख और जिद युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। 5 पदक जीतने के लिए बधाई। भविष्य में आने वालीं दौड़ों के लिए बधाई हिमा दास।
-सचिन तेंदुलकर, क्रिकेटर

कोच ने शुरू में हिमा को 200 मीटर की रेस के लिए तैयार किया। बाद में वह 400 मीटर की रेस भी लगाने लगी। अन्य खिलाड़ियों की ही तरह हिमा को भी अपने जीवन में हार-जीत के उतार- चढ़ाव से गुजरना पड़ा है। अप्रैल 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा ने 51.32 सेकेंड में छठवां स्थान प्राप्त किया था।

होने लगी दौलत की बारिश
यूरोप में एक महीने के भीतर लगातार पांचवां गोल्ड मेडल जीतकर गोल्डन गर्ल का खिताब हासिल
करने वाली हिमा दास के पास भले ही एक वक्त अच्छे जूते खरीदने तक के पैसे न रहे हों लेकिन
आज तो उन पर दौलत की बारिश हो रही है। महज तीन हμतों के भीतर ही हिमा की विज्ञापन फीस
दोगुना हो गयी है। हिमा के लिए विज्ञापन मैनेज करने वाली स्पोर्ट्स मैनेजमेंट फर्म आईओएस के
मैनेजिंग डायरेक्टर नीरव तोमर के मुताबिक पिछले तीन हμतों में लगातार पांच गोल्ड जीतने जैसा
करतब दिखाने की वजह से हिमा की ब्रैंड वैल्यू दोगुनी हो गई है। पहले एक ब्रैंड के लिए हिमा की
सालाना फीस 30-35 लाख रुपये थी। लेकिन लगातार पांच गोल्ड मेडल जीतने के बाद विज्ञापन
फीस अब 60 लाख रुपये सालाना पहुंच गई है। आईओएस अब हिमा के लिए वॉच ब्रैंड, टायर,
एनर्जी ड्रिंक ब्रैंड, कुकिंग आॅयल और फूड जैसी कैटेगरी के ब्रैंड से नई डील के लिए बात कर
रहा है। फिलहाल, हिमा जिन ब्रैंड का प्रचार कर रही हैं उनमें एडिडास स्पोर्ट्सवियर, एसबीआई,
इडलवाइज फाइनेंशियल सर्विसेज और नॉर्थ-ईस्ट की सीमेंट ब्रैंड स्टार सीमेंट शामिल हैं।

इसके बाद 4400 मीटर स्पर्धा में सातवें स्थान पर संतोष करना पड़ा। जब गुवाहाटी में अंतरराज्यीय स्पर्धा हुई तो हिमा ने गोल्ड मेडल जीत लिया। इसके बाद पिछले साल जकार्ता में 18वें एशियन गेम्स में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए रजत पदक प्राप्त किया। लेकिन इस साल जो उसने स्वर्णिम दौड़ शुरू किया तो ऐतिहासिक धावक मिल्खा सिंह और उड़न परी के नाम से मशहूर रहीं पीटी उषा को भी पीछे छोड़ दिया है। 400 मीटर की रेस महज 52.09 सेकंड में खत्म करके हिमा वर्ल्ड ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप ट्रैक में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय धाविका बन गई है।

मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं 
हिमा दास की सुनहरी कामयाबी से पूरा देश खुश है। होना भी चाहिए। महज 19 दिनों में 5 सोने के तमगे हासिल करना कोई मामूली बात तो नहीं है। लोग उन्हें जीभर कर बधाइयां और मुबारकबाद दे रहे हैं। उनकी इस कामयाबी पर उनसे लोगों की आशाएं बढ़ती जा रही हैं। और यह स्वाभाविक भी है। ऐसे में लोग अगले साल उनसे टोक्यो ओलंपिक में पदक लाने की उम्मीदें लगाए बैठे हैं। लेकिन क्या यह उनके लिए यह सब इतना आसान होगा। विशेषज्ञों की मानें तो हिमा दास ने जिन मुकाबलों में स्वर्ण पदक जीते हैं, वे अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स स्तर के नहीं हैं। इन पांचों स्पर्धाओं में से दो ई ग्रेड और तीन एफ ग्रेड की थीं। जाहिर है कि इसमें ओलंपिक स्तर के धावक हिस्सा नहीं लेते हैं। साथ ही इन्हें जीतने में हिमा द्वारा लिया गया समय भी मायने रखता है। यह उनके अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से भी अधिक थे। उन्होंने पांच स्वर्ण पदक जरूर जीते हैं लेकिन इससे उन्हें सितंबर माह में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप का टिकट नहीं मिला हे। यही कारण है कि एथलेटिक्स के जानकार उन्हें ओलंपिक खेलों के लिए पूरी तरह से तैयार मानने में अभी भी संकोच कर रहे हैं। बताते चलें कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में 400 मीटर की स्पर्धा का क्वालिफाइंग मार्क 51.80 सेकंड था लेकिन हिमा दास 52.09 पर अटक गईं। इसी तरह 200 मीटर रेस में भी वह एक भी प्रतियोगिता में 23.02 के क्वालिफाइंग मार्क तक पहुंचने में नाकाम रहीं। यही नहीं ओलंपिक के क्वालिफाइंग मार्क तो और मुश्किल हैं। उसमें 200 मीटर के लिए 22.80 सेकंड और 400 मीटर वर्ग के लिए 51.35 सेकंड के मानक तय हैं। अलबत्ता वह 2018 एशियाई खेलों में 400 मीटर रेस को 50.79 सेकंड में पूरा करने का जो कारनामा अंजाम दे चुकी हैं, उससे यह लक्ष्य बहुत मुश्किल भी नहीं लगते हैं।

हिमा इसके पहले और चार गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी है। हिमा की इस बेहतरीन उपलब्धि पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी ट्वीट कर बधाई दी। यही नहीं ‘तुम्हारी जीत की भूख युवाओं के लिए प्रेरणा है’ कहते हुए मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर हिमा की इस अविश्वसनीय जीत से अभिभूत दिखे। गौरतलब है कि हिमा ने इसी महीने अपने स्वर्णिम दौड़ की शुरुआत करते हुए 19 दिनों के भीतर पांच स्वर्ण पदक जीत लिए। दो जुलाई को यूरोप में, सात जुलाई को कुंटो ऐथलेटिक्स मीट में, 13 जुलाई को चेक गणराज्य में और 17 जुलाई को टाबोर ग्रां प्री में अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण जीता। 20 जुलाई को कॉमनवेल्थ गेम्स में हिमा ने वर्ल्ड ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप ट्रैक कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया और जीत दर्ज की।


 
Top