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सरसंघचालक भागवत ने जन्मदिन पर 123 वर्षीय संत से लिया आशीर्वाद

11/09/2019

डॉ ईश्वर बैरागी
जयपुर, 11 सितम्बर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बुधवार को अलवर जिले के गहनकर गांव पहुंचे। उन्होंने अपने जन्मदिन (11 सितम्बर) के अवसर पर 123 वर्षीय बाबा कमलनाथ महाराज का आशीर्वाद लिया। गहनकर गांव में बाबा का आश्रम है, जहां देश-विदेश से लोग कैंसर और अन्य असाध्य रोगों की दवा के लिए आते हैं।  

डॉ. भागवत जयपुर से रवाना होकर सुबह करीब 11 बजे बाबा कमलनाथ के आश्रम पहुंचे। डॉ. भागवत का ग्राम विकास समिति ने अभिनंदन किया। उन्होंने बाबा कमलनाथ महाराज के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। डॉ. भागवत ने कमलनाथ महाराज के साथ आध्यात्मिक एवं सामाजिक विषयों पर मंत्रणा की। इसके बाद डॉ. भागवत ने वहां उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में बाबा कमलनाथ महाराज जैसे संत-महापुरुष मौजूद हैं। इनकी त्याग-तपस्या के चलते समाज जीवन के क्षेत्र में अनेकों परिवर्तन हुए हैं। ऐसे में समाज के सभी लोगों को ऐसे महापुरुषों के अनुभवों का लाभ लेना चाहिए। हमारे बीच बाबा कमलनाथ महाराज जैसी महान विभूतियां मौजूद हैं। समाज को इनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। 

इस अवसर पर बाबा कमलनाथ महाराज ने कहा कि मैं वर्षों से देखता आ रहा हूं कि संघ के स्वयंसेवक समाज में अनेकों सेवा कार्य करते हैं। स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य समाज के लोगों के लिए आदर्श व प्रेरणादायी बन रहे हैं, समाज को भी इसका लाभ मिल रहा है। जिस दिन हिन्दू जागृत होकर संगठित हो जाएगा, हमारा देश स्वर्ग बन जाएगा। उन्होंने गौ हत्या प्रतिबंधित करने और नशाबंदी की बात भी कही। इस दौरान अलवर के भाजपा सांसद बाबा बालकनाथ ने सरसंघचालक डॉ. भागवत और बाबा कमलनाथ को स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया।

इस अवसर पर संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख शंकरलाल, क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास, सह-क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम, प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र, विभाग प्रचारक मुकेश कुमार समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे। डॉ. भागवत ने वहां से जयपुर लौटते वक्त बहरोड स्थित गौशाला में गाय को गुड़ खिलाया। डॉ. भागवत का जन्म 11 सितम्बर 1950 को महाराष्ट्र (तब बॉम्बे स्टेट) के चंद्रपुर जिले में हुआ था।

कैंसर के उपचार के लिए विख्यात हैं बाबा कमलनाथ 
मूलरूप से बिहार के गोविंदपुर में 1896 को जन्मे बाबा कमलनाथ करीब 80 साल पहले तिजारा के जंगलों में आकर रहने लगे और 1965 में गहनकर गांव आए। 1980 के दशक में उन्होंने आश्रम की स्थापना की और पिछले करीब 30 वर्षों से आश्रम में रहकर लोगों को असाध्य रोगों की दवा दे रहे हैं। बाबा कमलनाथ नशे के प्रखर विरोधी हैं। आश्रम में प्रमुख रूप से कैंसर की दवा के अलावा मिर्गी, हार्ट अटैक, बीपी, टीबी के उपचार की जड़ी बूटियों से निर्मित दवाओं का वितरण होता है। आश्रम में देश के कई राज्यों के अलावा विदेशों से भी लोग दवा लेने के लिए आते हैं। बाबा आश्रम में जड़ी बूटियों से कैंसर के मरीजों का निःशुल्क उपचार करते हैं।  

हिन्दुस्थान समाचार


 
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