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काली सूची में पाकिस्तान

28/08/2019

काली सूची में पाकिस्तान

युगवार्ता डेस्क

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। यह झटका ऐसा है जिससे उसकी कमर ही टूट सकती है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को ग्रेलिस्ट से हटाकर सीधे ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है। यह भारत की एक और बड़ी कूटनीतिक सफलता है। आॅस् ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में संपन्न एफएटीएफ की एशिया प्रशांत इकाई की बैठक में यह फैसला लिया गया।
यह संस्था अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की फंडिंग की निगरानी करती है। पाकिस्तान के खिलाफ यह कार्रवाई आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में नाकाम रहने पर की गई है। एफएटीएफ ने पाकिस्तान से जमात-उद-दावा, फलाही-इंसानियत, लश्कर-ए-तैयबा, जैशए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों की फंडिंग पर कड़ाई से लगाम लगाने को कहा था। लेकिन आदत से लाचार पाकिस्तान आतंकियों का पनाहगाह बना रहा। इसी का नतीजा है उसका ब्लैकलिस्टेड होना। एफएटीएफ की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों को फंडिंग से जुड़े 40 में से 32 मानकों पर पाकिस्तान फेल पाया गया।
एफएटीएफ की इस कार्रवाई के बाद पहले से ही कंगाली झेल रहे पाकिस्तान की आर्थिक हालात और खराब होना तय है, क्योंकि एफएटीएफ के इस कदम के बाद उसे दुनिया में कर्ज मिलना लगभग बंद हो जाएगा। यही नहीं, मूडीज, स्टैंडर्ड ऐंड पूअर और फिच जैसी एजेंसियां उसकी रेटिंग भी घटा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान पहले ही अर्थव्यवस्था के खराब दौर से गुजर रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हुए उसने भारत से वाणिज्यिक संबंध खत्म कर लिये। इससे नुकसान उसका ही हुआ। वहां महंगाई चरम पर पहुंच गई। आलू, प्याज व टमाटर जैसी रोजमर्रा की चीजें सौ रुपये किलो में भी नहीं मिल रही हैं। बावजूद इसके इससे कोई सीख लेने के बजाय वह आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए लगातार सीज फायर का उल्लंघन करते हुए एलओसी पर भारी गोलीबारी पर उतारू है।
हालांकि भारत की ओर से भी मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है। अनुच्छेद 370 को खत्म किये जाने से पगलाया पाकिस्तान घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने की तर्ज पर सीधे सीधे जंग की धमकी दे रहा है। इसका जवाब भी रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व सेना प्रमुख विपिन रावत दे चुके हैं। रक्षामंत्री ने तो साफ कर दिया है कि पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करने की नीति में भारत परिस्थितियों के मुताबिक बदलाव भी कर सकता है। यह इशारा बताता है कि परमाणु बम की धमकी देने वाला पाकिस्तान यह भली भांति जान ले कि अब भारत में ढुलमुल नीतियों वाली नहीं बल्कि कड़े फैसले लेने वाली मोदी सरकार है। बहरहाल, एफएटीएफ की कार्रवाई पाकिस्तान के लिए नीम चढ़ा करेला साबित होने वाला है। लगभग 100 अरब डॉलर से अधिक का कर्जदार पाकिस्तान का अपनी कुल जीडीपी का करीब 40 फीसदी ब्याज चुकाने में खर्च होता है।
इसलिए पाकिस्तान को हर साल अपने स्वयं के खर्चे के लिए अरबों डॉलर कर्ज की जरूरत होती है। इमरान सरकार आने के एक साल के भीतर ही आर्थिक बदहाली के शिकार पाकिस्तान ने लगभग 16 अरब डॉलर का कर्ज लिया है। अब जबकि एफएटीएफ ने उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया है तो ऐसे में विदेशी कर्जे पर ही पलने वाले पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी और अन्य देशों से कर्ज नहीं मिल पाएगा। जाहिर है ऐसी स्थिति में वहां हाहाकार मचना तय है।


 
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