लेख

Blog single photo

धीरे-धीरे सामान्य हो रहे घाटी के हालात

05/09/2019

रमेश गुप्ता 

म्मू व कश्मीर राज्य में अनुच्छेद-370 को हटाकर इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए एक माह हो चुका है। इन एक माह में जम्मू प्रांत जिसमें दस जिले हैं, सात जिलों में हालात सामान्य हो गए हैं परंतु तीन जिलों में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। जम्मू प्रांत में अधिकांश जिलों में मोबाइल सेवा बहाल कर दी गई है, परंतु कुछ जिलों पर पैनी नजर रखी जा रही है। वहां कुछ समय और लग सकता है। जम्मू प्रांत के सभी स्कूल-कॉलेज खुल गए हैं। वहां शिक्षा ठीक प्रकार चल रही है। बस, मेटाडोर सेवाएं भी सामान्य हैं। जम्मू प्रांत के लोग प्रारंभ से ही अनुच्छेद-370 को हटाने के पक्ष में थे। जहां तक कश्मीर घाटी का प्रश्न है, वहां भी दस जिले हैं। वहां अभी तक किसी भी जिले में हालात पूर्ण रूप से सामान्य नहीं हुए हैं। प्रशासन द्वारा अधिकांश क्षेत्रों से दिन की पाबंदियां हटा ली गई हैं, जिससे लोग राहत महसूस कर रहे हैं। अधिकांश क्षेत्रों में धीरे-धीरे दुकानें खुल रही हैं। हालांकि कुछ युवा उन्हें दुकानें खोलने पर गंभीर परिणामों की चेतावनी दे रहे हैं। इसलिए कुछ अभी मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं। श्रीनगर में चहल-पहल लौट रही है। जिस प्रकार का वहां का वातावरण है, अभी प्रशासन व सरकार कोई जोखिम लेने को तैयार नहीं है। इसी कारण वहां अभी भारत संचार निगम के लैंडलाइन फोन ही प्रारंभ हुए हैं। वह भी कई जिलों में यहां तक कि श्रीनगर के कुछ क्षेत्रों में प्रारम्भ नहीं किए गए हैं। प्रशासन हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है। कश्मीर घाटी में सबसे कठिन दिन शुक्रवार होता है, जब लोग जुम्मे की नमाज अदा करने मस्जिदों में एकत्र होते हैं। वहां वातावरण तनावपूर्ण बन जाता है। इसको देखते हुए प्रशासन मुख्य मस्जिदों को जहां हजारों लोग नमाज अदा करने आते हैं, अभी तक नमाज के लिए खोला नहीं है। वहां पर लगभग चार हजार स्कूल खुले हैं। उनमें अभी शिक्षा सामान्य रूप से नहीं हो पा रही। विद्यार्थी अभी कम संख्या में आ रहे हैं। कॉलेज अभी खोले नहीं गए हैं। उन्हें खोलने में अभी समय लग सकता है। इस समय कश्मीर घाटी के सैकड़ों विभिन्न दलों के नेता जिनमें तीनों पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती नजरबंद हैं। धीरे-धीरे उन्हें परिवार से मिलने की अनुमति दी जा रही है।
पिछले दिनों कश्मीर घाटी के पंचों, सरपंचों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिला था। गृहमंत्री ने उनसे राज्य के हालात पर चर्चा की तथा उन्हें आश्वासन दिया कि दो- तीन सप्ताह उपरांत मोबाइल सेवा प्रारंभ कर दी जाएगी। इस समय पंच, सरपंच ही हैं जिनके सहयोग से वहां का वातावरण ठीक हो सकेगा।
इस एक माह में एक बात जरूर देखने को मिली। घाटी में 150 से 200 तक आतंकवादी सक्रिय हैं। वहां पर सेना व सुरक्षाबल ज्यादा मात्रा में तैनात होने के कारण इक्का-दुक्का छोड़ आतंकी कोई घटना नहीं कर पाए। सीमा पार से पाकिस्तान की ओर से उन्हें उकसाने के लिए 200 से अधिक बार सीमा का उल्लंघन कर अकारण गोलाबारी की जा रही है ताकि घाटी का वातावरण खराब हो सके। लेकिन हमारी सजग सेना ने उनका उन्हीं की भाषा में जवाब दिया। 
31 अक्टूबर को यह प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा, जिसका नया स्वरूप देखने को मिलेगा। सबसे बड़ी बात यही होगी कि सभी नागरिक एक समान होंगे। यहां की विधान परिषद समाप्त हो जाएगी, सिर्फ विधानसभा रहेगी। विधानसभा में 90 सदस्य होंगे। नई विधानसभा में 7 सीटें अधिक होंगी। यह कौन-कौन-सी होंगी उसके लिए विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन होगा। इसके लिए लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। यह मामला काफी पेचीदा है। वर्तमान विधानसभा में 87 सदस्य हैं। इनमें चार लेह-लद्दाख की कम हो जाएंगी। बाकी 83 सदस्य हैं, इनमें 46 कश्मीर घाटी के हैं तथा 37 जम्मू प्रांत के। अब जबकि सभी को मत देने का अधिकार प्राप्त होगा। ऐसे में जम्मू प्रांत के मतदाता कश्मीर घाटी के बराबर या ज्यादा होंगे। उसी हिसाब से विधानसभा सीटें भी बराबर हो जाएंगी। जिससे नई विधानसभा का स्वरूप बदल जाएगा।
सरकार द्वारा यहां युवकों के लिए 50 हजार नई नौकरियों की घोषणा की गई है। वह प्रक्रिया भी जल्द प्रारंभ होने की संभावना है। कश्मीर घाटी में हालात सामान्य न होने के कारण वहां पर पर्यटकों का आना फिलहाल बंद है। सभी पर्यटक स्थल वीरान पड़े हुए हैं। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, पर्यटक वहां जाने का जोखिम भी नहीं उठा सकते।
ऐेसे में हम आशा कर सकते हैं कि जम्म कश्मीर के हालात शीघ्र सामान्य होंगे तथा यह प्रदेश विकास की राह पर तेजी से चलेगा।
(लेखक जम्मू कश्मीर में सक्रिय पत्रकार हैं।)


 
Top