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बदल रहा है अपना देश

08/08/2019

मनोज ज्वाला
हान स्वतंत्रता सेनानी महर्षि अरविन्द व युग ऋषि श्रीराम शर्मा आचार्य ने कहा था कि 'भारत का पुनरुत्त्थान महाकाल का अटल निश्चय है।' सो उन दोनों भविष्यद्रष्टाओं द्वारा पूर्वघोषित समय के साथ-साथ चरितार्थ होता दिख रहा है। अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन महज एक सियासी घटना भर नहीं है। यह भारत के अखण्ड स्वरुप ग्रहण करने की पूर्व-पीठिका निर्मित करने वाली एक परिघटना भी है। दोनों मनीषियों ने यह भी कहा था कि 'वैचारिक अवांछनीयताएं जब अनर्थ की सीमा लांघ जाएंगी, तो आत्मबल सम्पन्न व्यक्तियों के बीच 'सुपरचेतन सत्ता' का प्रादुर्भाव होगा, जो उल्टे को उलट कर सीधा कर देगा'। इसका समय रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा था कि 'रामकृष्ण परमहंस के जन्म से लेकर 175 साल तक की अवधि संधिकाल है, जिसके दौरान भारत को कई अवांछनीयतायें झेलनी पड़ सकती हैं। लेकिन इस अवधि के बीतते ही भारत के भाग्य का सूर्योदय सुनिश्चित है। जिसके साथ इसकी सोई हुई राष्ट्रीयता जाग जाएगी और भारत अपनी आध्यात्मिक समग्रता से सारी दुनिया पर छा जाएगा'। देश को विभाजन की पीड़ादायी त्रासदी के साथ मिली स्वतंत्रता पर प्रतिक्रिया जताते हुए 15 अगस्त 1947 को राष्ट्र के नाम प्रसारित संदेश में महर्षि अरविन्द ने कहा था कि 'भारत का विभाजन एक न एक दिन अवश्य मिट जाएगा और यह राष्ट्र फिर से अपने अखण्ड स्वरुप को धारण कर लेगा'। युग परिवर्तन के निमित्त अध्यात्मिक-वैचारिक आन्दोलन का सूत्रपात करने के कारण युग ऋषि कहे गए श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपनी कई पुस्तकों में लिखा है कि 'अवांछनीयताओं का उन्मूलन होकर रहेगा। यह महाकाल की योजना है। इसे कोई टाल नहीं सकता। असत्य, अनीति, अन्याय झूठ, पाखण्ड पर आधारित समस्त स्थापनाएं, व्यवस्थाएं भरभरा कर गिर जाएंगी। दुर्जन शक्तियों को मुंह की खानी पड़ेगी और सज्जन शक्तियों के संगठन से सत्य, नीति, न्याय, विवेक, सम्पन्न व्यवस्थाएं खड़ी होंगी। 21वीं सदी से युग परिवर्तन की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी और वर्ष 2011 से परिवर्तन स्पष्ट दिखाई पड़ने लगेगा। भारत इस विश्वव्यापी परिवर्तनकारी योजना के क्रियान्वयन का ध्रुव केन्द्र होगा'। इन दिनों अपने देश में बदलाव की बह रही हवा को देखकर उपरोक्त मनीषियों की बात सही घटित प्रतीत होती है। 
रामकृष्ण परमहंस के जन्म काल सन 1836 से लेकर 175 साल का संधिकाल 2011 में समाप्त हुआ। जो युग ऋषि श्रीराम शर्मा का जन्मशताब्दी वर्ष था। सन 2011 से देशभर में कांग्रेस विरोधी आंदोलनों के परिणाम स्वरुप सन 2014 में प्रचण्ड बहुमत से एक अप्रत्याशित व्यक्तित्व नरेन्द्र मोदी का सत्तासीन होना कहीं भविष्यवाणियों का सच होना तो नहीं है? मोदी के सत्ता संभालते ही धर्मनिरपेक्षता के पाखण्ड का धराशाई होना, भारत की योग विद्या को वैश्विक मान्यता मिलना, विश्व राजनीति में भारत की पैठ बढ़ना, पाकिस्तान में बलूचिस्तान का आन्दोलन भड़कना, इस्लामी अरबिया देशों में सनातनधर्मी मन्दिरों का निर्माण होना, तीन तलाक का निरस्तीकरण और अनुच्छेद 370 की समाप्ति ऐसे काम हैं जो बताते हैं कि अब भारत बदलने लगा है। करवट लेने लगा है नियति का परिवर्तन चक्र सचमुच ही नियत समय से शुरू हो चुका है।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटना आम तौर पर देश की जनता को ही नहीं, जन प्रतिनिधियों को भी असम्भव-सा प्रतीत होता रहा था। उसे इस सरकार ने कर दिखाया है। अब नये सिरे से उसका शासनिक पुनर्गठन किया जा रहा है। इसे आप क्या कहेंगे? यह नियति की उस नीयत के क्रियान्वयन का एक चरण है, जिसके तहत भारत का पुनरुत्थान होना है। भारत राष्ट्र अब अपना वास्तविक आकार ग्रहण करने को मचल रहा है। अतएव, भारत को टुकड़े-टुकड़े करने का नारा लगाने वाले गिरोहों, राष्ट्रद्रोह कानून को
समाप्त कर देने की वकालत करने वाली कांग्रेस, पाकिस्तान की भाषा बोलनेवाली पीडीपी और नेशनल कान्फ्रेंस आदि तथाकथित सेक्युलर जमातों और कम्युनिष्ट दलों को सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि भारत के पुनरुत्थान के मार्ग में जो भी तत्व बाधक बनेंगे, वे मिट जाएंगे। राजनीति के परिदृश्य से लुप्त हो जाएंगे। भारत का पुनरुत्थान अब होकर रहेगा। यह ऋषियों की योजना, घोषणा है। जैसी कि सनातन मान्यता है, ऋषियों के वचन कभी खाली नहीं जाते। उसे भगवान पूरा करते हैं। 
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।) 


 
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