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निवेशकों की पहली पसंद बना देवभूमि

06/12/2019

निवेशकों की पहली पसंद बना देवभूमि

सुनील शुक्ला

प्रदेश सरकार ने राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की रियायतें और आर्थिक पैकेज देने की घोषणाएं की हैं, जिसका असर अब दिखने लगा है।

देश और विदेश में छाई आर्थिक सुस्ती के दौर में जहां निवेशक कोई बड़ा निवेश करने से अपने हाथ पीछे खींच रहे हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश निवेशकों के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है। प्रदेश में निवेश के लिए बेहतर संभावनाएं हैं, लेकिन जरूरत थी, तो केवल निवेशकों का भरोसा जीतने की। पर जयराम सरकार निवेशकों का भरोसा जीतने में कामयाब रही है। इसकी वजह है राज्य में निवेश के लिए सबसे माकूल माहौल बनाना और साथ ही नई उदारवादी नीतियां और सरकार की तरफ से दिए जा रहे कई तरह के प्रोत्साहन पैकेज। हाल ही में आयोजित इंवेस्टर मीट में जयराम सरकार ने लगभग 90 हजार करोड़ से अधिक के निवेश के लिए कई एमओयू साइन किए हैं। इससे जो निवेश होगा, उससे नौकरियों के लिए लगभग डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं राज्य की आर्थिक स्थिति में भी खासे सुधार की उम्मीद है।

मिल रहा पैकेज
स्वच्छ पर्यावरण व आवोहवा के कुदरती पैकेज के साथ साथ भाजपा सरकार पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह के खास पैकेज दे रही है। इसके लिए सरकार ने खासतौर पर पर्यटन, स्वास्थ्य, सूचना प्राधौगिकी आदि क्षेत्रों में निवेशकों के लिए नीतियों का निर्धारण उनकी सहूलियतों के अनुसार किया गया है। राज्य सरकार देश में किसी भी अन्य दूसरे राज्यों के मुकाबले में सबसे सस्ती दरों पर बिजली मुहैया करा रही है। प्रदेश सरकार पहली बार राज्य आयुष नीति लेकर आई है जिसके तहत आयुष एवं आरोग्य क्षेत्र में निवेशकों के लिए आकर्षक प्रोत्साहनों को शामिल किया गया है। इस नीति के तहत आयुष थेरेपी यूनिट को स्थापित करने के लिए पूंजी सब्सिडी 25 प्रतिशत का प्रावधान किया गया है, जो अधिकतम एक करोड़ रुपये तक हो सकता है।
इसमें भूमि पर किया गया खर्च शामिल नहीं होगा तथा ऋण पर चार प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा जो प्रति वर्ष अधिकतम 15 लाख रुपये होगा। आयुष नीति-2019 से लोगों को किफायती दरों पर आयुष सेवाएं उपलब्ध होंगी। यही नहीं जयराम सरकार ने नई आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम नीति-2019 को भी मंजूरी प्रदान की है। इस नीति में अधोसंरचना प्रोत्साहन प्रणाली विकसित करने की परिकल्पना की गई है जो आईटी, आईटीईएस और ईएसडीएम की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। वहन योग्य आवासीय नीति-2019 को भी स्वीकृति प्रदान की है जिसका प्रमुख उद्देश्य शहरी गरीबों के पुनर्वास और सभी नई आवासीय परियोजनाओं में मिश्रित आवासीय विकास को प्रोत्साहित करना है।

पर्यटन को प्रोत्साहन
प्रदेश में पर्यटन इकाइयां स्थापित करने के इच्छुक गैर कृषकों को राज्य में भूमि खरीदने के उद्देश्य से अनिवार्यता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए पर्यटन विभाग के संशोधित मापदंडों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इच्छुक निवेशक को अपनी पर्यटन परियोजना की प्रारम्भिक परियोजना रिपोर्ट पर्यटन विभाग के निदेशक को सौंपनी होगी, जिसके लिए वह अनिवार्यता प्रमाण पत्र चाहता है। विभागीय निदेशक संबंधित पर्यटन परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का आकलन करेंगे। पर्यटन क्षेत्र में निवेश के लिए हिमाचल सरकार ने पर्यटन कारोबार के क्षेत्र में निवेशकों को रिझाने के लिए कई रियायतें दी हैं। राज्य में पर्यटन कारोबार करने वाले हिमाचलियों को स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण फीस में 70 फीसदी छूट दी जाएगी। इसके अलावा टूरिज्म प्रोजेक्टों की डीपीआर बनाने पर आए खर्च का 90 फीसदी भी सरकार निवेशकों को लौटाएगी। पर्यटन नीति 2019 के तहत हिमाचल से बाहर के निवेशकों को 10 करोड़ तक के निवेश पर स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण फीस में 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है।
सरकार ने होटल स्टाफ को दक्ष बनाने के लिए ट्रेनिंग का भी प्रावधान किया है। इसके तहत कर्मियों को छह माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका 50 फीसदी खर्च सरकार करेगी। नई पर्यटन नीति में इको, जैविक कृषि, स्नो, झील, साहसिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं धरोहर, स्वास्थ्य एवं वेलनेस तथा फिल्म पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। थीम पार्क, लाइट एंड साउंड शो, एडवेंचर पार्क निर्माण के लिए अधिकतम तीन करोड़ सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में सड़कें नहीं हैं, वहां सड़क बनाने को सरकारी जमीन दी जाएगी। सड़क निर्माण को 15 फीसदी ग्रांट या अधिकतम 50 लाख तक की राशि मिलेगी।


 
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