यथावत

Blog single photo

धार्मिक पर्यटन को नई दिशा

25/11/2019

धार्मिक पर्यटन को नई दिशा

संजय सिंह

दोनों समुदायों के बीच आपसी मजबूत ताना-बाना का ही असर है कि अयोध्या में सरयू रोज की तरह अपनी रौ में बह रही है। मंदिरों में घंटा- घड़ियालों की गूंज और मस्जिदों से अजान सुनाई दे रही है। यही अयोध्या का मूल है, जिसके बूते उम्मीद जगी है कि रामजन्म भूमि विवाद हल हो जाने के बाद यहां उम्मीद की भी नदी बहेगी। कुछ दिनों पहले दीपावली के मौके पर दीपोत्सव के भव्य आयोजन के कारण अयोध्या एक बार फिर सुर्खियों में आयी थी, लेकिन सरयूवासियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले वाली रात को भी दीपावली मनाई। सरयू स्नान घाटों से लेकर मंदिरों की चौखट तक दीपों का नजारा एक अद्भुत एहसास करा रहा था। मणिराम दास जी की छावनी, वाल्मीकि रामायण भवन, श्री राम जन्मभूमि न्यास, कारसेवक पुरम सहित सभी प्रमुख स्थलों में दीप जलाकर रामलला के प्रति श्रद्धाभाव प्रदर्शित किया गया। शास्त्रों के मुताबिक श्रीराम ने जिस अवधपुरी को बैकुंठ से भी ज्यादा प्रिय बताया है, उसके हर क्षेत्र में रोशनी विकास के प्रकाश की ओर भी संकेत कर रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विश्वास व्यक्त किया है कि अब अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनेगा। यह मंदिर भव्य भारत का एक राष्ट्र मंदिर बनकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कीर्ति के अनुसार ही भारत की कीर्ति को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाएगा। दुनिया तक कीर्ति पहुंचेगी तो निश्चित ही दुनिया इस ओर आकर्षित होगी। दशकों से अयोध्या के नाम पर सियासत तो जमकर हुई लेकिन विकास के नाम पर यहां वैसा कुछ नहीं दिखाई दिया, जो मथुरा और काशी में हो पाया।

पहले सावन मेला, परिक्रमा, कुंभ से लौटते समय और रामनवमी पर ज्यादा श्रद्धालु आते थे। अब यह बारह महीने का तीर्थाटन हो जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार में आते ही जिस तरह से अयोध्या में विकास कार्यों की शुरुआत की, जिले को भी फैजाबाद जनपद से बदलकर ‘अयोध्या’ नाम दिया, उससे रामनगरी के लोगों को एक उम्मीद जगी और अब फैसले के बाद उनका विश्वास और मजबूत हुआ है। दो वर्षों से दीपावली के पर्व पर सरयू के तट पर ‘दीपोत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। 2018 के दीपोत्सव में 3.31 लाख दीप प्रज्वलित कर गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाया गया। इसी क्रम में इस बार दीपोत्सव के माध्यम से राम नगरी में रिकॉर्ड 6.11 लाख दीप जलाए गए और राम की पैड़ी पर एक साथ 4.10 लाख दीप जलाने का नया विश्व रिकॉर्ड कायम हुआ। देश-विदेश के कलाकारों की रामलीला प्रस्तुति से वैश्विक स्तर पर इसे सराहा गया। ऐसे आयोजनों की पुनरावृत्ति से पर्यटक इस ओर अधिक आएंगे, इसके संकेत मिलने लगे हैं।

इसी तरह सरयू के किनारे सटे 100 हेक्टेयर क्षेत्र में 251 मीटर ऊंची प्रतिमा देश ही नहीं दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी। इसके अलावा सरयू के घाटों के सौन्दर्यीकरण से लेकर यहां विकास संबंधी कई परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण वर्तमान सरकार में हो चुका है। अब मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद यहां धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई मिलेगी। टेंट में रामलला का दर्शन करने वाले श्रद्धालु भव्य मंदिर में उन्हें पाकर अभिभूत होंगे। रामजन्म भूमि का मॉडल कारसेवकपुरम-निर्माण कार्यशाला में लोगों के दर्शनार्थ रखा गया है। प्रस्तावित मंदिर 268 फीट लंबा है। इसकी चौड़ाई करीब 140 फीट और ऊंचाई 128 फीट है। मंदिर के जिस कक्ष में रामलला विराजेंगे, उस गर्भगृह से ठीक ऊपर 16 फीट तीन इंच का विशेष प्रकोष्ठ होगा। इसी प्रकोष्ठ पर 65 फीट तीन इंच ऊंचा शिखर निर्मित होगा।

धार्मिक पर्यटन में अधिक रोजगार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक देश को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को पाने में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए जरूरी है कि उत्तर प्रदेश एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बने। इसमें पर्यटन सेक्टर की बेहद अहम भूमिका हो सकती है। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक अयोध्या का मसला सुलझने से पूरी दुनिया के निवेशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा बढ़ेगा। रोजगार के लिहाज से पर्यटन सबसे सस्ता निवेश माना जाता है। एक आकलन के अनुसर पर्यटन में प्रति 10 लाख रुपये के निवेश पर 78 लोगों को रोजगार मिलता है। वहीं सबसे अधिक रोजगार देने वाले विनिर्माण क्षेत्र में इतनी ही राशि के निवेश पर 45 लोग रोजगार मिलते हैं। यही वजह है कि दुनियाभर में भारतीय पर्यटन स्थलों का रुतबा बढ़ रहा है और देश में विदेशी सैलानियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। उत्तर प्रदेश में सालाना 28 करोड़ पर्यटक आते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक पर्यटन क्षेत्र को तीर्थाटन से आगे ले जाकर आर्थिक स्वावलंबन की दृष्टि से बड़ी भूमिका निभायी जा सकती है। प्रदेश में अगर अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, गोवर्धन, वृंदावन की ही बात करें तो यहां आने वाले घरेलू पर्यटकों की संख्या ही करोड़ों में हैं। अब अयोध्या आने वाले लोगों की संख्या दोगुना होने की सम्भावना है। इससे अयोध्या और इसके आसपास के एक बड़े हिस्से में पर्यटन अर्थव्यवस्था का विकास होगा।

मंदिर में 212 स्तंभ लगेंगे। प्रथम मंजिल में 106 एवं इतने ही दूसरी मंजिल पर लगेंगे। प्रथम मंजिल पर लगने वाले स्तंभों की ऊंचाई 16 फीट छह इंच एवं दूसरी मंजिल पर लगने वाले स्तंभों की ऊंचाई 14 फीट छह इंच होगी। मंदिर की प्रथम पीठिका यानी चबूतरा आठ फीट ऊंचा होगा। इन तक प्रशस्त सीढ़ियों से पहुंचा जा सकेगा। इसी पीठिका पर मंदिर का 10 फीट चौड़ा परिक्रमा मार्ग होगा। चार फीट नौ इंच ऊंची एक आधार पीठिका पर मंदिर का निर्माण होना है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं को अयोध्या में ठहरने के बेहतर इंतजाम मिलेंगे। पर्यटन सुविधाओं में इजाफा होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे, जिसका वास्तविक लाभ स्थानीय अयोध्यावासियों को मिलेगा। सही मायनों में ये उनके समग्र विकास की भी शुरुआत होगी। रामनगरी में पीढ़ियों से खड़ाऊं बनाने वाले परिवार के आसिफ कहते हैं कि मंदिर बनने से यहां संतों का जमावड़ा बढ़ेगा। बाहर से भी लोग खड़ाऊं खरीदने आएंगे। इससे समझा जा सकता है कि हम लोगों को फायदा होगा या नुकसान। मस्जिद के लिए भी जमीन मिलना खुशी की बात है। स्थानीय निवासी मोहम्मद अशफाक कहते हैं कि पहले अक्सर प्रशासन तनाव की आशंका में ही बाजार बंद करा देता था। इससे स्थानीय व्यापार को तो नुकसान होता था, साथ ही बड़े उद्यमी ऐसे माहौल में अयोध्या में निवेश से बचते रहे। अब यह दौर खत्म होगा तो सभी को फायदा मिलेगा।

आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं को अयोध्या में ठहरने के बेहतर इंतजाम मिलेंगे। पर्यटन सुविधाओं में इजाफा होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर सृजित होंगे, जिसका वास्तविक लाभ स्थानीय अयोध्यावासियों को मिलेगा। सही मायनों में ये उनके समग्र विकास की भी शुरुआत होगी। रामनगरी में पीढ़ियों से खड़ाऊं बनाने वाले परिवार के आसिफ कहते हैं कि मंदिर बनने से यहां संतों का जमावड़ा बढ़ेगा।

शानू का कहना है कि जिस तरह मुसलमान मक्का-मदीना और ईसाई वेटिकन सिटी जाते हैं, उसी तरह सुविधाओं का दायरा बढ़ने से रामनगरी हिंदुओं का अंतरराष्ट्रीय तीर्थस्थल हो जाएगी। दुनिया के कोने-कोने से लोग बेहिचक यहां आयेंगे। इसका सीधा असर रोजगार पर देखने को मिलेगा। राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. विनोद श्रीवास्तव के मुताबिक अब यहां धार्मिक पर्यटन को पंख लगेंगे, होटल इंडस्ट्री आएगी, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ेगा, अच्छी सड़कें बनेंगी तो अयोध्या के बाहरी क्षेत्र में उद्योग- धंधे आएंगे। अयोध्या विश्व पर्यटन के नक्शे पर आएगा। इन सबसे बिना भेदभाव सभी को लाभ मिलेगा।


 
Top