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'पाकिस्तान के द्विपक्षीय व्यापार निलंबित करने का भारत पर नहीं होगा खास असर'

08/08/2019

कृष्ण  कुमार

इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 08 अगस्त (हि.स.)। जम्मू एवं कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने और प्रदेश को दो संघीय क्षेत्रों में बांटने के बाद से पाकिस्तान बौखला गया है। पड़ोसी देश ने अपनी नाराजगी जाहिर करने और भारत पर दबाव बनाने के लिए राजनयिक संबंध कम करने, द्विपक्षीय व्यापार निलंबित करने और इस मामले को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाने का फैसला कर लिया है।

हालांकि पाकिस्तान का यह पैंतरा कोई नया नहीं है। वह अतीत में भी ऐसा किया है। इस संबंध में पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त जी.पार्थसारथी ने कहा कि पड़ोसी देश ने पहले भी राजनयिक संबंध सीमित किए हैं और अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाया है, लेकिन दोनों देशों के बीच यह संबंध पूर्णत: विच्छेद नहीं हुए, इसलिए इस बार भी पड़ोसी के निर्णय का कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा।

जहां तक द्विपक्षीय व्यापार निलंबित करने का सवाल है तो इसका भी कोई विशेष प्रभाव पड़ेगा यह कहना मुश्किल है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार का आयतन ही बहुत कम है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच कुल 2.4 अरब डॉलर मूल्य का द्विपक्षीय कारोबार होता है जो भारतीय विदेश व्यापार का 0.31 प्रतिशत और पाकिस्तानी विदेश व्यापार का 3.2 प्रतिशत हिस्सा है। इसको अगर अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है तो आप समझ सकते हैं कि इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा। लेकिन यह फैसला खुद पाकिस्तानी अर्थव्यस्था को प्रभावित कर सकता है जो संकट के दौर से गुजर रही है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में  पाकिस्तान भारत को सीमेंट(7.83 करोड़ डॉलर प्रतिवर्ष), उर्वरक  ($3.49 करोड़), फल ($11.28 करोड़), रसायन ($6.04 करोड़) और चमड़े एवं अन्य संबंधित उत्पादों का निर्यात करता है। इनके एवज में भारत पाकिस्तान को कच्चा कपास, कपास के धागा, केमिकल्स, प्लास्टिक, रंग और मानव निर्मित धागों का निर्यात करता है।

पाकिस्तान ने खुद यह रहस्योद्घाटन किया किया है कि साल 2014 से भारत के साथ व्यापार का आयतन घट रहा है। इतना ही नहीं इस साल अप्रैल महीने से भारत ने नियंत्रण रेखा के जरिए होने वाले व्यापार को निलंबित कर दिया था, क्योंकि इस मार्ग से आतंकियों के भेजने के अलावा हथियार और नकली नोट भी भेजे जाते थे। इससे पहले पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को और पंगू बनाने के लिए वहां से आयातित आवयश्क वस्तुओं पर शुल्क बढ़ा दिए थे।

द्विपक्षीय व्यापार निलंबित करने पर आर्थिक विशेषज्ञों को मानना है कि यह पाकिस्तान के लिए एक आत्मघाती कदम साबित हो सकता है, क्योंकि भारत के लिए पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय व्यापार कोई खास महत्व नहीं रखता है, जबकि पाकिस्तान के लिए यह मायने रखता है। भारतीय से आयातित वस्तुओं का विकल्प उसके लिए महंगा साबित होगा।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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