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विभावि कुलपति पर होगी कार्रवाई, परिणाम बहुत जल्द सामने आयेंगेः राज्यपाल मुर्मू

13/08/2019

- ऐसा माहौल नहीं था कि विवि दीक्षांत समारोह को बीच में ही समाप्त कर दिया जाए, होगी जांच

- एबीवीपी ने की विभावि के कुलपति को अर्बन नक्सली समर्थक बताते हुए बर्खास्त करने की मांग

राजीव मिश्रा

रांची, 13 अगस्त (हि.स.)। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह में अव्यवस्था और काले कपड़े में डिग्री लेने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष प्रो. नाथू गाड़ी के नेतृत्व में मंगलवार को राज्यपाल सह कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) हजारीबाग के विवादित कुलपति डॉ. रमेश शरण को अर्बन नक्सली समर्थक बताते हुए बर्खास्त करने की मांग की। इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल ने कुलाधिपति को ज्ञापन भी सौंपा। इसमें बिंदुवार 17 मांगें की गई हैं और उसकी जांचकर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। कुलाधिपति मुर्मू ने इसपर कार्रवाई का आश्वासन दिया। 


प्रतिनिधिमंडल से कुलाधिपति ने कहा कि विभावि के 8वें दीक्षांत समारोह में भारी अव्यवस्था हुई है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यालय का प्रशासन काफी कमजोर है। विद्यार्थी परिषद मांगों पर समुचित कार्रवाई होगी और इसका परिणाम बहुत जल्द सामने आयेगा। उन्होंने ख़ासतौर पर कहा कि कहीं कोई ऐसा माहौल नहीं था कि दीक्षांत समारोह को बीच में समाप्त कर दिया जाए। इसकी भी जांच होगी।

विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने कुलाधिपति से कहा कि जब से डॉ. रमेश शरण कुलपति बने हैं, विभावि संगठित भ्रष्टाचार, शैक्षणिक अराजकता और नक्सल विचारों का धीरे-धीरे गढ़ बनता जा रहा है। रमेश शरण प्रगतिशील विचार और मानवाधिकार की आड़ में नक्सलियों के समर्थक माने जाते हैं। जिसदिन से उन्होंने कुलपति के रूप में अपना योगदान दिया है उसदिन से विभावि सहित सभी अंगीभूत इकाई शैक्षणिक कुव्यवस्था का शिकार हो गया है। 8 दिन पहले 8वें दीक्षांत समारोह में जिस प्रकार से वीभत्स एवं असंवैधानिक कृत्य हुएउससे शिक्षाविद, छात्र समुदाय सहित समाज के सभी घटक काफ़ी दुखी हैं। अगस्त को अनुच्छेद 370 और 35 के समापन के अवसर पर हजारीबाग में सांप्रदायिक सौहार्द्र खंडित होने का भय दिखाकर दीक्षांत समारोह को बीच में ही स्थगित कर दिया गया। यह एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। इससे विभावि की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। साथ ही छात्र समुदाय में खासा रोष है। समारोह में कुलाधिपति के निर्देशों की भी अवहेलना की गई। इससे शैक्षिक जगत स्तब्ध है।  


उन्होंने बताया कि कुलाधिपति के निर्देश पर सिंडीकेट की बैठक में दीक्षांत समारोह के लिए ड्रेस कोड निर्धारित किये गये थे लेकिन उसे दरकिनार करते हुए काले रंग के कपड़े पहने छात्र-छात्राओं को डिग्रियां दी गईं। यह कुलाधिपति के निर्देशों की अवमानना है। इसके अलावा कुलाधिपति ने वर्ष 2018 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान करने की अनुमति दी थी लेकिन दीक्षांत समारोह वर्ष 201516 और 17 के छात्रों को भी बुलाया गया। यह भी निर्देशों की अवहेलना है। इसके जिम्मेवार कौन हैं ? इसके अलावा कई अन्य सवाल उठाकर विद्यार्थी परिषद ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष प्रो. नाथूगाड़ी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. पंकज कुमार, प्रदेश संगठन मंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल, प्रांत प्रमुख डॉ. श्रवण कुमार सिंह, प्रांत सह मंत्री दीपेश कुमार, प्रदेश सह मंत्री संजय मेहता, प्रदेश एसएफडी प्रमुख नवलेश कुमार सिंह, प्रांत निजी कार्य प्रमुख अमित चौबे शामिल थे।


कुलाधिपति ने कहा, सर्च कमेटी की प्रासंगिकता पर ही संदेह

कुलपति प्रो. रमेश शरण की शैक्षणिक डिग्री और प्रमोशन की जांच कराने की मांग पर कुलाधाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि अब सबसे पहले सर्च कमेटी की कार्यशैली कठघरे में है। उसकी प्रासंगिकता पर भी संदेह उत्पन्न हो रहा है कि ऐसे लोगों का नाम कैसे शार्ट लिस्टेड हो जाता है और कुलपति के पैनल में आ जाता है।

भाजपा नेता संग मिलने गये वीसी रमेश शरण, नहीं मिलीं राज्यपाल

प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि कल (12 अगस्त) प्रदेश भाजपा के एक नेता के साथ विभावि के कुलपति प्रो. रमेश शरण मिलने राजभवन आये थे लेकिन उन्होंने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य का सवाल है। जबतक विभावि प्रशासन छात्रों पर दर्ज करायी गयी प्राथमिकी को वापस नहीं लेता है, तबतक कुलपति से न कोई बात होगी और न ही मुलाकात। इसके बाद कुलपति रमेश शरण लौट गये।  

अभाविप के आंदोलन के आगे झुका विभावि प्रशासन, केस वापस लिया

दीक्षांत समारोह को अचानक समाप्त कर देने और अव्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ विभावि प्रशासन ने थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी लेकिन वीसी के इशारे पर दर्ज मामले में एबीवीपी को टारगेट किया गया था। मंगलवार को विभावि प्रशासन विद्यार्थी परिषद के आगे झुक गया और कुलसचिव ने थाने में आवेदन देकर दर्ज कराई गयी प्राथमिकी को वापस ले ली। 

विरोध करने पर छात्रों पर हुआ था लाठीचार्ज, दर्ज हुई थी प्राथमिकी

इसी महीने 5 अगस्त को विभावि में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया था। उसमें काफी अव्यवस्था का आलम था। अगले दिन वीसी रमेश शरण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे स्वीकारा भी था। दीक्षांत समारोह में सिंडिकेट की बैठक में तय परिधान की जगह छात्र-छात्राओं को काले कपड़ों में डिग्रियां दी गयीं। डिग्रियों में तिथि भी गलत दर्ज है। तारीख 17 अगस्त अंकित है, जो अभी आया ही नहीं है। इन सभी चीजों से अलग हटकर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छदे 370 और 35ए की समाप्ति पर सामाजिक सौहार्द्र का भय दिखाकर दीक्षांत समारोह को बीच में ही समाप्त कर दिया गया। इस कारण विद्यार्थियों को डिग्रियां नहीं मिल पायीं। इससे वे आक्रोशित हो गये और जमकर हंगामा किया। वहां अफरातफरी का माहौल हो गया। इसके बाद विभावि प्रशासन के इशारे पर छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया। इससे छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया और वे आंदोलन पर उतारू हो गये। बदले में विभावि प्रशासन ने एबीवीपी के छात्रों पर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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