युगवार्ता

Blog single photo

सरकारी बैंकों का महाविलय

06/09/2019

सरकारी बैंकों का महाविलय

संजीव कुमार

अर्थव्यवस्था में सुस्ती और मंदी की चर्चा के बीच सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का महाविलय कर और 10 बैंकों को 55,250 करोड़ रुपये की पंूजी देने की घोषणा कर अपनी प्राथमिकता बता दी है कि सरकार बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाना चाहती है। और इसके लिए वह हर संभव कोशिश करेगी।

वि त्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के महाविलय की घोषणा की है। इस महाविलय के बाद अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 हो जाएगी। अब इन 10 बैंकों को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाए जाएंगे। पहला विलय पंजाब नैशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक आॅफ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया का होगा। और 17.95 लाख करोड़ के कारोबार के साथ यह देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। दूसरा विलय केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक का होगा। और 15.20 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के साथ यह चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा। तीसरा विलय यूनियन बैंक में आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का होगा। और 14.6 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के साथ यह देश का पांचवां सरकारी बैंक होगा। चौथा विलय इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक का होगा। और 8.08 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के साथ यह सातवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा, जिसका कारोबार का होगा। सरकार ने यह कदम बैंक आॅपरेशन की लागत घटाने के लिए उठाया है। वहीं 9.3 लाख करोड़ रुपये के कारोबार वाला बैंक आॅफ इंडिया तथा 4.68 लाख करोड़ रुपये के कारोबार वाला सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया पहले की तरह काम करता रहेगा। साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंक चीफ रिस्क आॅफिसर की नियुक्ति करेंगे। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में भी बैंकों का विलय किया था। सबसे पहले स्टेट बैंक आॅफ इंडिया में उसके 5 सहयोगी बैंकों-स्टेट बैंक आॅफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक आॅफ हैदराबाद, स्टेट बैंक आॅफ मैसूर, स्टेट बैंक आॅफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक आॅफ पटियाला के अलावा महिला बैंक का विलय किया गया था। स्टेट बैंक में उसके सहयोगी बैंको का यह विलय 1 अप्रैल, 2017 से प्रभावी हो गया। दूसरा विलय इसी साल 1 अप्रैल को बैंक आॅफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का हुआ था। वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले विलय से अच्छे नतीजे आए थे। पिछले तिमाही में रिकॉर्ड लोन की रिकवरी हुई है। 18 सरकारी बैंकों में से 14 बैंक मुनाफे में आ गए हैं। बैंकों के ग्रॉस एनपीए में कमी आई है और उनकी परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ। सरकार का फोकस बैंकिंग सेक्टर को मजबूत करने पर है।

इन बैंकों का होगा विलय

विलय-1 पंजाब नैशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक आॅफ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया (कारोबार-17.95 लाख करोड़ रुपये)
विलय-2 केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक (कारोबार-15.20 लाख करोड़ रुपये)
विलय-3 यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक तथा कॉरपोरेशन बैंक (कारोबार-14.6 लाख करोड़ रुपये)
विलय-4 इंडियन बैंक, इलाहाबाद बैंक (कारोबार-8.08 लाख करोड़ रुपये)

बैंकों को 55,250 करोड़ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 अगस्त को क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने तथा विनियामकीय अनुपालन के लिए बैंकों को 55,250 करोड़ रुपये की पूंजी देने की भी घोषणा की है। इसके तहत पंजाब नैशनल बैंक को 16,000 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक आॅफ इंडिया को 11,700 करोड़ रुपये, बैंक आॅफ बड़ौदा को 7,000 करोड़ रुपये, केनरा बैंक को 6,500 करोड़ रुपये, इंडियन बैंक को 2,500 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इसके अलावा, इंडियन ओवरसीज बैंक को 3,800 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया को 3,300 करोड़ रुपये, यूको बैंक को 2,100 करोड़ रुपये, यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया को 1,600 करोड़ रुपये तथा पंजाब एंड सिंध बैंक को 750 करोड़ रुपये की पूंजी मिलेगी।


 
Top