लेख

Blog single photo

अफवाह की भेंट आखिर कब तक चढ़ेगा देश

03/09/2019

सियाराम पांडेय 'शांत'
फवाह मारक अस्त्र है। पहले ब्रह्मास्त्र हुआ करते थे। उनका मुकाबला करना कठिन होता था। बड़ी तबाही मचाते थे। लेकिन अफवाह तो उससे भी बड़ा अस्त्र है। झूठी खबरें फैलाकर किसी की सरकार गिराई जा सकती है। किसी को भी पीटा और पिटवाया जा सकता है। समाज में हिंसा और द्वेष का माहौल पैदा किया जा सकता है। किसी का भी मानमर्दन किया जा सकता है। समाज में सनसनी और भय पैदा किया जा सकता है। झूठ के पांव नहीं होते। वह हवा का रुख देखकर चलता है। पहले अफवाह फैलाना आसान नहीं था। अब हर किसी के हाथ में मोबाइल और इंटरनेट है। सोशल साइट पर एक झूठा वीडियो डालकर कानून-व्यवस्था से खेला जा सकता है। रहीम ने लिखा था कि 'अंतर अंगुरी चार कौं, सांच-झूठ में होय। सच मानी देखी कहै सुनी न मानै कोय।' लेकिन झूठ तो शत-प्रतिशत झूठ होता है। अगर उसमें सच से मिलता-जुलता तड़का लगा दिया जाए तो वह अग्निबाण-सी दाहकता पैदा करता है।
बच्चा चोरी की अफवाह से पूरा देश परेशान है। अपरिचितों पर हमले हो रहे हैं। पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर भी हमले हो रहे हैं। आतंकवादी बच्चों को जिंदा बम बनाते रहे हैं लेकिन जिस तरह बच्चा चोरी की अफवाहें परवान चढ़ रही हैं। लोगों पर उत्तेजित भीड़ के हमले हो रहे हैं उसे देखते हुए बच्चों को दुलार करना भी अब अपराध हो गया है। इस गिरावट के लिए कौन जिम्मेदार है? पुलिस को इन मामलों की जांच करते वक्त यह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए कि कहीं यह किसी शातिर दिमाग इंसान का बुद्धि विलास तो नहीं है? यदि ऐसा है तो उसका मकसद क्या है? जब जंगली जानवर के हमले की अफवाह उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में जोरों से उठी थी तो उसी के इर्द-गिर्द किडनी चोरों का गिरोह भी सक्रिय था। लेकिन उस मामले के ठंडा होते ही पुलिस भी ठंडी हो गई थी। उसने आगे अपनी जांच बढ़ाई ही नहीं। भारत में अफवाहों का बाजार गर्म है। बच्चा चोरी की अफवाह से पूरा देश परेशान है। लोग इतने डरे हुए हैं कि बच्चा चोर सुनते ही उत्तेजित और आक्रामक हो जाते हैं। सामने वाले का अपराध जानने-समझने की चेष्टा भी नहीं करते। पीटना शुरू कर देते हैं। इस चक्कर में कई लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। बिजली का मीटर रीड करने गए विद्युत कर्मियों को भी बच्चा चोर समझ कर पीट दिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आशा बहुओं पर भी हमले हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के अधिकांश जिलों में इसी तरह के हालात हैं। आक्रामक भीड़ पीटते वक्त इस बात का भी विचार नहीं कर रही कि पिटने वाले का बच्चे से संबंध क्या है? गाजियाबाद में एक बच्चे की दादी को पीट दिया गया। इसलिए कि वह सांवली थी जबकि उसकी गोद में बैठा बच्चा गोरा था। यह सब इस देश में हो क्या रहा है? इसका जवाब तो तलाशा ही जाना चाहिए। बच्चा चोरी की अफवाह कई राज्यों में तेजी से फैल रही है। इससे मॉब लिंचिंग के मंजर अक्सर देखने को मिल रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली भी बच्चा चोरी की अफवाह की त्रासदी झेल रही है लेकिन इस सिलसिले को रोक पाने में सरकार, पुलिस और प्रशासन खुद को असहाय पा रहा है। कभी मुंहनोचवा की अफवाह फैलाकर हिंसा की जाती है तो कभी चोटीकटवा के नाम पर। इससे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में जंगली जानवर के हमले की अफवाह उड़ी थी। देश के अलग-अलग हिस्सों से चोटी काटने की अफवाह उड़ी और इस चक्कर में कई लोग मारे भी गए। आगरा में महिला को चोटी काटने वाली चुड़ैल कह जान से मार दिया गया था। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने राज्यभर में अलर्ट जारी किया है। अफवाह फैलाने वालों को जेल भेजने के निर्देश भी दिए गए। इसके बावजूद घटनाएं थम नहीं रहीं। उत्तर प्रदेश में बच्चा चोरी की अफवाहें जिस तरह हिंसक रूप ले रही हैं, उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस भले ही स्थिति काबू में होने का दावा करे लेकिन हिंसा का ग्राफ निरंतर बढ़ रहा है। संभल में तो भीड़ ने मंदबुद्धि को ही बच्चा चोर समझ लिया। इतना ही नहीं, उसे पीट-पीट कर मार भी डाला। लखनऊ, कानपुर, फतेहपुर, रायबरेली, बहराइच, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़ और अलीगढ़ में बच्चा चोरी की अफवाह पर लोग सड़कों पर उतर आये और जो भी हत्थे चढ़ा, उसे जमकर धुन दिया। संभल जिले के देहरी खादर के जंगल में नलकूप पर सो रही महिला ने 40 वर्षीय एक मंदबुद्धि व्यक्ति पर अपने 6 वर्षीय बच्चे को छीन कर ले जाने का आरोप लगाया था। मुरादाबाद मंडल के रामपुर, अमरोहा और संभल जनपदों में बच्चा चोरी के शक में तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या की जा चुकी है। गाजीपुर जिले में बच्चा चोर के शक में लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बंधक बना लिया और पुलिस पर भी पथराव कर दिया। इसमें दरोगा, सिपाही समेत तीन लोग घायल हो गए। अकबरपुर जिले के स्वरूपपुर गांव से बच्चा चोरी की अफवाह पर एक अर्द्ध विक्षिप्त को पीटने के मामले में पुलिस ने सात नामजद सहित 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही रात में ही ताबड़तोड़ दबिश देकर 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। रायबरेली में बच्चा चोरी की अफवाहों के बीच अलग-अलग थाना क्षेत्रों में एक वृद्ध और महिला की लोगों ने पिटाई कर दी। मेरठ पुलिस ने भीड़ हिंसा के मामले में 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें 10 आरोपी वे हैं, जिन्होंने एक दिन पहले लिसाड़ी गेट क्षेत्र में बच्चा चुराने के शक में महिला पर हमला बोला था। 
अफवाह का सामना सच से ही किया जा सकता है। कौआ कान ले जा रहा है, यह सुनने के बाद अपना कान तो टटोलना ही चाहिए। फिर सोचना चाहिए कि कौआ किसका कान ले जा रहा है? ले भी जा रहा है या नहीं? इसके लिए पुलिस प्रशासन ही नहीं, समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों को भी आगे आना चाहिए। पुलिस को बताना चाहिए कि उनके जिले में कितने बच्चों की चोरी हुई है। इस संदर्भ में पुलिस क्या कर रही है? समाज को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी सरकार को निभानी चाहिए। केवल कुछ लोगों की धर-पकड़ से ही बात नहीं बनने वाली है। जमीनी स्तर पर काम करना होगा। अफवाहबाजों को बेनकाब करना होगा और सामाजिक तौर पर खुलेआम उनकी छित्तरपरेड करनी होगी। लेकिन यह तब संभव होगा जब पुलिस सच को सच की तरह लेगी। कोई जवाब देगा कि बच्चा चोरी या अन्य अफवाह में मारे गए लोगों की हत्या की जवाबदेही किसकी है? हमें बताना होगा कि हम आखिर किसके साथ खड़े हैं सत्य के या अफवाह के? हम समाज-राष्ट्र के साथ हैं या उपद्रवियों के साथ?
(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)


 
Top