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नई शिक्षा नीतिः मातृभाषा की प्रतिबद्धता

01/08/2020

डॉ. राकेश राणा

भारत सरकार की नई शिक्षा नीति में क्या नए आयाम शामिल हैं। किस तरह नई शिक्षा नीति देश को व्यापक शैक्षिक सुधारों की ओर लेकर जायेगी। इन बिन्दुओं को ध्यान में रखकर जब हम नई शिक्षा नीति को देखते है तो यह एक नई और व्यापक शुरुआत दिखती है। जिसमें बहुत कुछ नया भी है और सार्थक प्रभाव डालने वाला भी। अगर इन सब प्रावधानों पर ससमय और ईमादार प्रतिबद्धता के साथ अमल किया गया तो गुणात्मक परिवर्तनों की उम्मीद है। हम अभी नई सदी के शुरुआती दौर में है और संयोग से बहुत सारा घटनाक्रम भी हमारे पक्ष में है। इसका लाभ हम अपनी कमजोरियों को दूर करने और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा के जरिए उठा सकते हैं। बदलता शैक्षिक परिदृश्य बड़े बदलाव को आयोजित कर सकता है। नई शिक्षा नीति में नया बहुत कुछ है, पर जो सबसे अहम कदम है वह मातृभाषा को लेकर लिया गया निर्णय है। त्रिभाषा फॉर्मूला नयी शिक्षा नीति को नए क्षितिज प्रदान करने वाला साबित होगा। मातृभाषा अगर प्रारम्भिक शिक्षण का आधार बनती है तो समाज के सभी वर्गों की सहभागिता देश और समाज के विकास में स्वतः बड़े स्तर पर बढ़ेगी।

बेहतर शैक्षिक संवाद के लिए मातृभाषा अहम् है। शिक्षा को अपने समाज के अनुरूप संचालित करने और अपनी भाषाओं में शिक्षण करने से ज्ञान के नए क्षितिज खुलेंगे। नवाचार के नए-नए आयाम उभरेंगे। मातृभाषा में चिंतन सृजन का परवाज प्रदान करता है। वास्तव में भाषाएं विचारों, विचारधाराओं, कल्पनाओं और अपने व्यापक सामाजिक-दर्शन की स्पष्टता का माध्यम बनती हैं। भारतीय चिंतन दृष्टि व्यापक और गहन होते हुए भी आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और वैचारिकी में कोई सफल पायदान स्थापित नहीं कर पायी है। भाषाई दृष्टि से पंगु बने रहना हमारी शिक्षा व्यवस्था की पहले से ही बड़ी कमजोरी रही है। सरकार की नई शिक्षा नीति में भाषाई आधार को मजबूत बनाते हुए मातृभाषा को तरजीह मिलना एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण की दिशा में सार्थक कदम है। मातृभाषा हमें दूसरों के विचारों, भावों और भाषाओं को सीखने व समझने में सहज रूप से समर्थ बनाती चलती है।

दुनिया के सभी विकसित देशों में शिक्षा का माध्यम मातृभाषाएं रही हैं। अनुभव बताते हैं कि बच्चा मातृभाषा में शिक्षा को आसानी से ग्रहण करता है। मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थी की अधिगम क्षमता ज्यादा होती है। अपनी भाषा के साथ जो मजबूत मनोबल जुड़ा होता है उससे भी बच्चे के व्यक्तित्व विकास में इजाफा होता है उसकी तार्किक दृष्टि भी विकसित होती है। अध्ययन बताते हैं कि मातृभाषा में बच्चे का शिक्षण उसके मानसिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को भी प्रभावित करता है। मातृभाषा में शिक्षण सरल और सहज बन जाता है। परिणाम बच्चे शनैः-शनैः रुचिकर क्षेत्रों में दक्षता हासिल कर अपने क्षेत्र में महारत हासिल कर लेते हैं। बच्चे में यह दक्षता ही नए विचारों को पनपाने में और उसकी अंतर्दृष्टि को विकसित करने में काम आती है। परिणाम बच्चा में न ही तो विषय की परिपक्कव समझ बन पाती और न ही भाषा की। क्योंकि बचपन की पूरी उर्जा और क्षमता को सीखने के दबाव बिखेर देते हैं।

नई शिक्षा नीति सहभागिता आधारित, बहुआयामी, हितपरक, लोक-केन्द्रित ओर समावेशी प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय आकांक्षाओं और उद्देश्यों को पूरा करने वाली महत्वाकांक्षी योजना है। नई शिक्षा नीति को तय समय सीमा के अंतर्गत और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाए तो यह भारत को एक ज्ञानमय समाज में रूपांतरित करने वाली सफल योजना साबित होगी। हमारे पास आज दुनिया तक पहुंचने का शानदार सु-अवसर है जो अब से पहले शायद कभी नहीं था। हमारे पास आज ऐसा नेतृत्व है, जो इन तमाम बदलावों को साकार करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है। हमें सिर्फ सकारात्मक प्रयासों के साथ सही दिशा में बढ़ने की आवश्यकता है। आने वाला समय हमें दुनिया का सबसे युवा देश बनाने वाला है। अपनी इस युवा जनशक्ति का सदुपयोग कर हम महाशक्ति बनने की दिशा में सार्थक हस्तक्षेप कर सकते हैं। अपने युवाओं को नये कौशलों और नये ज्ञान से लैस कर दुनिया में परचम लहरा सकते हैं।

भारत सुपर पावर बनने के अपने सपने को साकार कर सकता है। इस महान उददेश्य को पाने की दिशा में विज्ञान, तकनीक और अकादमिक क्षेत्रों में नवाचार और अनुसंधान करने के अभियान को तीव्र करना होगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आधार बनने वाली इस नयी शिक्षा नीति से इस दिशा में बड़ी उम्मीद है। नयी शिक्षा नीति के साथ जुड़े नए आयाम, नए मुकाम हासिल कराने में महती भूमिका निभायेगें। नई शिक्षा नीति जिस तरह से मातृ भाषा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ नए भारत के निर्माण का आधार प्रस्तुत करती है। इससे नव-सृजन और नवाचारों के जरिए समाज में नए प्रतिमान उभरेंगें। मातृभाषा जब शिक्षा का माध्यम बनेगी तो मौलिकता समाज में रचनात्मकता का अभियान छेड़ेगी। नई नीति में शिक्षा अधिकार कानून के नए क्षैतिजों का विस्तार समाज के कमजोर तबकों को मुख्य धारा में समावेशित करने के नए अवसर उपलब्ध करायेगा। शिक्षा को सतत् विकास और एक ज्ञानवान समाज बनाने की ओर उन्मुख करेगा।

भाषा और गणित को नई नीति में प्राथमिकता मिलना बच्चों में लेखन के कौशल और नवाचार का संचार करेगा। सृजनात्मक गतिविधियों का वातावरण पैदा करेगा। शिक्षण के परम्परागत तौर-तरीकों को नई टैक्नोलॉजी के जरिए नवोन्मेष के साथ कहानी, नाटक, समूह चर्चाएं, लेखन और स्मार्ट डिसप्ले बोर्ड, अध्ययन, अध्यापन और संवाद की नई संस्कृति का विकास नई शिक्षा नीति को वाकई नया तो बनाता है। तकनीकी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की पहल कोरोना संकट के कारण नई नीति को इस दृष्टि से और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में ले जायेगी। इसके लिए कंप्यूटर, लैपटॉप व फोन आदि के जरिए शिक्षण को रोचक बनाने में टैक्नोलॉजी शिक्षा के भावी परिदृश्य को बहुत हद तक बदल भी देगी।

नई शिक्षा नीति में यशपाल समिति की सिफारिश ‘लर्निंग विदाउड बर्डन’ और एनसीएफ़-2005 को बहुत हद तक स्वीकार लेना सकारात्मक सोच का संकेत है। प्राथमिक स्तर पर शिक्षा में बहुभाषिकता की पहल अति प्रशंसनीय है। नई शिक्षा नीति-2019 ऐसे शिक्षकों को अहमियत देती है जो स्थानीय भाषा जानते-समझते हों। मौलिकता को मथकर रचनात्मक परिणामों में परिवर्तित करने की क्षमता रखते हों। नई जरूरतों के हिसाब से नवाचार और नव-माध्यम ऑनलाइन शिक्षण की टैक्नोलॉजी का सदुपयोग कर समय के साथ समाज को सशक्त करने का आह्वान कर सके।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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