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उन्नाव रेप केस : पीड़ित के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत मामले में बहन से हो रही पूछताछ

10/10/2019

संजय कुमार

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (हि.स.)। उन्नाव रेप मामले में आज गुरुवार को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उसकी बहन का क्रॉस-एग्जामिनेशन शुरू किया। इस मामले में कोर्ट ने पीड़ित की मां का क्रॉस-एग्जामिनेशन खत्म किया।

इस मामले में आईफोन निर्माता कंपनी एप्पल ने कोर्ट को बताया कि घटना के दिन आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के लोकेशन का कोई डाटा उपलब्ध नहीं है। एप्पल के वकील ने डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज धर्मेश शर्मा की कोर्ट को यह जानकारी दी।

पिछले 29 सितम्बर को कोर्ट ने एप्पल कंपनी से घटना वाले दिन कुलदीप सिंह सेंगर के लोकेशन की जानकारी मांगी थी। दरअसल कुलदीप सिंह सेंगर ने कोर्ट को बताया था कि वो घटना वाले दिन घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। उसके बाद कोर्ट ने एप्पल कंपनी से कुलदीप सिंह सेंगर की लोकेशन मांगी थी।

पिछले एक अक्टूबर को कोर्ट ने उन्नाव के ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट का बयान दर्ज किया था। उन्नाव के ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट ने रेप पीड़ित की चाची का बयान दर्ज किया था। इस मामले में डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज धर्मेश शर्मा की कोर्ट ने पीड़ित की मां का भी बयान दर्ज किया।

पिछले 25 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़ित के साथ हुए एक्सीडेंट मामले की जांच के लिए सीबीआई को 15 दिनों का और वक्त दिया था। पिछले 24 अक्टूबर को कोर्ट ने पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों को दिल्ली में रहने की व्यवस्था करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने दिल्ली महिला आयोग को इसके इंतजाम करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पीड़ित को पिछले 28 जुलाई को लखनऊ से दिल्ली एम्स में इलाज के लिए शिफ्ट किया गया था। पिछले 11 और 12 सितम्बर को जज धर्मेश शर्मा ने एम्स के ट्रॉमा सेंटर जाकर बने अस्थायी कोर्ट में पीड़ित का बयान दर्ज किया था। पीड़ित का बयान इन-कैमरा दर्ज किया गया । बयान दर्ज करने के दौरान आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को भी ट्रामा सेंटर में बनाए गए अस्थायी कोर्ट में पेश किया गया था।

पिछले छह सितम्बर को जज धर्मेश शर्मा ने ट्रायल पूरा करने के लिए 45 दिन की समयसीमा को बढ़ाये जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत देते हुए कहा था कि आगे भी समयसीमा बढ़ाये जाने की ज़रूरत महसूस होने पर वो सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

पिछले दो सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने तीस हजारी कोर्ट से पूछा था कि मामले की सुनवाई करने में कितना समय लगेगा। दरअसल इस मामले के एक आरोपित शशि सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस केस से जुड़े दुर्घटना मामले में सीबीआई की ओर से अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है।

 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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