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केन्द्रीय राज्य मंत्री का पैतृक गांव पत्योरा विकास की रफ्तार में पीछे

01/08/2020

-पचास लाख से अधिक की धनराशि अवमुक्त होने के बाद भी गांव की नहीं बदली सूरत
-चार्ज लेने के बाद एडीओ पंचायत ने ग्राम पंचायत से निर्माण कार्यों की मांगी रिपोर्ट

पंकज मिश्रा
हमीरपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। केन्द्रीय राज्य मंत्री साध्वीं निरंजन ज्योति का पैतृक गांव पत्योरा विकास की रफ्तार में बहुत पीछे रह गया है। इस गांव के तमाम लोग सरकारी नौकरियों में हैं। इस गांव से महानिदेशक स्वास्थ्य तथा एसएसपी तक के बड़े औधे में रह चुके हैं। इसके बावजूद गांव बदहाली से नहीं उबर पा रहा है। गांव को चमकाने के लिये पचास लाख से अधिक की धनराशि भी अवमुक्त हुयी लेकिन ये गांव विकास की रफ्तार नहीं पकड़ सका। 

सुमेरपुर थाना क्षेत्र का पत्योरा गांव बीहड़ में बसा है। हमीरपुर शहर से महज इस गांव की दूरी 20 किमी है। पत्योरा केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वीं निरंजन ज्योति का पैतृक गांव है। जहां इनके परिवार के लोग रहते हैं। साध्वीं दूसरी बार केन्द्रीय मंत्रिमंडल में ग्राम्य विकास देख रही हैं। इस गांव में जलनिकासी के समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश से जगह-जगह दो फीट तक पानी भर जाता है। लोग घरों से बाहर भी नहीं निकल पाते है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवायें भी अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी जबकि रोजगार के साधन न होने की वजह से ज्यादातर लोग गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में मजदूरी करते हैं। पिछले साल लाखों की धनराशि गांव को विकास की रफ्तार देने के लिये अवमुक्त की गयी थी लेकिन गांव की सूरत अभी भी बदहाल है।

गांव के एडीओ पंचायत सत्यप्रकाश गुप्ता ने बताया कि पत्योरा गांव में राज्य वित्त से 12 लाख 17 हजार 271 रुपये तथा 14 वें वित्त से 36 लाख 866 रुपये की धनराशि नाली, खंडज़ा और सीसी सड़क निर्माण के लिये आयी थी। उन्होंने कहा कि इस गांव का हाल में ही चार्ज मिला है। लिहाजा ग्राम पंचायत के निर्माण कार्यों की रिपोर्ट मांगी गयी है। एडीओ ने बताया कि पूरे मामले की जांच के बाद ही सही तस्वीर सामने आयेगी।

छह मजरों में बटा गांव
गांव की जनसंख्या करीब 10 हजार है। जिसमें करीब 3200 मतदाता 15 वार्डों में विभाजित हैं। कई मजरों मुच्छीताला, मलिहाताला, शिवरामपुर, बलिया बखरी, कंचनपुरा व विज्ञानपुरा में बटा है। सभी मजरे एक दूसरे से जुड़े हैं।

29 वर्ष बाद भी स्वास्थ्य केंद्र बदहाल
रामदयाल संखवार ने कहा कि गांव निवासी स्वास्थ्य महानिदेशक रहे स्व. बच्चीलाल ने नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की नींव रखी थी। 5 जून 1989 को प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री बिहारीलाल दोहरे ने इसका शिलान्यास किया था। 1991 में अस्पताल बनकर तैयार हो गया था। तबसे आज तक भवन का कायाकल्प नहीं हो सका है। एक एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती होने के बाद भी एक वर्ष से पद रिक्त है। एलटी का भी पद दो वर्षों से रिक्त है। शिकायत करने पर सुनवाई नहीं हो रही है। स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।

जलनिकासी की नहीं समुचित व्यवस्था
वार्ड 13 के ग्राम पंचायत सदस्य कल्याण सिंह बताते हैं कि वह लगातार तीसरी बार निर्विरोध सदस्य बने हैं। उनके वार्ड के सार रास्ते कीचड़ व दलदल भरे हैं। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से बारिश का पानी व घरों का गंदा पानी मेन रास्तों पर जमा होता है।

डेढ़ फीट ऊंचा घरों में भरता है पानी
मजरा मुच्छीताला निवासी श्रीकृष्ण निषाद बताते हैं कि पूरे मजरे में जल निकासी की व्यवस्था नहीं है। ग्राम पंचायत से दो बार नाली बनी, लेकिन धन की बर्बादी हुई। गहराई व चौड़ाई न होने से पूरी नाली पट चुकी है। बारिश में पूरा घर में डेढ़ फुट पानी से भर जाता है। यही हाल पूरे मजरे का है।

पेयजल के साधन भी धड़ाम
जलसंस्थान ने एकल पेयजल योजना से करीब एक हजार आबादी को साफ पानी मिलता है। करीब एक सैकड़ा हैंडपंप हैं। जिसमें आधा दर्जन हैंडपंप रिबोर को व आधा दर्जन मरम्मत कार्य के लिए पड़े हैं। गांव में करीब दो दर्जन प्राचीन कुएं भी हैं। जिनमें वर्षों से सफाई नहीं हुई है। जिससे ज्यादातर सूख चुके हैं।

हिन्दुस्थान  समाचार


 
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