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भारत सरकार के शानदार सौ दिन

11/09/2019

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

रेन्द्र मोदी सरकार ने सौ दिन में होनहार बिरवान की कहावत चरितार्थ की है। इस अल्प अवधि में अब तक असंभव लगने वाली कई समस्याओं का समाधान सफलतापूर्वक हो गया। संविधान के अस्थाई अनुछेद 370 को सत्तर वर्षों तक हौव्वा बनाकर रखा गया था। अदृश्य अनुछेद 35ए पर भी यही स्थिति थी। मोदी सरकार ने मात्र दो दिन की संसदीय कवायद के बाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल दिया। तीन तलाक को समाप्त करने का साहस भी इसी सरकार में था। यह भी मुकम्मल हुआ। कश्मीर मुद्दे को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र समेत दुनियाभर में उठाने की कोशिश की। लेकिन भारत सरकार के फैसले को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का भी समर्थन मिला। कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं और सरकार राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। सरकार की तरफ से कहा गया कि अर्थव्यवस्था की मंदी चक्रीय होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद बहुत मजबूत है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और घरेलू मांग में वृद्धि के साथ जीडीपी विकास दर जल्द ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगी। पॉक्सो, समान वेतन देने का ऐतिहासिक निर्णय, 40 करोड़ असंगठित मजदूर, छह करोड़ छोटे व्यापारी और 14  करोड़ किसानों को पेंशन देने की योजना लागू करना भी ऐतिहासिक है। इसके साथ जनधन, आधार और मोबाइल से पारदर्शिता लाकर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की योजना और बढ़ी है। जल संचय और जल संग्रह, जल की बचत और उसका सही उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में हर घर को पीने का स्वच्छ जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय का भी गठन किया गया है। सामाजिक न्याय के निर्णय, गरीब, मजदूर, किसान, दलित आदिवासियों को सक्षम बनाने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं। इन वर्गों को सुरक्षा कवच देने वाले निर्णय भी लिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार को बड़ी सफलता मिली है।
नरेन्द्र मोदी की रूस यात्रा भी सफल रही। कुछ ही दिन पहले रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रस्ताव को खारिज कराने में बड़ी भूमिका का निर्वाह किया। उसने खुलकर भारत का समर्थन किया। यह कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना, जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाना भारत का आंतरिक मामला है। इस पर संयुक्त राष्ट्र संघ या किसी अन्य देश को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है। दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। द्विपक्षीय व्यापार को तीस अरब डॉलर तक ले जाने का संकल्प व्यक्त किया गया। इसी क्रम में मोदी ने पूर्वी आर्थिक मंच में भागीदारी की। भारत इसमें मुख्य अतिथि था। कई देशों के साथ मोदी की द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबो ने कहा कि दोनों देश हिन्द प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाएंगे। 
इसके पहले फ्रांस के राष्ट्रपति ने जी-7 में शामिल होने के लिए नरेन्द्र मोदी को विशेष रूप से आमंत्रित किया था। फ्रांस ने भी कश्मीर पर भारत के कदम का पूरा समर्थन किया। संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया। जी-7 में नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावों को विशेष महत्व दिया गया। भारत के साथ फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने संबंधों को मजबूत बनाने और रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया। संयुक्त अरब अमीरात ने मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ जायद' से सम्मानित किया। बहरीन में सबसे पुराने मंदिर श्रीनाथजी के पुनरुद्धार की औपचारिक शुरुआत में मोदी शामिल हुए। क्राउन प्रिंस सलमान बिन हमाद बिन ईसा अल खलीफा ने नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च सम्मान 'द किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां' से सम्मानित किया। दूसरे कार्यकाल की अल्प अवधि में ही मोदी मालद्वीप, श्रीलंका और भूटान की यात्रा कर चुके हैं। यह पड़ोसियों से बेहतर संबन्ध रखने की उनकी नीति है। मोदी ने शपथ ग्रहण में पड़ोसी देशों को नई दिल्ली आमंत्रित किया था।
भूटान और भारत के बीच सहयोग बढ़ा। दोनों के संबन्ध मजबूत हुए। दूसरा लक्ष्य यह कि भूटान में चीन के हस्तक्षेप को रोकने में सफलता मिली है। दोनों देशों  के बीच हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट, नॉलेज नेटवर्क, मल्टी स्पेशलियटी हॉस्पिटल, स्पेस सेटेलाइट, रूपे कार्ड सहित नौ समझौते हुए। इन्हीं सौ दिन में भारत ने चंद्रयान छोड़ा। इससे विश्व में स्वतंत्र भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी। भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार हुआ। इस उपलब्धि के एक हफ्ते बाद ही हमारी संसद ने एक बार में तीन तलाक देने पर रोक का विधेयक पारित कर दिया। इससे भारत की मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से आजादी मिली। मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिलने के अगले हफ्ते ही जम्मू कश्मीर को अलगाववादी और विकास विरोधी अनुच्छेद से आजादी दिलाई गई। अनुच्छेद 370 को हटाने का  निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा व एकता की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तक हमारी सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा सुदृढ़ होगी। सैन्य गतिविधियों के लिए ढांचागत निर्माण संभव होगा। अलगाव की बाधा दूर हुई है। अब जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के लोग भी जमीन लेकर बस सकेंगे। कश्मीर का अब अलग झंडा नहीं होगा, अलग संविधान नहीं होगा, दोहरी नागरिकता समाप्त हुई। जम्मू कश्मीर की लड़कियों को अब दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करने पर उनकी नागरिकता खत्म नहीं होगी। जम्मू कश्मीर सरकार का कार्यकाल अब छह साल का नहीं, बल्कि पांच वर्ष का ही होगा। भारत का कोई भी नागरिक अब जम्मू कश्मीर में नौकरी भी कर सकेगा। वहां के लोग अब शिक्षा के अधिकार, सूचना के अधिकार जैसे भारत के हर कानून का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार की कैग जैसी संस्था अब जम्मू-कश्मीर में ऑडिट कर सकेगी, सुप्रीम कोर्ट का हर फैसला लागू होगा,
महिलाओं को पर्सनल कानून से आजादी मिलेगी। नरेन्द्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा के लिए मालद्वीप और श्रीलंका का चयन किया। यह उनकी पड़ोसी देशों से अच्छे संबन्ध रखने की नीति का ही हिस्सा था। नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण में  बिम्सटेक देशों को बुलाया था। आठ देशों के नेता शपथ ग्रहण में शामिल हुए। इन सभी के साथ नरेन्द्र मोदी ने द्विपक्षीय व क्षेत्रीय विषयों पर वार्ता की थी। इसमें आपसी संबन्ध सुधारने के साथ साथ बिम्सटेक देशों के बीच सहयोग बनाने पर सहमति बनी। मालद्वीव बिम्सटेक का सदस्य नहीं है। यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण में उसको आमंत्रित नहीं किया गया था। मोदी ने स्वयं मालद्वीप जाकर दोस्ती का पैगाम दिया है। जाहिर है कि सरकार ने सौ दिन में लंबी यात्रा तय की है।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)  


 
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